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	<title>जीवनशैली &#8211; UPNews Online</title>
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	<title>जीवनशैली &#8211; UPNews Online</title>
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		<title>मजबूत मसल्स कै बरे सिर्फ प्रोटीनहीं नाहीं, आंतन कय सेहतउ बा जरूरी?</title>
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		<pubDate>Sat, 17 Oct 2026 00:34:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[आमतौर पर आंतन कय सेहत कै बरे फाइबर अउर प्रोबायोटिक्स तै भरपूर भोजन, जबकि मांसपेशियन कय मजबूत बनावै कै बरे प्रोटीन अउर व्यायाम जरूरी माना जात्रा। लेकिन नवा शोध तै पता चलाता कि आंतन अउर मांसपेशियन कै बीच गहिर संबंध होई सकत बा। वैज्ञानिक इहे कय गट-मसल एक्सिस यानी आंत-मांसपेशी संबंध कहत हैं। किंग्स कालेज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="803" height="445" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-46.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-46.png 803w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-46-300x166.png 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-46-768x426.png 768w" sizes="(max-width: 803px) 100vw, 803px"></p>
<p>आमतौर पर आंतन कय सेहत कै बरे फाइबर अउर प्रोबायोटिक्स तै भरपूर भोजन, जबकि मांसपेशियन कय मजबूत बनावै कै बरे प्रोटीन अउर व्यायाम जरूरी माना जात्रा। लेकिन नवा शोध तै पता चलाता कि आंतन अउर मांसपेशियन कै बीच गहिर संबंध होई सकत बा। वैज्ञानिक इहे कय गट-मसल एक्सिस यानी आंत-मांसपेशी संबंध कहत हैं। किंग्स कालेज लंदन कय शोधकर्ता डोमिनिक फारसी कै अनुसार, दही, केफिर अउर काटेज चीज नियर किण्वित (फर्मेंटेड) खाद्य पदार्थ इ संबंध कै समझै मां अहम भूमिका निभाइ सकत हैं।</p>
<p><strong>आंतन कय बैक्टीरिया कै मांसपेशियन पर असर</strong></p>
<p>आंतन मां कई तरह कय सूक्ष्मजीव मौजूद होत हैं, जवनकय सामूहिक रूप तै गट माइक्रोबायोम कहा जात्रा। इ शरीर मां पोषक तत्वन कय इस्तेमाल, ब्लड शुगर कय नियंत्रण अउर सूजन कय नियंत्रित करै नियर प्रक्रिया कय प्रभावित करत हैं। शोध कय समीक्षा मां पावा गवा कि आंतन कय स्वस्थ परत हानिकारक पदार्थन कय खून मां जावै तै रोकै मां मदद करत बा। आंतन कय सूक्ष्मजीवन् या इ परत मां बदलाव होवै तै शरीर मां सूजन बढ़ि सकत बा, जवनका असर मांसपेशियन समेत पूरा शरीर कय सेहत पर पड़ी सकत बा।</p>
<p><strong>प्रोटीन कय इस्तेमाल मांउ मदद</strong></p>
<p>आंतन मां होवै वाली गतिविधि शरीर कय हार्मोन अउर मेटाबालिज्म कयउ प्रभावित करत हैं। गट माइक्रोबायोम भोजन मां मौजूद पोषक तत्वन कय टूटै अउर उनकय अवशोषण कय प्रक्रिया कय बदलि सकत बा। इ तै अमीनो एसिड कय उपलब्धता प्रभावित होई सकत बा। अमीनो एसिड प्रोटीन कय निर्माण खंड हैं, जवन मांसपेशियन कय वृद्धि अउर उनकय सही तरीका तै काम करै कै बरे जरूरी होत हैं।</p>
