बांग्लादेश से हेरान करै वाले आंकड़ा सोझुआइन हैं। स्थानीय मीडिया एक मानवाधिकार संगठन के हवाले से बताएिस है कि ई साल जनवरी से अगस्त के बीच मा बांग्लादेश मा हिंसा के घटना मा 155 लरिकन के जान चली गई। बांग्लादेश मा लरिकन के खिलाफ बढ़त हिंसा के बीच, पूरै देस मा अपहरण के बाद हत्या, रेप, मार-पीट अउर हिंसा के दूसर घटना मा ई लरिकन के जान गई है।
ढाका के मानवाधिकार संगठन ‘ऐन ओ सालिश केंद्र’ (ASK) बताएिस है कि ई साल के पहिले आठ महीना मा लापता भए 36 लरिकन के लास बरामद कीन गई, जबकि 68 लरिकन के मौत मार-पीट (शारीरिक शोषण) के कारन अउर 49 लरिकन के मौत घर-परिवार के हिंसा मा भई है। मानवाधिकार संगठन अइसे 26 मामला के बारे मा भी जानकारी दीस है, जेहमा पहिले लरिकन के साथे रेप कीन गवा अउर फिर उनका मार डारा गवा। ई मामला मा दुई लड़का भी सामिल रहेन।
मानवाधिकार संगठन कहिस है कि रेप के कोसिस के बाद चार लरिकन के जान चली गई, जबकि तीन जने क गोली मार के हत्या कर दीन गई। मार-पीट के कारन दुई घरेलू कामगारन के मौत होई गई, दुई लरिकन के हत्या पीछा करै वालेन (स्टॉकर) कीन अउर एक लरिका के हत्या अपहरण के बाद कर दीन गई। बांग्लादेशी अखबार ‘ढाका ट्रिब्यून’ के रिपोर्ट के मुताबिक, ई बीच ASK खुदकुसी, संदिघ्द मौत अउर लरिकन के लास मिलै के 99 मामला दरज कीस है। कइयउ मामला मा आरोपी लरिकन के जान-पहिचान वाले ही बताए जात हैं। मानवाधिकार संगठन के रिपोर्ट से पता चलत है कि लापता लरिकन के लास मिलब बांग्लादेश मा नाबालिगन के खिलाफ हिंसा के एक बड़का हिस्सा आय, जेहमा हाल के मामला मा रेप अउर हत्या, जानलेवा मार-पीट अउर परिवार के लोगन के साथे लरिकन के हत्या सामिल है।
हजारन के संख्या मा लरिका लापता
सितंबर महीना के सुरु मा ही बांग्लादेशी पुलिस मुख्यालय एक प्रेस रिलीज मा बताएिस कि साल के पहिले सात महीना मा 15,717 लरिका लापता भए रहेन। हालांकि 13,679 लरिकन के पता लगाय लीन गवा, लेकिन 2,038 लरिका अभी भी लापता हैं, जे कुल संख्या के लगभग 13 परसेंट है।




