संपादकीय

दिल्ली मां एकजूट देखै वाले दल यूपी मां आपन बीच लड़ रहल अहैं, INDIA Bloc कै इ कैसी एकता अहै?

दिल्ली मां विपक्षी गठबंधन INDIA कै भीतर एक बेर फेर एकजुटता कै कवायद तेज होइ गवा अहै। चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दा पर साझा लड़ाई लड़ै कै तैयारी होत अहै, नेताइन के बीच बातचीत बढ़ी अहै अउर दिल्ली मां सब विपक्षी दलिन कै बैठक भी बोलाइ लीन गवा अहै। लेकिन सियासत कै असली सवाल इहे अहै कि का दिल्ली कै एकजुटता उत्तर प्रदेश कै जमीन तलक पहुँच पाई? काहेंकि जवने गठबंधन को दिल्ली मां एक मंच पर खड़ा करै कै कोसिस होत अहै, उहे गठबंधन कै सबड़े बड़का चुनावी मैदान उत्तर प्रदेश मां समाजवादी पार्टी अउर कांग्रेस के बीच खींचतान लगातार खुलकर सामने आवत अहै।

उल्लेखनीय अहै कि तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी अउर लोकसभा मां विपक्ष के नेता राहुल गांधी चुनाव आयोग के मुद्दा पर विपक्षी दलिन को एक मंच पर लावै अउर उन दलिन से संवाद बढ़ावै पर चर्चा करत अहैं, ज जो हाल के महीना मां कांग्रेस से दूरी बनाए हुए अहैं। इकै साथे-साथे INDIA गठबंधन के घटक दलिन कै बैठक बुलावै, संयुक्त प्रेस वार्ता अउर देशव्यापी साझा आंदोलन कै संभावना पर भी बातचीत चलत अहै। यानी ऊपर से संदेश इहे अहै कि विपक्ष को फेर एक साथ खड़ा कीन जाइ।

मगर हुजूर, राजनीति मां असली परीक्षा मंच पर हाथ मिलावै कै नाहीं, मैदान मां सीट बाँटै कै होत अहै। अउर इहे से कहानी बदल जात अहै। उत्तर प्रदेश मां 403 विधानसभा सीटिन कै हिसाब-किताब सुरु होते ही सपा अउर कांग्रेस के बीच पुरान दोस्ती कै परतें खुरचने लगी अहैं। कांग्रेस अउर जियादा सीटिन कै माँग करत अहै, जबकि समाजवादी पार्टी आपन ताकत अउर पिछलका चुनावी प्रदर्शन के आधार पर बड़का हिस्सा आपन पास राखै चाहत अहै। दुनो दल आपन-आपन स्तर पर सीटिन कै ताकत-कमजोरी कै आकलन करत अहैं अउर गंभीर सीट बँटवारे कै बातचीत अक्टूबर मां सुरु होवै कै संभावना बताई गई अहै।

उहाँ, तनाव सिर्फ बंद कमरा कै बातचीत तलक सीमित नाहीं अहै। कांग्रेस के इमरान मसूद जल्द गठबंधन तय करै कै माँग कीहिन अउर कहिन कि भ्रम कै स्थिति मां कांग्रेस चुनावी तैयारी नाहीं कर सकत। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय तौ इहाँ तलक कहिन कि मतभेद होवै पर पार्टी सब सीटिन पर चुनाव लड़ै कै तैयार अहै। दूसਰ तरफ सपा कै सांसद इकरा हसन साफ कहिन कि उत्तर प्रदेश मां भाजपा को चुनौती दै कै क्षमता अखिलेश यादव के नेतृत्व मां अहै।

इहै तरह यानी एक ही गठबंधन मां दुइ सुर, दुइ दावा अउर दुइ नेतृत्व केंद्र दिखाई देत अहैं। अखिलेश यादव कै रायबरेली से पीडीए यात्रा सुरु करब भी इहे रस्साकशी कै हिस्सा मान जावत अहै। रायबरेली कांग्रेस कै पारंपरिक गढ़ रहा अहै, लेकिन अखिलेश उहाँ से आपन राजनीतिक यात्रा सुरु करिके इ संदेश दीहिन कि उत्तर प्रदेश मां जमीन किसके पास अहै, एकर हिसाब अलग से होई। इकै कई राजनीतिक विश्लेषक सीट बँटवारे से पहिले सपा कै राजनीतिक ताकत दिखावै कै कवायद के तौर पर देखत अहैं।