<p>इ संबंध एकतरफा नाहीं बा। मांसपेशियांउ अइसन संकेत दै वाला अणु अउर मेटाबॉलिज्म कय दौरान बनै वाला पदार्थ पैदा करत हैं, जवन आंतन समेत शरीर कय दूसर ऊतकुन कय प्रभावित कै सकत हैं।</p>
<p><strong>फर्मेंटेड फूड्स काहे बा खास?</strong></p>
<p>किण्वन यानी फर्मेंटेशन कय प्रक्रिया मां सूक्ष्मजीव भोजन कय प्रोटीन अउर दूसर घटकन कय तोड़त हैं। इ तै प्रोटीन कय पचावब आसान होई सकत बा अउर अमीनो एसिड शरीर कय अउर आसानी तै मिल सकत बा। इ प्रक्रिया मां कुछ अइसन जैव सक्रिय पदार्थउ बनत हैं, जइनमां एंटीआक्सीडेंट अउर सूजन कम करै वाले गुण होई सकत हैं। भोजन कय प्रकार अउर ओका बनावै कय तरीका कय आधार पर इइनमां जीवित सूक्ष्मजीव या उनकय घटकउ मौजूद होई सकत हैं। इ आंतन कय माइक्रोबायोम अउर प्रतिरक्षा प्रणाली कय साथे मिलकै काम करै सकत हैं।</p>
<p><strong>मांसपेशियन पर फायदा कै पर्याप्त प्रमाण नाहीं</strong></p>
<p>शोधकर्तvn कय समीक्षा मां पावा गवा कि कुछ प्रोटीनयुक्त किण्वित खाद्य पदार्थ आंतन कय सेहत, मेटाबॉलिज्म अउर सूजन तै जुड़ल प्रक्रिया कय प्रभावित कै सकत हैं। हालांकि, इ बदलाव तै मांसपेशियन कय आकार या ताकत बढ़ै कै पर्याप्त प्रमाण अभी उपलब्ध नाहीं बा। खासकर मांसपेशियन मां नवा प्रोटीन बनै वाली प्रक्रिया पर इ खाद्य पदार्थन कय प्रभाव कय लेकर बहुत कम अध्ययन भवा बा। तइसे इ कहब जल्दबाजी होई कि इ खाद्य पदार्थ आंत-मांसपेशी संबंध कै जरिये मांसपेशियन कय वृद्धि मां विशेष लाभ देत हैं।</p>
<p><strong>आगे अउर शोध कय जरूरत</strong></p>
<p>शोधकर्तन कय कहब बा कि इ जानै कै बरे सीधा अध्ययन करै पड़ी कि किण्वित भोजन खाइ तै आंतन अउर मांसपेशियन मां का बदलाव होत बा। इ तै इउ पता चली कि किण्वित खाद्य पदार्थ सामान्य प्रोटीनयुक्त भोजन कय तुलना मां कोई अतिरिक्त लाभ देत हैं या नाहीं।</p>
</div>
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		<item>
		<title>मेनोपॉज मां शरीर कै बदलावों कै ना समझीं मामूली!</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%9c-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%88-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b5/</link>
		
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		<pubDate>Thu, 15 Oct 2026 08:00:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[आम तौर पर इ माना जात अहै कि मेनोपॉज एक बहुत ही धीमी प्रक्रिया अहै, जेहमां मेहरारुन कै शरीर कै पूरी तहर बदले मां कई साल लाग जात अहै। लेकिन हाल ही मां भवा एक बड़े शोध इ पुरानी धारणा कै गलत साबित कर दिहिन। नई जानकारी कै मुताबिक, मेनोपॉज कै दौरान मेहरारुन कै शरीर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="761" height="432" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-44.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-44.png 761w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-44-300x170.png 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-44-390x220.png 390w" sizes="auto, (max-width: 761px) 100vw, 761px"></p>
