
संभल (उप्र): उत्तर प्रदेश मां संभल जिला कै चंदौसी अदालत उच्चतम न्यायालय कै रोक कै कारण ‘स्थानीय शाही जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर’ विवाद कै सुनवाई 16 अक्टूबर तलक टरि दीहिन अहै। एक अधिवक्ता मंगल के इ जानकारी दिहिन।
उच्चतम न्यायालय नवंबर 2024 मां संभल की 16वीं शताब्दी की शाही जामा मस्जिद कै सर्वेक्षण पर अंतरिम रोक लगाइ दिहिन रहा अउर निचली अदालत मां इ विवाद से जुड़ा सब कार्रवाई पर रोक लगाइ दिहिन रहा।
हिंदू पक्ष के वकील श्रीगोपाल शर्मा बताइन कि मामला मंगल के चंदौसी अदालत मां सुनवाई के खातिर सूचीबद्घ रहा, मुला कानों कार्रवाई ना भवा, काहेकि शीर्ष अदालत कै आदेश कै पाछू मामला पर रोक बरकरार बा।
अधिवक्ता बताइन कि इ मामला संभल स्थित चंदौसी के दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) आदित्य सिंह के समउर सुनवाई के खातिर सूचीबद्घ रहा, मुला अदालत इकरा 16 अक्टूबर के खातिर टरि दिहिन अहै। ऊ बताइन कि शीर्ष अदालत से अगला आदेश मिलै के बादहीं इ पर आगू सुनवाई होई।
इ कानूनी विवाद 19 नवंबर 2024 के ओहि बखत सामने आवा रहा, जब अधिवक्ता हरि शंकर जैन अउर विष्णु शंकर जैन समेत आठ जाने संभल जिला अदालत मां एक मुकदमा दायर करि कै दावा किन कि मस्जिद कै निर्माण एक मंदिर के ऊपर कीन गवा रहा।
इकरे बाद 19 नवंबर केहीं शाही जामा मस्जिद कै सर्वे कराइ गवा रहा। ओकरे बाद, 24 नवंबर के एक बार फेर एक टीम सर्वे करै पहुँची, मुला हुअहि हिंसा भड़क गवा। संभल की ओहि हिंसा मां चार जाने की मौत भवा रहा अउर 29 पुलिसकर्मी घायल भवा रहे।
इ मामला मां समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जियाउर्रहमान बर्क, जामा मस्जिद के सदर जफर अली समेत कई नामजद अउर 2750 अज्ञात लोगन के खिलाफ मुकदमा दर्ज भवा।
मुस्लिम पक्ष निचली अदालत के सर्वे आदेश के इ कहत इलाहाबाद उच्च न्यायालय मां चुनौती दिहिन कि संबंधित याचिका सुनवाई योग्य नाइ अहै, मुला उच्च न्यायालय 19 मई 2025 के अदालत की निगरानी मां सर्वेक्षण की अनुमति देनिहार आदेश के बरकरार रखिन।
बाद मां उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ मामला शीर्ष अदालत पहूँचा रहा, जौन रोक लगाइ दिहिन रहा। उच्चतम न्यायालय दोनों पक्ष के दलील सुनै के बाद 25 सितंबर 2026 के आपन आदेश सुरक्षित रखि लीन्हिस।