अउर अब मैनपुरी-इटावा-सैफई कै धरती से शिवपाल सिंह यादव कै बयान इ खींचतान मां नया तड़का लगावत अहै। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय कहिन रहे कि अखिलेश रायबरेली जा सकत अहैं तौ कांग्रेस भी इटावा, कन्नौज अउर मैनपुरी जाई। जवाब मां शिवपाल कहिन— जाइअ, अभियान चलाइअ, लेकिन उहाँ कांग्रेस को वोट नाहीं मिली। वह आपन जसवंतनगर क्षेत्र कै हवाला दैत कांग्रेस को उहाँ वोट न मिलै कै बात कहिन अउर सपा कै जीत कै दावा कीहिन।

अब शिवपाल के इ बयान कै राजनीतिक मतलब समझाइअ। इ सिर्फ किसो एक रैली या दौरा पर प्रतिक्रिया नाहीं अहै। इ दरअसल सपा कै उ आत्मविश्वास कै प्रदर्शन अहै जवने मां वह कांग्रेस को इ याद दिलावै चाहत अहै कि उत्तर प्रदेश मां गठबंधन कै जमीन सपा कै संगठन अउर सामाजिक आधार से तैयार होत अहै। मैनपुरी, इटावा अउर सैफई नियन इलाकन मां कांग्रेस कै चुनावी अभियान सपा के लिए सिर्फ सहयोगी दल कै गतिविधि नाहीं, बल्कि आपन प्रभाव क्षेत्र मां दूसर सहयोगी कै राजनीतिक मौजूदगी बढ़ावै कै कोसिस के रूप मां देखा जा सकत अहै।

इहै INDIA गठबंधन कै सबड़े बड़की पहेली अहै। दिल्ली मां सवाल अहै कौन-कौन साथ आई? उत्तर प्रदेश मां सवाल अहै किसके साथ कौन कितनी सीट पर लड़ी? दिल्ली मां साझा मुद्दा खोजे जात अहैं, लखनऊ मां सीटिन कै हिसाब-किताब चलत अहै। दिल्ली मां एकजुटता कै तस्वीर खींची जात अहै अउर यूपी मां दुनो दल आपन-आपन झंडा ऊँचे करै मां जुटे अहैं।

हम आपको याद दिलाइ देत अहैं कि 2024 मां उत्तर प्रदेश मां सपा अउर कांग्रेस मिलकर 43 लोकसभा सीटें जीते रहे। सपा 37 अउर कांग्रेस छह पर विजयी रही रही। इहै प्रदर्शन अब दुनो दलिन कै आत्मविश्वास अउर दावेदारी कै आधार बन गत अहै। लेकिन 2027 कै विधानसभा राजनीति कै गणित अलग अहै। सपा आपन संगठन, सामाजिक समीकरण अउर विधानसभा मां आपन मौजूदा ताकत के आधार पर जियादा हिस्सेदारी चाहत अहै, जबकि कांग्रेस 2024 कै प्रदर्शन अउर राहुल गांधी कै सक्रियता को आपन बढ़त राजनीतिक हैसियत कै आधार बनावत अहै।

यानी मामला साफ अहै। INDIA गठबंधन को जोड़ै कै कोसिस दिल्ली मां होत अहै, लेकिन उसे बचवै कै असली परीक्षा उत्तर प्रदेश मां होनी अहै। काहेंकि गठबंधन सिर्फ नेताइन कै मुलाकातो अउर साझा तस्वीरन से नाहीं चलत। गठबंधन तब चलत अहै जब कार्यकर्ता एक-दूसरे के लिए जमीन छोड़ें, नेता एक-दूसरे कै सीमा कै सम्मान करें अउर सीटिन के बँटवारे पर दुनो पक्ष आपन महत्वाकांक्षा को किसो साझा फार्मूला मां बाँध सकें। वरना दिल्ली मां जितनी बेर हाथ मिलीहिं, मैनपुरी अउर रायबरेली मां उतनी ही बेर पाँव एक-दूसरे कै जमीन पर पड़त दिखाई देइहिं। उत्तर प्रदेश कै राजनीति मां इहै पाँव कब एक-दूसरे कै रस्ता मां आ जाइअ, एकर फैसला अक्सर दिल्ली कै बैठक नाहीं, जमीन पर लड़ै वाला कार्यकर्ता करत अहै।

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