<p>आम तौर पर इ माना जात अहै कि मेनोपॉज एक बहुत ही धीमी प्रक्रिया अहै, जेहमां मेहरारुन कै शरीर कै पूरी तहर बदले मां कई साल लाग जात अहै। लेकिन हाल ही मां भवा एक बड़े शोध इ पुरानी धारणा कै गलत साबित कर दिहिन। नई जानकारी कै मुताबिक, मेनोपॉज कै दौरान मेहरारुन कै शरीर मां धीरे-धीरे नाहीं, बल्कि अचानक आउर बहुत बड़े स्तर पय बदलाव आवत अहैं।</p>
<p>एक अचानक आवे वाला शारीरिक मोड़ जब मेहरारुन कै ओनकै जीवन कै आखिरी पीरियड्स आवत अहैं, तौ ओनकर शरीर कवनो धीमी प्रक्रिया से नाहीं गुजरत अहै। इकरे बजाय, इ एक फिजियोलॉजिकल क्लिफ यानी शारीरिक बदलाव कै एक बहुत बड़े आउर अचानक आवे वाले मोड़ कै सामना करत अहै। इन अचानक होए वाले बदलावों से ठीक पहिले सेक्स हार्मोन कै स्तर मां भी बहुत तेजी से उतार-चढ़ाव होत अहै।</p>
<p><strong>10 लाख मेहरारुन कै डेटा पय भवा बड़ा रिसर्च</strong><br />इ खुलासा एक बेहद विस्तृत अध्ययन कै बाद भवा अहै। वाइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस कै शोधकर्ताओं अमेरिका आउर इजरायल कै 10 लाख से ज्यादा मेहरारुन कै आंकड़ों कै गहराई से अध्ययन करिन। ओमन इन मेहरारुन कै 30 करोड़ से अधिक लैबोरेटरी टेस्ट कै नतीजों कै विश्लेषण करिन। नेचर मेडिसिन जर्नल मां प्रकाशित इस शोध कै नतीजों मां सेहत आउर शरीर कै कामकाज से जुड़े दर्जनों पैमानों मां बड़े आउर अचानक बदलाव देखे गए।</p>
<p><strong>शरीर कै लगभग हर सिस्टम पय असर</strong><br />इ रिसर्च कै दौरान जांचे गए 90 अलग-अलग तरह कै लैबोरेटरी टेस्ट मां से 52 मां अचानक आए इ बदलाव साफ तौर पय नजर आए। इ बदलाव सिर्फ प्रजनन क्षमता कै खतम होए या सेक्स हार्मोन तक सीमित नाहीं थे, बल्कि इकरे कहीं ज्यादा थे। एकर सीधा असर शरीर कै लगभग हर प्रमुख सिस्टम पय दिखा। इन्हैं हड्डियों की सेहत, लिवर आउर किडनी कै काम करे कै तरीका आउर कोलेस्ट्रॉल कै स्तर मुख्य रूप से शामिल था।</p>
<p><strong>हार्मोन थेरेपी से दिखा कम बदलाव</strong><br />इ शोध मां एक आउर अहम बात सामने आई अहै। डेटा कै मुताबिक, जिन मेहरारुन कै मेनोपॉज कै दौरान हार्मोन थेरेपी दी जा रही थी, ओनकय शरीर मां इ अचानक होए वाले बदलाव काफी कम देखे गए।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बुढ़ापे की बाट जोहत नाइ अल्जाइमर! 5-10 साल पहिले ही देखाइ लागै लागत अहैं इ लक्षण</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%ac%e0%a5%81%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%aa%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9f-%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%a4-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%87-%e0%a4%85%e0%a4%b2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 14 Oct 2026 06:00:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[अगर तोहरे का लागत अहै कि अल्जाइमर खाली बुढ़ापे की बीमारी अहै, तौ एक नया रिसर्च तोहरे का चकित कइ सकत अहै। हाल ही मां भवा एक अध्ययन मां इ बात सामने आवा अहै कि 65 साल से कम उमिर मां होनिहार अल्जाइमर, जियादा उमिर मां होनिहार अल्जाइमर से बहुत अलग होत अहै। रिसर्च बतावत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="1024" height="579" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-20.