
(फाइल फोटो कै साथ) नई दिल्ली, 12 अक्टूबर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत सोमवाड़ कय कहिन कि हर वकील कय तय कीन गेय स्थानन पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन मां शामिल होवै कै अधिकार अहै। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची अउर न्यायमूर्ति वी. मोहना कै पीठ के आगू वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन दलील दिहिन कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार अउर निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शनन के दौरान वकीलों कय हिरासत मां लीन गवा अउर ‘‘पुलिस ज्यादती’’ कै कुछ मामला भी सामने आवा।
इ पर पीठ मामला कय मंगरवार कय सुनवाई खातिर सूचीबद्धा करैक सहमति जताई। शंकरनारायणन वकीलों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई अउर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) कै धारा 163 के तहत काहू आदेश कै सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न होवै पर भी चिंता जताई। वरिष्ठ अधिवक्ता न्यायिक हस्तक्षेप कै अनुरोध करत अदालत से पुलिस कय संयम बरतैक निर्देश देवै कै आग्रह करिन।
ऊ आरोप लगाइन कि प्रदर्शनन के दौरान वकीलों के खिलाफ बलप्रयोग कीन गवा अउर उनके हिरासत मां लीन गवा। ऊ कहिन, ‘‘धारा 163 के तहत काहू आदेश सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न अहै। हमन एक धारा कै संवैधानिक वैधता कय भी चुनौती दिहिन अहै।’’
ऊ आरोप लगाइन कि वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत कय सड़कन पर घसीटा गवा। वरिष्ठ अधिवक्ता इ घटना कय ‘‘बहुत अनुचित’’ बतावत कहिन कि उच्चतम न्यायालय वकीलों से बार-बार संयम बरतैक आग्रह कीन अहै। ऊ उम्मीद जताई कि अदालत पुलिस कय भी अइसहे संदेश दी.
ऊ इ आरोप भी लगाइन कि लोग प्रदर्शनकारियन पर हमला करत रहिन, जबकि पुलिस प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप नाई करत रही। बच्चन पर लाठियन बरसाए जाब कै खवरन कै जिक्र करत ऊ कहिन कि कथित घटनाहन कै वीडियो मंगरवार कय अदालत मां देखाए जाहीं।
शंकरनारायणन इ दावा भी करिन कि वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी अउर उत्तरा बब्बर कय प्रदर्शनन के दौरान बसहन मां हिरासत मां राखा गवा रहा। ऊ उच्चतम न्यायालय से हस्तक्षेप करैक अउर पुलिस ज्यादती के खिलाफ कड़ा संदेश देवै कै आग्रह करिन। ऊ कहिन कि वकीलों अउर नागरिकन कय असुरक्षित नाई छोड़ा जावैक चाहि।
दलीलन पर प्रतिक्रिया देत प्रधान न्यायाधीश कहिन कि ऊ इ समय काहू अउर टिप्पणी नाई करै चाहत, मुला ऊ जोर देत कहिन कि वकीलों कय तय कीन गेय स्थानन पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन मां शामिल होवै कै अधिकार अहै।
प्रधान न्यायाधीश कहिन, ‘‘फिलहाल हम काहू नाई कहै चाहत।’’ ऊ इ भी कहिन कि उच्चतम न्यायालय कय अइसन घटनाहन कै मंच नाई बनैक चाहि, जौन ओकर संस्थागत भूमिका कय कमजोर करइ सकइ। ऊ दोहराइन कि हर वकील अउर बार के सदस्य कय तय कीन गेय स्थानन पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन मां शामिल होवै कै अधिकार अहै।
उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन (एससीबीए) अउर दुसरहन कै याचिकाएं पहिले से मंगरवार कय सुनवाई खातिर सूचीबद्धा कीन जाइ चुका अहै।



