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प्रभासाक्षी न्यूज रूम: कारगिल युद्ध छिड़ी तौ खुद कै रोक नाई पाएस रहें नाना पाटेकर, सीधे रक्षा मंत्री से इजाजत लइके युद्ध क्षेत्र मां उतर गए रहें

प्रभासाक्षी न्यूज रूम: कारगिल युद्ध छिड़ी तौ खुद कै रोक नाई पाएस रहें नाना पाटेकर, सीधे रक्षा मंत्री से इजाजत लइके युद्ध क्षेत्र मां उतर गए रहें

हिंदी औ मराठी सिनेमा के दमदार अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के साथ भारतीय सिनेमा केवल एक बड़ा कलाकार नाई खोइस, बल्कि अइसन शख्सियत खोइस जेकर पहचान कैमरे के रौशनी से कहीं आगे तलक रहै। 75 बरस के उमिर मां गोवा स्थित आपन आवास पर उनका निधन भवा। उनके जाए से फिल्म जगतइ नाई, बल्कि देश भर मां शोक के लहर बा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत राजनीति, सिनेमा औ सामाजिक क्षेत्र के तमाम हस्ती उनका श्रद्धांजलि दीहिन। महाराष्ट्र सरकार मराठी रंगमंच तथा हिंदी-मराठी सिनेमा मां उनके योगदान कै देखत भवे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करै के फैसला कीन्हिस।

देखल जाय तौ करीब पांच दशक लंबा फिल्मी सफर मां उ अइसन किरदार गढ़ेन, जे परदा से निकलकय लोगन के स्मृति के हिस्सा बन गए। मुला नाना के जिनगी के एक अध्याय अइसनौ रहै, जउन उनके अभिनय यात्रा से अलग होके सीधे देश के सरहद से जुड़ै रहै। उनके भीतर एक सैनिकौ बसै रहै जउन उनका 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान करीब 60 दिनन तलक जवानन के बीच मोर्चे पर खड़ा रहै औ क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के हिस्सा बनै खातिर प्रेरित कीन्हिस रहै।

हम आपन बतावत हटी कि नाना पाटेकर 2024 मां मीडिया से बातचीत के दौरान बताएस रहें कि कारगिल युद्ध के समय उ खुद युद्ध क्षेत्र मां गए रहें। उ समय जॉर्ज फर्नांडिस रक्षा मंत्री रहें। नाना उनसे कारगिल जावै के इच्छा जताई रहें। शुरुआत मां उनका हतोत्साहित कीन्हिस गवा, मुला रक्षा मंत्री से बातचीत के बाद उहइ दिन उनका युद्ध क्षेत्र भेज दीन्हिस गवा। उ करीब 60 दिन हुवइ रहिन औ बाद मां क्विक रिएक्शन टीम (QRT) के हिस्सा बनिन।

जब उनसे पूछल गवा कि उ हुवइ का करिन, तौ उनका जवाब बहुत संक्षिप्त रहै, ओकर विवरण उ नाई बता सकत रहें। उ बताएस रहें कि कारगिल जावै के समय उनका वजन 76 किलो रहै औ दुइ महीना बाद लौटिन तौ उ 56 किलो बचि गए रहें। उनके बातन मां कउनो आत्मप्रचार नाई रहै, बल्कि एक सीधा-सा भाव रहै, “इतना-सा तौ कछु हम कर सकत हटी देश खातिर।”

एक रिपोर्ट के मुताबिक, नाना पाटेकर सैनिकन के साथ दुइ हफ्ता से ज्यादा समय तलक रहिन औ अलग-अलग पोस्ट पर जात रहिन। सैनिकन के बीच उ कउनो “अनौपचारिक उत्साहवर्धक” की तरह मौजूद रहिन। फिल्म ‘प्रहार’ खातिर उ मराठा लाइट इन्फैंट्री के साथ कठोर सैन्य प्रशिक्षण लिहिन रहै। उहइ अनुभव उनका सैनिकन के जिनगी के करीब पहुंचाइस।