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-20.jpg 1024w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-20-300x170.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-20-768x434.jpg 768w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-20-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px"></p>
<p>अगर तोहरे का लागत अहै कि अल्जाइमर खाली बुढ़ापे की बीमारी अहै, तौ एक नया रिसर्च तोहरे का चकित कइ सकत अहै। हाल ही मां भवा एक अध्ययन मां इ बात सामने आवा अहै कि 65 साल से कम उमिर मां होनिहार अल्जाइमर, जियादा उमिर मां होनिहार अल्जाइमर से बहुत अलग होत अहै। रिसर्च बतावत अहै कि कम उमिर मां इ बीमारी के शिकार होनिहार मनईयन के लक्षण अउर उनके स्वास्थ्य समस्या, उमिरदराज मरीजिन से एकदम जुदा होत अहै।</p>
<p><strong>बीमारी का पता चले से 5 साल पहिले की समस्या</strong></p>
<p>अध्ययन मां पावा गवा कि कम उमिर मां अल्जाइमर का शिकार होनिहार मनईयन मां, बीमारी का ठीक-ठीक पता चले से 5 साल पहिले ही कई तरह की स्वास्थ्य दिक्कत शुरू होई जात अहैं। रिसर्चर्स के मुताफिक, इ उमिर वर्ग के मनईयन मां डिप्रेशन, लगातार सिरदर्द, चक्कर आवा अउर मिर्गी जैसी समस्या होनिहार खतरा जियादा रहत अहै। इहाँ तक कि, मस्तिष्क की चोट, दिमाग की खून की नियन से जुड़ी बीमारी, थायरॉइड अउर बहुत जियादा दारू पिए से होनिहार समस्या भी इनमें अधिक देखि जात अहै।</p>
<p><strong>6 से 10 साल पहिले मिलै लागत अहैं इ खास संकेत</strong></p>
<p>‘अल्जाइमर एंड डिमेंशिया: द जर्नल ऑफ द अल्जाइमर एसोसिएशन’ मां छपा इ रिपोर्ट मां एक अउर जरूरी बात सामने आवा अहै। एकरे मुताफिक, कम उमिर के मरीजिन मां बीमारी की पहिचान होए से 6 से 10 साल पहिले ही कुछ खास लक्षण नजर आवै लागत अहैं। इनमें कानन मां लगातार घंटी बजना अउर सुने की छमता कम होब बहुत आम बात अहै।</p>
<p><strong>दिल की बीमारी का जोखिम नइखे मुख्य कारण</strong></p>
<p>अमूमन बढ़ती उमिर के साथ होनिहार अल्जाइमर मां दिल से जुड़ी जोखिम कारकन का सबसे बड़ी वजह माना जात अहै। पै कम उमिर वाले अल्जाइमर के मामला मां अइसन नाइ होत अहै। शोधकर्तान साफ कीन्ह अहै कि डेर से सुरु होनिहार अल्जाइमर की तुलना मां, कम उमिर के मरीजिन मां हाई ब्लड प्रेशर अउर खून मां चर्बी की अधिकता जैसी दिक्कत सामान्य मनईयन के मुकाबले जियादा आम नाइ रहीं। यानी कम उमिर के अल्जाइमर मां दिल से जुड़ी बीमारी का उतबड़ा रोल नाइ होत जेताबुजुर्गन मां देखि जात अहै।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>थारि मां शामिल करौ बादाम-तिल समेत ये 5 चीज, दूर होई कैल्शियम की कमी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 08 Oct 2026 00:41:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[आजकल कै भागदौड़ भरी, तनावपूर्ण अउर व्यस्त जिनगी मां हम अक्सर अपने खान-पान का नजरअंदाज करइ देत हटे। नतीजा यह होत अहै कि कम उमिर मां ही हड्डियन कमजोर होए लागत अहैं। बढ़ती उमिर अउर खराब लाइफस्टाइल के कारन हड्डियन का कमजोर होना अब एक आम समस्या बन गवा अहै। खास तौर पर मेहरियन मां &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="771" height="391" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-13.