राष्ट्रीय

डीए मामला मां High Court पंजाब Chief Secretary कै भेजिस अवमानना नोटिस

चंडीगढ़, छह अक्टूबर — पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय मंगरवार कै दिन पंजाबकै मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा कै नोटिस जारी करिक पूछिस कि कर्मचारीन अउर पेंशनभोगीमन कै लंबित महंगाई भत्ता (डीए) से जुड़ेड एक मामला मां प्रथम दृष्टया झूठा बयान देवे बरे काहें न उनकै खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​कै कार्रवाई शुरू की जाए। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा अउर न्यायमूर्ति रोहित कपूर कै पीठ मुख्य सचिव कै सुनवाई कै अगली तारीख (शुकवार) कै व्यक्तिगत रूप से हाजिर होवै कै निर्देश दिहिन।

यह कदम उच्चतम न्यायालय कै रजिस्ट्री से पंजाब सरकारकै अपील कै स्थिति कै संबंध मां उच्च न्यायालय कै रजिस्ट्री कै मिला एक रिपोर्ट कै बाद उठवा गवा। यह रिपोर्ट से पता चला कि शीर्ष अदालत मां पंजाब सरकारकै अपील कै गलती कै अभी तक ठीक नाई कीन गवा अहै, जे पंजाबकै मुख्य सचिव कै उस दावा कै एकदम उलट अहै, जवने मां ऊ कहिन रहा कि अपील कै गलती कै ठीक कर लीन गवा अहै।

याचिकाकर्तामन कै वकील सनी सिंगला कहिन कि उच्च न्यायालय पंजाबकै मुख्य सचिव कै नोटिस जारी करिक पूछिस अहै कि ‘‘झूठा बयान’’ देवे बरे काहें न उनकै खिलाफ आपराधिक अवमानना ​​कै कार्रवाई शुरू की जाए। सिंगला आगे कहिन कि अदालत उस रिपोर्ट कै संज्ञान लिहिस, जवने मां बतावा गवा रहा कि पंजाब सरकारकै अपील कै गलती कै अभी तक दूर नाई कीन गवा अहै।

अदालत सोमवर कै अपन रजिस्ट्री कै उच्चतम न्यायालय से राज्य सरकारकै अपील कै स्थिति कै संबंध मां तुरंत रिपोर्ट मंगावै कै निर्देश दिहिन रहा। अदालत उन याचिकामन कै सुनवाई करत रहा, जउन उनकै तीन अगस्त कै उस आदेश कै पालन न करै से जुड़ेड रहा, जवने मां राज्यकै कर्मचारीन अउर पेंशनभोगीमन कै उह्वे दर पर महंगाई भत्ता अउर महंगाई राहत बकाया जारी करै कै निर्देश दीन्हा गवा रहा, जउन दर केंद्र सरकारकै तरीका पर राज्य मां काम करै वाले अखिल भारतीय सेवामन कै (आईएएस/आईIPS/आईएफएस) अधिकारीमन कै दी जात अहै।

पंजाब सरकार उच्च न्यायालय कै आदेशकै खिलाफ एक सितंबर कै शीर्ष अदालत मां एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल कीन रहा, जवने मां दलील दीन्हा गवा रहा कि इतने कम समय मां लगभग 14,191 करोड़ रुपया कै कुल बकाया भुगतान करै कै निर्देश संवैधानिक रूप से असंभव रहा।

पीठ सोमवर कै अदालतकै साथ आँख-मिचौली खेलै बरे पंजाब सरकारकै कड़ा फटकार लगइस रहा। अदालत सरकारकै उस दावा पर सवाल उठाइस रहा, जवने मां कहा गवा रहा कि शीर्ष अदालतकै सामने उनकै अपील कै गलती कै दूर कर लीन गवा अहै। अदालत सोमवर कै टिप्पणी कीन रहा, ‘‘हम यह समझै मां एकदम असमर्थ अही कि पंजाब सरकार अदालतकै साथ आँख-मिचौली खेलकर असल मां का हासिल करै चाहत अहै। अगर शीर्ष अदालतकै सामने एक सितंबर कै ही अपील दाखिल कर दी गई रहा, तो यह पर अब तक सुनवाई करवा ली जाइत। अइसे लागत अहै कि यह कोशिश खाली शीर्ष अदालतकै सामने कानूनी रास्ता खोजै कै बहाने समय काटै बरे कीन जात अहै।’’

राज्य सरकारकै वकील सोमवर कै जोर देकर कहिन रहा कि गलती कै दूर कर लीन गवा अहै अउर शीर्ष अदालतकै सामने अपील एकदम सही अहै। हालाँकि, याचिकाकर्तामन वकील कै इस बयान कै जोरो-सोरो से खंडन कीनिन। याचिकाकर्तामन तीन अगस्तकै आदेशकै पालन न करै बरे राज्य सरकारकै खिलाफ उच्च न्यायालय गए रहिन।

उच्च न्यायालय, हालाँकि 10 सितंबरकै भई पिछ्छू सुनवाई कै दौरान यह बात कै संज्ञान लिहिस रहा कि राज्य सरकार शीर्ष अदालत मां याचिका दाखिल कर दी अहै, पर उमां मौजूद गलती कै दूर नाई कीन गवा रहा।

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