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उत्तर भारत कै जेलनि मां तैयार होत बाड़ैं खालिस्तानी गुर्गा! खुफिया एजेंसी कै बड़का खुलासवा से मच गवा हड़कंप, पन्नू नेटवर्क पर प्रहार सुरु

उत्तर भारत कै जेलनि अब सिर्फ अपराधीन का बंद रखे कै जगह नाहीं रहि गे अहइँ, बल्कि आतंकी नेटवर्क खातिर नवा गुर्गा तैयार करै कै जरिया भी बनत जात बा। हम तौका बताइ दीं कि खुफिया एजेंसी अइसन कोसिसन का लइके गंभीर चेतावनी जारी कीन्ह बा, जेहमां खालिस्तान समर्थक संगठन, खासकर ‘सिख्स फॉर जस्टिस’ जेलनि के भीतर बंद कैदीन का आपन नेटवर्क मां शामिल करै कै कोसिस कर रहि बा। हालहि मां हिरासत मां लिवा गे एक आरोपी से पूछताछ मां सामने आई जानकारी से इ पूरा नेटवर्क कै जर जेलनि तक पहुंचै कै संकेत दीन्ह बा। जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपी प्रीतपाल सिंह खुलासा कीन्ह कि जेल मां सजा काटै कै दौरान ही ओका खालिस्तान समर्थक गतिविधि से जुड़ल लोगन आपन प्रभाव मां लिवा रहा। इहे दौरान ओका विदेश मां बइठल खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू से संपर्क करै खातिर फोन नंबर भी उपलब्ध कराई गवा रहा। जेल से बाहर आवै के बाद ओहू सीधे पन्नू से संपर्क बनाइ लिहिस अउर कथित तौर पर आगू कै काम खातिर रुपिया भी पावा।

जांच मां सामने आवा बा कि प्रीतपाल सिंह पहिले भी खालिस्तान समर्थक गतिविधि मां शामिल रहा। बछर २०२३ मां ओका अइसे ही एक घटना के सिलसिले मां गिरफ्तार कीन्ह गवा रहा। हालहि मां एजेंसी ओकर नेटवर्क कै पर्दाफाश करत ओका गिरफ्तार करि लिहिन। आरोप बा कि ओ आपन साथी के साथे दिल्ली अउर पंजाब मां ब्रिक्स विरोधी अउर खालिस्तान समर्थक नारा दीवारन पर लिखिस, ओकर वीडियो बनबिस अउर ओका पन्नू तक पहुँचाइस।

जांच कै सबसे गंभीर पहलू जेल के भीतर तैयार की जात नेटवर्क से जुड़ल बा। एजेंसी कै मानब बा कि जेलनि मां मौजूद अइसन कैदीन का निशाना बनावा जात बा जउन आर्थिक रूप से कमजोर होइहें, कानूनी सहायता से वंचित होइहें या पहिली बेर छोट-मोट अपराध मां जेल पहुँचे होइहें। अइसन बंदीरन का रुपिया, सहायता अउर प्रभाव कै लालच दइके धीरे-धीरे कट्टरपंथी गतिविधि मां धकेलै कै कोसिस कीन्ह जात बा।

इ पूरा नेटवर्क मां रुपिया अउर हथियार पहुँचाइबै कै तरीका भी बदलत बा। खुफिया एजेंसी इ पता पाइ बा कि पाकिस्तान कै खुफिया एजेंसी कै समर्थन बाले गुट अब सीधे संपर्क अउर आमने-सामने रुपिया या हथियार पहुँचाइबै कै बजाय गुप्त अस्थानन पर सामान छोड़ै कै पद्धति कै इस्तेमाल करत बा। सुनसान राजमार्ग, सीमावर्ती इलाका अउर ग्रामीण क्षेत्रन मां पहिले से तय अस्थानन पर रुपिया, हथियार या अउर सामग्री छिपाइ जात बा। एकरे बाद स्थानीय सदस्यन का सुरक्षित मैसेजिंग एप के जरिया उ अस्थान कै जानकारी दीन्ह जात बा।

एजेंसी के मुताबिक, सीमा पार से ड्रोन या गुप्त माध्यम के जरिये हथियार अउर नकदी पहुँचाइके ओका अइसन अस्थानन पर छिपाइ जात बा, जहाँ से स्थानीय गुर्गा ओका उठाइ सकैं। इ तरीका कै सबसे बड़का फायदा इ बा कि विदेश मां बइठल संचालक अउर जमीन पर काम करै बाले लोगन के बीच सीधा संपर्क कम होइ जात बा, जेहसे पूरा नेटवर्क कै पहचान करै सुरक्षा एजेंसी खातिर कठिन होइ जात बा।

देखा जाइ तौ जेलनि कै इस्तेमाल करै कै खतरा नवा नाहीं बा। बछर २०१६ मां नाभा जेल से भवा कुख्यात फरारी भी आतंकवादी संगठन अउर जेलनि मां बंद अपराधी गिरोह के बीच संभावित गठजोड़ कै ओर ध्यान खींचे रहा। अब प्रीतपाल सिंह कै मामला एक बेर फेर सुरक्षा एजेंसी का चेताइ दिहिस बा कि जेलनि के भीतर होइ बाले कट्टरपंथी गतिविधि पर निगरानी अउर कड़ी करै पड़ी।

फिलहाल एजेंसी प्रीतपाल सिंह कै डिजिटल संपर्क, रुपिया कै गुप्त लेनदेन अउर जेल के भीतर ओकर संपर्क कै कड़ी जोड़ रहि बा। जांच कै मकसद सिर्फ एक आरोपी तक पहुँचब नाहीं, बल्कि इ पता लगाब बा कि जेलनि से बाहर निकलकन कितलो लोग इ गुप्त नेटवर्क कै हिस्सा बनिन अउर ओकरे पीछे विदेश मां बइठल संचालक कै तंत्र कितनो बड़का बा।

दूसरी ओर, जेलनि मां भर्ती कै इ खतरा के बीच ‘प्रहार’ अभियान कै भूमिका भी बहुत खास होइ जात बा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ‘प्रहार’ का आतंकवाद-रोधी कार्रवाई कै हिस्सा बनाबै अउर आतंकवादी नेटवर्क का ३६० डिग्री से खत्म करै पर जोर दिहिन बा। एकरे तहत सिर्फ आतंकी तक पहुँचब नाहीं, बल्कि ओकर भर्ती, रुपिया, हथियार, संपर्क, डिजिटल नेटवर्क अउर विदेश मां बइठल संचालक तक पूरा कड़ी का निशाना बनाबै कै बात कही गई बा।

अइसन मां जेलनि के भीतर बंद कैदीन कै कट्टरपंथी गतिविधि पर निगरानी, संदेही संपर्क कै पहचान, खुफिया सूचना कै समय पर साझा होब अउर राज्य पुलिस अउर केंद्रीय एजेंसी के बीच तालमेल इ तरह कै भर्ती का सुरुवाती स्तर पर रोकै मां मदद करि सकत बा। ‘प्रहार’ कै जोर आतंकवाद खातिर अनुकूल परिस्थिति का कम करै पर भी बा, एहसे आर्थिक रूप से कमजोर या आसानी से प्रभावित होइ बाले बंदीरन का कट्टरपंथी नेटवर्क कै निशाना से बचाइबै खातिर निगरानी के साथ परामर्श अउर सुधारात्मक कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण होइहिं। देखब बा कि आगू चलकन इ अभियान कितनो सफलता पावत बा।

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