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-13.png 771w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-13-300x152.png 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-13-768x389.png 768w" sizes="auto, (max-width: 771px) 100vw, 771px"></p>
<p>आजकल कै भागदौड़ भरी, तनावपूर्ण अउर व्यस्त जिनगी मां हम अक्सर अपने खान-पान का नजरअंदाज करइ देत हटे। नतीजा यह होत अहै कि कम उमिर मां ही हड्डियन कमजोर होए लागत अहैं। बढ़ती उमिर अउर खराब लाइफस्टाइल के कारन हड्डियन का कमजोर होना अब एक आम समस्या बन गवा अहै। खास तौर पर मेहरियन मां कैल्शियम की कमी बहुत जल्दी देखे का मिलत अहै। हालाँकि, घबराने की जरूरत नाहिं अहै। अगर आप अपने डेली डाइट मां कुछ आसान अउर हेल्दी बदलाव कर ल्यू, तौ अपनी हड्डियन का लंबे समय तक फौलाद सा मजबूत रख सकत हटे। आवा जानाव कि कैल्शियम की कमी का पूरा करइ के कुछ बेहद सरल तरीका।</p>
<p><strong>बादाम</strong></p>
<p>बादाम हड्डियन के लिए एक पावरहाउस की तरह काम करत अहै। इमा कैल्शियम, प्रोटीन, फॉस्फोरस, हेल्दी फैट अउर मैग्नीशियम भरपूर मात्रा मां पावा जात अहै। सबसे खास बात यह अहै कि बादाम मां मौजूद मैग्नीशियम शरीर मां कैल्शियम का सही तरीके से सोखने मां बड़ी मदद करत अहै।</p>
<p><strong>खाने का सही तरीका:</strong> रात मां 5-7 बादाम पानी मां भिगो दें अउर सबेरे छीलकर खाएं।</p>
<p><strong>फायदा:</strong> इसे रोज खाने से शरीर का कैल्शियम अउर मैग्नीशियम दोनों मिलत अहै, जो हड्डियन की कमजोरी, जोड़ों के दरद अउर दिन भर की थकान का कम करइ मां सहायक अहै।</p>
<p><strong>डाइट मां शामिल करौ कैल्शियम के ये 5 बेहतरीन स्रोत</strong></p>
<p>बादाम के अलावा भी हमार रसोई मां ऐसे कई विकल्प मौजूद अहैं, जो कैल्शियम की कमी का आसानी से पूरा कर सकत अहैं:</p>
<p><strong>दूध अउर दही का नियमित सेवन:</strong> कैल्शियम की बात होय तौ दूध, दही अउर छाछ का सबसे अच्छा स्रोत माना जात अहै। रोजाना अपनी डाइट मां कम से कम एक गिलास दूध या एक कटोरी दही जरूर शामिल करौ।</p>
<p><strong>तिल का कमाल:</strong> छोटे से दिखने वाले तिल कैल्शियम का खजाना अहैं। आप इन्हें तिल के लड्डू, चटनी के रूप मां या फिर अपने सलाद के ऊपर डालकर भी खा सकत हटे।</p>
<p><strong>हरी पत्तेदार सब्जियां:</strong> पालक, मेथी अउर सरसों का साग जैसी हरी सब्जियन मां भी कैल्शियम की अच्छी खासी मात्रा होत अहै, इन्हें अपनी थारि का हिस्सा जरूर बनाव।</p>
<p><strong>रागी:</strong> अगर आप कैल्शियम का एक सस्ता अउर बेहद असरदार स्रोत ढूंढ रहल हटे, तौ रागी से बेहतर कुछ नाहिं। आप अपनी डाइट मां रागी की रोटी या इसका दलिया शामिल कर सकत हटे।</p>
<p><strong>गुड़ अउर भुना चना:</strong> स्वाद के साथ सेहत का बेहतरीन कॉम्बो। गुड़ अउर भुने चने का एक साथ खाने से शरीर का कैल्शियम के साथ-साथ आयरन भी मिलत अहै, जो बोन हेल्थ के लिए बहुत फायदेमंद अहै।</p>