उनकै एक कथन आज उनके निधन के बाद अउर ज्यादा सार्थक लागत बा, “हमारा सबसे बड़ा हथियार बोफोर्स या एके-47 नाई, हमारे जवान हैं।”

नाना के देशभक्ति केवल कारगिल तलक सीमित नाई रहै। महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकन मां सूखा, किसानन के समस्या औ जल संकट उनके सामाजिक सरोकार के बड़ा हिस्सा बन गए। अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ उ ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए जल संरक्षण औ जल संचयन के काम करिन। आत्महत्या करै वाला किसानन के परिवारन के मददौ कीन्हिस।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी उनके निधन पर कहिन कि नाना केवल उत्कृष्ट कलाकार नाई, बल्कि सामाजिक सरोकारन के प्रति अत्यंत संवेदनशील व्यक्ति रहिन। गडकरी उनका आपन करीबी मित्र बतावत भवे कहिन कि उनका निधन भारतीय सिनेमा खातिर बहुत बड़ी छती बा। ओहिजे एनसीपी (शरदचंद्र पवार) प्रमुख शरद पवारौ सूखा प्रभावित क्षेत्रन मां नाम फाउंडेशन के काम कै याद कीन्हिस। उ कहिन कि संकट के समय नाना के लोगन के साथ खड़ होब उनका आत्मविश्वास देवै रहै।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश आमटे बताएस कि नाना उनके भूमिका वाली मराठी फिल्म के सिलसिले मां हेमलकसा मां करीब एक महीना रहिन औ बाबा आमटे के कारज से बहुत प्रभावित भएन।

नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहिन कि बहुत कम अभिनेतारन मां नाना जइसन अभिनय के गहराई, विशिष्टता औ प्रभावशाली मौजूदगी देखैक मिलत बा। उ कहिन कि नाना अइसन किरदार निभाइन जेकरा पीढ़ियन याद रखी औ उनके निधन से “गहरा खालीपन” पैदा भवा बा।

हम आपन बतावत हटी कि 1978 के ‘गमन’ से फिल्मी सफर शुरू करै वाला नाना पाटेकर अभिनय के अइसन शैली विकसित कीन्हिस जेमा संवाद केवल बोलल नाई जात रहें, बल्कि असर छोड़त रहें। ‘परिंदा’ औ ‘अग्निसाक्षी’ खातिर उनका सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलिस, जबकि ‘क्रांतिवीर’ खातिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार मिलिस। 2013 मां उनका पद्मश्री से सम्मानित कीन्हिस गवा रहै।

देखल जाय तौ नाना पाटेकर के जाब इहइखातिर भी बड़ा शून्य बा क्योंकि उ आपन जिनगी के केवल परदा तलक सीमित नाई राखिन। उ अभिनेता रहें, सैनिकन के बीच खड़ होब वाला कलाकार रहें, किसानन औ सूखा प्रभावित परिवारन के मदद करै वाला सामाजिक कार्यकर्ता रहें औ आपन बेबाक आवाज खातिर पहिचानल जाब वाला व्यक्ति रहें।

परदा पर उनके आवाज गूंजत रहै, बल्कि जिनगी मां उनके काम के गूंज ओहू से कहीं दूर तलक पहुंचिस। कारगिल के चौकिअन सेइके महाराष्ट्र के सूखा गांवतन तलक, नाना पाटेकर के कहानी ओहि कलाकार के कहानी बा जउन अभिनय के पेशा बनइस, मुला आपन प्रभाव कै समाज औ देश खातिर इस्तेमाल कीन्हिस।

अब उ हमारे बीच नाई हटी, मुला उनके निभाएल किरदारन की तरह उनके जिनगी के इ अध्यायौ लंबा समय तलक याद कीन्हि जाई। ओम शांति।

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