धर्म/अध्यात्म

शरद पूर्णिमा पर 16 कलाअन से पूर्ण काहें होत अहै चंद्रमा?

हिंदू धर्म मां आश्विन माह की शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2026) कै विशेष महत्वर अलावा। इहे वर्ष की सबसे पवित्र औ शुभ पूर्णिमा माना जात अहै। इ अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करै कै विशेष महत्व बा। इ दिन देवी लक्ष्मी की साधना करै से सुख-समृद्धि मां वृद्धि होत अहै औ धन लाभ कै योग बनत अहै।

धार्मिक मान्यताओं कै अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात कै चंद्रमा अपनी 16 कलाअन से परिपूर्ण होत अहै औ अमृत की वर्षा होत अहै। इहे मारे शरद पूर्णिमा की रात कै खुले आसमान के नीचे खीर रखी जात अहै औ सबेरे उस खीर को प्रसाद के रूप मां ग्रहण कीन्हा जात अहै। इ से व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होत अहै, पर का आप जानत हैं कि शरद पूर्णिमा की रात कै चंद्रमा अपनी 16 कलाअन से काहें परिपूर्ण रहत अहै औ एकार का धार्मिक महत्व बा?

अगर नाई, तौ आवा इ लेख मां आपको विस्तार से बतावत हैं।

चंद्रमा की 16 कलाअन कै महत्व

धार्मिक मान्यता बा कि पूरे वर्ष मां केवल शरद पूर्णिमा की रात ही चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाअन से पूर्ण होत अहै औ पृथ्वी के सबसे करीब रहत अहै। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चंद्रमा की 16 कलाएं उसकी 16 अलग-अलग अवस्थाअन को दर्शावत हैं। जिस तरह से सूर्य से 7 तरह की किरणें निकलत हैं, उसी तरह से चंद्रमा से भी 16 अलग-अलग तरह की किरणें निकलत हैं। इन्हीं 16 किरणों को चंद्रमा की 16 कलाएं कहा जात अहै।

भगवान श्रीराम 12 कलाअन से युक्त रहे औ श्रीकृष्ण को भी 16 कलाअन का पूर्ण अवतार माना गवा अहै। ऐसी मान्यता बा कि शरद पूर्णिमा के चंद्रमा की किरणें व्यक्ति के मानसिक तनाव औ क्रोध को कम करत हैं। इ रात जागरण औ पूजा-पाठ करै से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होत अहै। साथ ही मन एकाग्र होत अहै।

चंद्रमा की 16 कलाअन के नाम

अमृता
मनदा (विचार)
पुष्प (सौंदर्य)
पुष्टि (स्वस्थता)
तुष्टि (इच्छापूर्ति)
ध्रुति (विद्या)
शाशनी (तेज)
चंद्रिका (शांति)
धरा
कांति (कीर्ति)
ज्योत्सना (प्रकाश)
श्री (धन)
प्रीति (प्रेम)
अंगदा (स्थायित्व)
पूर्ण (पूर्णता अर्थात कर्मशीलता)
पूर्णामृत (सुख)

कब अहै शरद पूर्णिमा 2026

शरद पूर्णिमा की तिथि कै शुरुआत- 25 अक्टूबर को सबेरे 11 बजकर 55 मिनट
शरद पूर्णिमा की तिथि कै समापन- 26 अक्टूबर को सबेरे 09 बजकर 41 मिनट

वैदिक पंचांग के अनुसार, इ बार शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को मनाई जाई।

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