<p><strong>धूप अउर एक्सरसाइज भी अहैं जरूरी</strong></p>
<p>सिर्फ कैल्शियम से भरपूर चीजें खाना ही काफी नाहिं अहै, शरीर का उसे अवशोषित करइ के लिए विटामिन-डी की भी सख्त जरूरत होत अहै। इसलिए रोजाना कम से कम 15-20 मिनट धूप मां जरूर बैठें। इसके साथ ही, हड्डियन का लंबे समय तक मजबूत बनाए रखइ के लिए अपनी दिनचर्या मां रोजाना हल्की एक्सरसाइज या वॉक जरूर शामिल करौ।</p>
<p><strong>हमेशा याद रखैं ये 3 जरूरी टिप्स</strong></p>
<p><strong>नमक अउर कैफीन कम करौ:</strong> बहुत ज्यादा नमक अउर अधिक चाय या कॉफी का सेवन शरीर मां कैल्शियम की कमी का अउर बढ़ा सकत अहै, इसलिए इनसे बचैं।</p>
<p><strong>30 के बाद बरतैं खास सावधानी:</strong> 30 साल की उमिर पार करइ के बाद अपने कैल्शियम इनटेक पर विशेष ध्यान दें। मेहरियन के शरीर का कैल्शियम की ज्यादा जरूरत होत अहै, इसलिए उन्हें इस पर खास फोकस करैचाहिए।</p>
<p><strong>एक्टिव रहैं:</strong> अपने डेली रूटीन मां हल्की-फुल्की फिजिकल एक्टिविटी का जगह जरूर दें।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>औरतन कै हॉर्मोनल हेल्थ कै खातिर वरदान से कम नइखे सबेरे कै इ आदत</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%94%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%88-%e0%a4%b9%e0%a5%89%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a4%b2-%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a5-%e0%a4%95%e0%a5%88/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 05 Oct 2026 03:41:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[का कबहूं इ सोचिन है कि तुम्हार सबेरे कै सुरुआतइ तुम्हार पूरा दिन कै सेहत अउर मूड तय करैथ? खासकर औरतन कै खातिर, सबेरे कै छोट-छोट आदत हॉर्मोनल बैलेंस बनाय रखै मां बहुत बड़ा रोल निभावैथ। औरतन कै इ मॉर्निंग आदत बचाई हॉर्मोनल इंबैलेंस से। हॉर्मोनल असंतुलन खाली शारीरिक नइखे, बल्कि मानसिक अउर भावनात्मक स्वास्थ्य &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="764" height="438" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-3.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-3.png 764w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/10/news-image-3-300x172.png 300w" sizes="auto, (max-width: 764px) 100vw, 764px"></p>
<p>का कबहूं इ सोचिन है कि तुम्हार सबेरे कै सुरुआतइ तुम्हार पूरा दिन कै सेहत अउर मूड तय करैथ? खासकर औरतन कै खातिर, सबेरे कै छोट-छोट आदत हॉर्मोनल बैलेंस बनाय रखै मां बहुत बड़ा रोल निभावैथ। औरतन कै इ मॉर्निंग आदत बचाई हॉर्मोनल इंबैलेंस से। हॉर्मोनल असंतुलन खाली शारीरिक नइखे, बल्कि मानसिक अउर भावनात्मक स्वास्थ्य कै भी प्रभावित करैथ। इहय मारे अगर दिन कै सुरुआत सही तरीका से की जाय, तौ कई समस्या से बचा जाइ सकथ। तौ काहे न जान लीव जाव उ मॉर्निंग आदत कै बारे मां:</p>
