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सुरुआती हिरासत गैर-कानूनी तौ बाद की Arrest भी अमान्य, Allahabad High Court कै फैसला

प्रयागराज (उप्र), सात अक्टूबर – इलाहाबाद उच्च न्यायालय प्रयागराज कै एक रहनिहार लैकै रिहा करै कै हुकुम देत भवा ई कहिस कि जब कवनो मनई कै सुरुवाती हिरासत गैर-कानूनी होत अहै तौ ओकरे बाद वैध आधारन पर की गई आधारित गिरफ्तारी अउर ओसुत जुड़ी रिमांड कै कार्रवाई भी अमान्य होई जात अहै।

न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन अउर न्यायमूर्ति अचल सचदेव कै खंडपीठ प्रयागराज कै सोरांव थाने कै पुलिस द्वारा रवि चौरसिया नावा मनई कै कथित गैर-कानूनी हिरासत से जुड़ी बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करत समै ई टिप्पणी करिन। अदालत कहिस कि जब कवनो मनई कै सुरुवाती हिरासत गैर-कानूनी होत अहै तौ ओकरे बाद कै गिरफ्तारी (भले ई वैध आधारन पर आधारित होय) अउर ओसुत जुड़ी रिमांड कै कार्रवाई भी अमान्य होई जात अहै।

अदालत कै गत 28 सितंबर कै हुकुम मां कहा गवा कि चौरसिया लैकै औपचारिक गिरफ्तारी या मजिस्ट्रेट कै आगू पेश कीने बगैर लगभग 31 घंटा तक पुलिस हिरासत मां रखै कै बाद 16 सितंबर को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कीन गवा रहा।

याचिका के मुताबिक, चौरसिया लैकै 14 सितंबर को अयोध्या से हिरासत मांइ लेइके सोरांव थाने लाये गए, मुला उप्पर समै गिरफ्तारी नाहीं देखाई गई रही। चौरसिया कै महतारी 15 सितंबर को ओकर हाल जानै खातिर थाने गई अउर बाद मां गैर-कानूनी हिरासत कै आरोप लागत भइ उच्च न्यायालय मां बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल करिन।

पुलिस गत 16 सितंबर को सबुह 10 बजके 45 मिनट पर चौरसिया लैकै औपचारिक रूप से गिरफ्तार करिन, गिरफ्तारी लैकै रोजनामचे (जीडी) मां दरग कीन, ओकर चिकित्सीय परीक्षण कराइ अउर मजिस्ट्रेट कै आगू पेश करिन, जेकर बाद उहै मनई न्यायिक हिरासत मां भेज दिहिन।

उच्च न्यायालय थाने से सीसीटीवी फुटेज मँगवाइस, जेकरे आधार पर अदालत ई पाइस कि थानाध्यक्ष अउर जांच अधिकारी द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे मां ई स्वीकार कीन गवा रहा कि चौरसिया पुलिस हिरासत मां रहा। थानाध्यक्ष रोजनामचे मां ओकर उपस्थिति दरग न कीन जाब लैकै अनजाने मां भई गलती बताइन, मुला अदालत ई स्पष्टीकरण खारिज कर दिहिन।

अदालत कहिस कि एक अनुभवी पुलिस अधिकारी रोजनामचे मां ई प्रविष्टि करै मां चूक नाहीं कर सकत रहा कि याचिकाकर्ता लैकै थाने लाया गवा रहा अउर हिरासत मां रखा गवा रहा।

न्यायालय ई पाइस कि औपचारिक गिरफ्तारी तब कीन गई जब पुलिस लैकै 15 सितंबर को दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका कै बारे मां पता चला। अदालत निष्कर्ष निकालिस कि चौरसिया लैकै रिमांड खातिर न्यायिक मजिस्ट्रेट कै आगू पेश कीने बगैर 24 घंटा से ज्यादा समै तक पुलिस हिरासत मां रखा गवा रहा।

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