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Delhi मां शुरू भवा World Gastroenterology Congress, 61 देसन के 3000 विशेषज्ञ जुटिन

विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कांग्रेस (डब्ल्यूसीओजी) 2026 बुध के दिन इहाँ आरंभ भवा, जवने मां वैश्विक अउर भारतीय ‘गैस्ट्रोएंटरोलॉजी’ विशेषज्ञन जठरांत्र (पाचन तंत्र) अउर यकृत (लीवर) संबंधी बीमारी के बदलत प्रकोप, जल्द निदान की जरूरत अउर रोकथाम अउर उपचार कै खातिर विकसित होत तौर-तरीकन पर विचार-विमर्श करिन।

भारत मां पहिली बार होत इ चार-दिवसीय कांग्रेस मां 61 देसन कै कम से कम 3,000 प्रतिनिधि शामिल भए अहैं, जवने मां दुनिया भर के जाने-माने चिकित्सक अउर अनुसंधानकर्ता भी शामिल अहैं।

पहिला दिन संक्रामक, चयापचय, सूजन अउर कैंसर जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पाचन तंत्र से जुड़ी) बीमारी के बढ़त दायरा पर चर्चा की गवा। ‘एच. पाइलोरी’ अउर आंतन मां कीड़न से होए वाली बीमारी अबहियों बड़ी आबादी कै प्रभावित करत अहै।

‘मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लीवर डिजीज’ (एमएएसएलडी), ‘इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज’ (आईबीडी), ‘गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर’ अउर पाचन तंत्र की पुरानी बीमारी स्वास्थ्य प्रणाली पर नई चुनौती अउर मांग खड़ी करत अहैं।

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) कै जठरांत्र विज्ञान अउर मानव पोषण इकाई विभाग के प्रोफेसर अउर इ कांग्रेस की स्थायी आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. गोविंद मखारिया कहिन कि पेट अउर आंत की बीमारी कै बोझ अपने पैमाना अउर क्लिनिकल प्रोफ़ाइल, दुनू तरह से बदलत अहै।

उन्हों कहिन, ‘‘एच पाइलोरी जैसे संक्रमण अउर परजीवी बीमारी के साथ-साथ चयापचय अउर जीवन शैली से जुड़ी बीमारी भी तेज़ी से अहम होत जात अहैं। एहसे, चाहे यकृत की बीमारी होय, कोलोरेक्टल कैंसर, सीलिएक बीमारी या आईबीडी, इनका समय पर पता लगाना बहुत ज़रूरी अहै।’’

डॉ. मखारिया कहिन, ‘‘डब्ल्यूसीओजी 2026 इ प्राथमिकताइन का एक साथ लावत अहै अउर अलग-अलग आबादी मां बीमारी की रोकथाम, पहचान अउर इलाज पर ध्यान देवे का मौका देत अहै।’’

विशेषज्ञन कम उमिर मां होए वाले ‘कोलोरेक्टल कैंसर’ के मामला मां दुनिया भर मां होत बढ़ोतरी पर ध्यान केंद्रित करिन। इमा जोखिम बढ़ावे वाले बदलत कारक, जोखिम का पता लगावे के तरीका, जांच की भूमिका अउर नए ‘नॉन-इनवेसिव’ बायोमार्कर जैसे विषय शामिल रहिन।

विशेषज्ञन उन लोगन की पहचान जल्दी करे की जरूरत पर चर्चा करिन, जेन्हार जोखिम ज़्यादा अहै, खासकर उन जगहन पर जहाँ जांच की सुविधा सीमित अहै। उन्हों इ काम मां मदद करे वाले नए तरीका की संभावनाइन पर भी बात करिन।

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