<p><strong>सबेरे जल्दी उठै कै आदत डालीव</strong><br />सबेरे जल्दी उठै से शरीर कै बायोलॉजिकल क्लॉक सही रहथ। इ से हॉर्मोन कै स्राव संतुलित रहथ अउर रउरा दिनभर ज्यादा एक्टिव महसूस करब।</p>
<p><strong>गुनगुना पानी जरूर पीव</strong><br />सबेरे खाली पेट गुनगुना पानी पीवै से शरीर कै टॉक्सिन बाहर निकरैथ अउर मेटाबॉलिज्म बूस्ट होइ जाथ, जो हॉर्मोन बैलेंस कै खातिर फायदेमंद अहइ।</p>
<p><strong>योग या हल्की एक्सरसाइज करीव</strong><br />सबेरे कै एक्सरसाइज शरीर मां एंडोर्फिन हॉर्मोन रिलीज करैथ, जेसे स्ट्रेस कम होइ जाथ अउर हॉर्मोनल सिस्टम अउर बेहतर तरीका से काम करैथ।</p>
<p><strong>सबेरे कै घाम लीव</strong><br />10–15 मिनट घाम मां बैठब शरीर कै विटामिन डी देथ, जो हॉर्मोनल संतुलन अउर इम्युनिटी दुनू कै खातिर जरूरी अहइ।</p>
<p><strong>मेडिटेशन अउर प्राणायाम अपनावीव</strong><br />कुछ मिनट कै ध्यान अउर गहरी सांस लीवै कै आदत मानसिक शांति देथ अउर स्ट्रेस हॉर्मोन कै नियंत्रित करैथ।</p>
<p><strong>हेल्दी अउर बैलेंस्ड नाश्ता करीव</strong><br />सबेरे कै नाश्ता छोड़ब हॉर्मोनल गड़बड़ी बढ़ा सकथ। प्रोटीन, फाइबर अउर हेल्दी फैट से भरपूरी नाश्ता हॉर्मोन कै संतुलित रखैथ।</p>
<p><strong>कैफीन कै सेवन सीमित रखीव</strong><br />खाली पेट चाय या कॉफी लीवै से कोर्टिसोल लेवल बढ़ सकथ। इहय मारे सबेरे पहिले हेल्दी चीज खाईव अउर फेर कैफीन लीव।</p>
<p><strong>पॉजिटिव माइंडसेट कै साथ दिन सुरुआत करीव</strong><br />सबेरे कै समय पॉजिटिव सोच अउर कृतज्ञता कै अभ्यास करै से मानसिक संतुलन बनारहथ, जो हॉर्मोनल हेल्थ कै भी प्रभावित करैथ।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जूतन के सहारे घर मा घुसिन हें घातक बैक्टीरिया अउर केमिकल्स, होय जाव सावधान!</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a8-%e0%a4%b9/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Sep 2026 16:19:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[जबै आप कहीं बाहर से घर लौटत अहा, तब आपन जूता-चप्पल बाहरै उतारत अहा कि घरै मा पहिरिके चले आवत अहा? आप सोचत होइहौ कि ई सवाल केहन बेतुका आय, पर असल मा ई आपके अउर आपके परिवार की सेहत बदे बहुत मायने रखत अहै। सच तो ई है कि जब आप बाहर से आवत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="484" height="304" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-12.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-12.png 484w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-12-300x188.png 300w" sizes="auto, (max-width: 484px) 100vw, 484px"></p>
<p>जबै आप कहीं बाहर से घर लौटत अहा, तब आपन जूता-चप्पल बाहरै उतारत अहा कि घरै मा पहिरिके चले आवत अहा? आप सोचत होइहौ कि ई सवाल केहन बेतुका आय, पर असल मा ई आपके अउर आपके परिवार की सेहत बदे बहुत मायने रखत अहै। सच तो ई है कि जब आप बाहर से आवत अहा, तब अपने जूतन के साथे कइयौ अनचाहे मेहमान भी लइ आवत अहा। जूतन मा लागी माटी से खाली गन्दगी नाहीं फैलत, बल्कि इनमा बैक्टीरिया भी छिपल रहत हें, जेहसे बीमारी होय सकत है। यहि ताईं घर मा घुसत घरी जूतन का बाहरै उतारब जरूरी अहै। आवा जानल जाय यहिके बारे मा अउर कुछ खास बातें।</p>
