धर्म/अध्यात्म

रामचरित मानस मा लुका अहै बजरंगबली का रिझावै क ई खास तरीका

प्रभु श्रीराम के परम भक्त अउर भक्ति क मूरत माने जाय वाले भगवान हनुमान जी का कलियुग क देवता भी कहा जाथै। भारत के साथै-साथै पूरी दुनिया मा करोड़न लोग हनुमान जी क पूजा अउर सेवा करथें। अपनी अचरज भरी शक्तिन अउर भगवान राम के प्रति अपनी निस्वार्थ भक्ति क कारन उहैं सबसे ढेर पूजे जाय वाले देवता माना जाथै। हनुमान जी का खुश करै क कइयौ तरीका अहैं। कोऊ राम नाम जपि के उनका रिझावै क कोसिस करथै, तौ कोऊ हनुमान चालीसा क रोज पाठ करथै, पै कइयौ बार एतना कुछु करै क बादौ मन हनुमान जी मा नाहीं लागत है।

हनुमान जी बदे समय निकारब काहे जरूरी?

रामचरित मानस मा बतावा गवा अहै कि, भगवान हनुमान जी के नियरे जाय बदे सबसे पहिले आप जौन उनका दइ सकत अहैं, ओही से सुरु करा। सबसे पहिले शांत मन से कुछ मिनट या घंटा उनके बदे निकारा। कउनो भारी-भरकम चालीसा या भजन के जगह अपनी सुरुआत एक सहज पराथना से करा। हनुमान चालीसा पढ़ा तौ एक-एक श्लोक का नीक से समुझि के पढ़ा अउर ओकरे बादै अगले श्लोक पर बढ़ा। ई बीच जब-जब मन भटकै तौ ओका धीरे-धीरे थिराय के पाठ पर लइ आवा।

हनुमान चालीसा के साथै ई आदतन का शामिल करा

भगवान हनुमान के नियरे जाय बदे नियमित रूप से उनके दरसन करा। हर दिन उनके बदे थोरका समय निकारा। रामचरित मानस मा कहल गवा अहै कि, प्रभु क नाम, उनका सुमिरन अउर उनके दरसन करै से जिनगी मा उनकी मौजूदगी क अहसास होथै। जउन कोऊ एक दिन चूक जाय, तौ फिर से ओका सुरु करै। अगर आप भगवान शिव, किसन जी, देवी या कउनो दूसर देवी-देवता क पूजा करथें, तौ ओका बराबर जारी रखा। भगवान हनुमान से पराथना करा कि, जइसन हनुमान जी के हिरदै मा प्रभु श्रीराम की सेवा अउर भक्ति क भावना बनी रहथै, वैसने आपकौ हिरदै श्रीराम के प्रति ओही निस्छल अउर अटूट पिरेम से भरि जाय।

रामचरितमानस मा हनुमान जी का खुश करै क सबसे बढ़िया उपाय रोज हनुमान चालीसा क पाठ करब बतावा गवा अहै। हनुमान चालीसा श्लोकन क एक भजन अहै जौन उनकी बढ़ाई, बहादुरी, ताकत अउर भक्ति क गुणगान करथै। माना जाथै कि जौन भी मनई रोज एका सच्चे मन से पाठ करथै, ओका जिनगी मा सांति, नीक भाग अउर बरक्कत मिलथै।

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