
आजकल दिल के दौरा (हार्ट अटैक) अउर दिल की बीमारिन के मामला बहुतै तेजी से बढ़त हँय। एका सबसे बड़ा कारन ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ के लेवल मा बढ़ती अहै। सबसे डेरावनी बात तौ ई अहै कि जब बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ै लागत है, तौ सुरु मा कउनो लच्छन नाहीं देखात। यहै बरे बिना कउनो इसारा के ई चुपके से हमरे सरीर मा बढ़त रहत है अउर हार्ट अटैक या दिल की बीमारिन के वजह बनत है। यहै तइँ समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल के जाँच कराउब बहुत जरूरी अहै अउर एका लेके तीन खास सवाल आपन डाक्टर से जरूर पूछय चाही। आउ जानि जाइ कि ई सवाल का हँय।
का खाली बुढ़वन का होत है बैड कोलेस्ट्रॉल?
आमतौर पर मनई सोचत हँय कि खाली उमर बढ़ै पर या फिर कम काम-काज करइ से दिल की बीमारी होत है, मुला सच तौ ई अहै कि बैड कोलेस्ट्रॉल के ऊँच लेवल खाली बुढ़वन या खराव रहन-सहन वालेन तक सीमित नाहीं अहै। अगर आप जवान हय, रोज कसरत करत हय अउर नीक खान-पान है, तबहूँ जेनेटिक्स या पुरखन की बीमारी के वजह से आपन ब्लड कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकत है। मतलब ई कि आपक तंदुरुस्त दिखब एका गारंटी नाहीं अहै कि कोलेस्ट्रॉल भी काबू मा अहै। यहै कारन है कि 18 साल की उमर से ही लिपिड प्रोफाइल के जाँच सुरु कइ देवे चाही। सुरु मा पता चलि जाइ तौ सही टेम पर इलाज होइ सकत है अउर आगे चलि के हार्ट अटैक के खतरा कम कीन जाइ सकत है।
डाक्टर से का पूँछय?
1. हमार बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल केतना अहै?
बैड कोलेस्ट्रॉल हमरे नसन (आर्टरीज) मा गंदगी (प्लाग) जमा करइ बरे जिम्मेदार होत है। काहे से एका कउनो लच्छन नाहीं देखात, यहै बरे लिपिड टेस्ट से सही मात्रा जानब बहुत जरूरी अहै।
2. हमरी सेहत के हिसाब से हमार पर्सनल टारगेट का होइ के चाही?
कोलेस्ट्रॉल के सुरक्षित लेवल हर मनई बरे एकै नाहि होत। कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया के हिसाब से, आपक टारगेट आपक दिल के सेहत पर निर्भर करत है।
- कम खतरा (लो रिस्क): 116 mg/dL से कम
- बीच वाला खतरा (मॉडिरेट रिस्क): 100 mg/dL से कम
- ज्यादा खतरा (जैसे सुगर, हाई बीपी या किडनी की बीमारी): 70 mg/dL से कम
- बहुतै ज्यादा खतरा वालेन बरे: 55 mg/dL से कम कोलेस्ट्रॉल रखइ के लच्छ होइ के चाही।
3. का हम अपने टारगेट लेवल तक पहुँचि गय अही? अगर नाहीं, तौ हमार लगे का रस्ता अहै?
कोलेस्ट्रॉल काबू मा रखइ बरे खाली दवाई खइले या नीक खइले से काम नाहीं चली। अगर रहन-सहन बदलै अउर दवाई के बादौ कोलेस्ट्रॉल कम नाहीं होत है, तौ डाक्टर इलाज के तरीका बदलि सकत हँय। जे मनई ज्यादा रिस्क मा हँय, उनके बरे डाक्टर एडवांस्ड थेरेपी के मदद भी लइ सकत हँय।




