तेलंगाना कै मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी वारंगल मां बनने वाले ममनूर एयरपोर्ट कै नाम रखे खातिर जनता से सुझाव मांगे अहैं। इ फ़ैसले से काकतीय इतिहास अउर प्रतीकों का लेके राज्य सरकार कै रुख पर बहस फेरू से शुरू होइ गवा बा। सुझावों मां रानी रुद्रमा देवी, काकतीय अउर प्रतापरुद्र जैसे काकतीय-युग कै कई नाम सामने आए अहैं, जिन्हैं मां रानी रुद्रमा देवी कै नाम प्रमुखता से चर्चा मां अहै।
इ बहस इहिनिंगे चर्चा मां अहै काहेंकि दुइ साल पहिले रेड्डी तेलंगाना कै प्रस्तावित नया आधिकारिक प्रतीक मां ‘काकतीय कला तोरणम’ का शामिल करै कै विरोध किहिन रहा। उ इका “अराजकता कै प्रतीक” बताइन रहा अउर कहिन रहा कि राज्य कै प्रतीकों मां तेलंगाना आंदोलन अउर उकर संघर्षों कै झलक होय चाही। इहिनिंगे, एयरपोर्ट कै नाम बदले कै प्रक्रिया काकतीय विरासत का फेरू से राजनीतिक चर्चा कै विषय बनाइ दिहिन बा। इ बात पर सवाल उठाया जात अहै कि सरकार इ राजवंश कै ऐतिहासिक विरासत अउर तेलंगाना कै सार्वजनिक पहचान मां उकर स्थान का किस नजरिए से देखत अहै।
काकतीय विरासत अउर एयरपोर्ट कै नामकरण
नाम रखे कै इ प्रक्रिया राजनीतिक महत्व हासिल कर लिहिन बा, काहेंकि काकतीय प्रतीक-चिह्न का लेके रेड्डी कै पहिले कै रुख कुछ अउर रहा। दुइ साल पहिले तेलंगाना कै आधिकारिक प्रतीक-चिह्न का फेरू से डिजाइन करै पर चर्चा कै दौरान, मुख्यमंत्री कहिन रहा कि काकतीय कला तोरणम का इमां शामिल नाइ कीन जाइ। उ तोरणम का “अराजकता कै प्रतीक” बताइन रहा अउर तर्क दिहिन रहा कि राज्य कै आधिकारिक पहचान मां तेलंगाना आंदोलन, उकर संघर्षों अउर बलिदानों का दिखाया जाना चाही। ममनूर एयरपोर्ट कै नाम रखे पर होइ रही बहस उ पुराने रुख का फेरू से चर्चा मां दूनि आवा बा, काहेंकि सरकार वारंगल मां एक बड़े सार्वजनिक संस्थान कै नाम उ ऐतिहासिक विरासत से जोड़े पर विचार करत अहै, जवन प्रतीक-चिह्न विवाद मां अहम भूमिका निभाइन रहा।
कई नामों पर चर्चा
प्रस्तावित एयरपोर्ट खातिर कई नाम सुझाए गए अहैं। वारंगल कै रहने वाले फिल्ममेकर संदीप रेड्डी वांगा ‘रुद्रमा इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ या ‘काकतीय इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ मां से कउनों एक नाम कै सार्वजनिक रूप से समर्थन किहिन अहै। चर्चा मां शामिल अन्य नामों मां ‘सम्क्का-सरलम्मा’ अउर पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव कै नाम भी अहैं। काकतीय-युग से जुड़े सुझावों मां, रानी रुद्रमा देवी कै नाम मौजूदा चर्चा मां प्रमुख विकल्पों मां से एक कै तौर पर उभरा बा, हालाँकि अभी औपचारिक मंजूरी कै प्रक्रिया पूरी होनी बाकी अहै।
ऐतिहासिक रूप से ‘ओरुगल्लू’ कै नाम से जाना जाए वाला वारंगल, काकतीय राजवंश कै राजधानी रहा अउर आज भी इकर शासकों से गहराई से जुड़ा भवा बा। शहर कै मध्ययुगीन इतिहास से जुड़े प्रमुख नामों मां रुद्र देव, गणपतिदेव, रुद्रमा देवी अउर प्रतापरुद्र शामिल अहैं।