<p><strong>जूतन के तरुवा मा चिपके बैक्टीरिया</strong></p>
<p>साल 2008 मा भई एक रिसर्च मा ई पावा गवा कि लगभग 80% जूतन के निचला हिस्सा (तरुवा) मा फीकल बैक्टीरिया यानी मल मा पाय जाय वाले कीटाणु मिलेन। ई बैक्टीरिया अक्सर पब्लिक टॉयलेट्स के फर्श से जूतन मा चिपक जात हें अउर हमरे साथे घर तक चले आवत हें। यहिके अलावा, बाहर कुकुरन अउर चिरइन की बीट (dropings) आदि मा मौजूद बैक्टीरिया भी हमरे जूतन के तरुवा मा चिपक जात हें। अस्पताल जैसी जगहिन पर तौ अउरौ ढेर जर्म्स होत हें। एक दूसरी रिसर्च मा पता चला कि 65% डॉक्टर्स के जूतन पर एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी MRSA या एंटरोकोकस फेकेलिस जैसे आँतन मा पाय जाय वाले बैक्टीरिया मिलेन।</p>
<p><strong>केहन फर्श पर जादा टिकत हें बैक्टीरिया?</strong></p>
<p>न्यू यॉर्क सिटी के नॉर्थइस्टर्न यूनिवर्सिटी मा साल 2023 मा भई एक स्टडी मा सड़क के बरसात वाला पानी, जूतन के तरुवा अउर यूनिवर्सिटी के फर्श के नमूने लीन गय रहेन। यहि स्टडी मा पावा गवा कि लरिकन अउर मास्टरो के जूतन मा उहई बैक्टीरिया रहेन, जे बाहर सड़क पर रहेन। यहि वजह से यूनिवर्सिटी के भीतर वाला हिस्सा भी गन्दा पावा गवा, खास तौर से उहई जगह जहाँ कालीन (carpet) बिछा रहा। कालीन वाली जगहिन पर बैक्टीरिया के फैलाव सबसे जादा रहा।</p>
<p><strong>केमिकल्स भी आवत हें घर मा</strong></p>
<p>जूता खाली बैक्टीरिया नाहीं, बल्कि अउरौ कई खराब चीजन का घर के भीतर लइ आवत हें। PFAS अइसन केमिकल्स हें, जे पर्यावरण अउर हमरे शरीर मा कइयौ सालन तक बने रहत हें। यहि ताईं इनका ‘फॉरएवर केमिकल’ भी कहा जात है। ई भी जूतन के साथे घर मा चले आवत हें। यहिके अलावा, घर बनवावे या मरम्मत के काम के घरी उड़े वाली लीड डस्ट (सीसा वाली धूल) भी जूतन मा चिपक जात है। खेतन अउर घर के फुलवारी मा इस्तेमाल होय वाली कीटनाशक दवाइयाँ भी जूतन के सहारे घर मा घुस जात हें।</p>
<p><strong>घर के बाहर जूता उतारब है बहुतै जरूरी</strong></p>
<p>साल 2023 के एक पोल के हिसाब से, लगभग 63% अमेरिकी घर पहुँचतई नियम से आपन जूता बाहर उतार देत हें। उहईं, 24% मनई अपने घर आवे वाले पाहुनन से भी जूता बाहर उतारे का कहत हें। सेहत के नजर से देखल जाय तौ घर के बाहर जूता उतारब एक बहुतै समझदारी वाला काम साबित होय सकत है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जूतन कै साथ आपके घर मां घुस रहत हैं खतरनाक बैक्टीरिया अउर केमिकल्स</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a4%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%88-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%82-%e0%a4%98%e0%a5%81%e0%a4%b8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Sep 2026 16:19:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[जब आप कहीं बाहर से घर वापस लौटत हैं, तौ अपने जूता बाहेर उतारत हैं या घर मां भी जूता पहिनिकै आवत हैं? आप सोचत होब कि इ सवाल कतना बेतुका अहै, पै असल मां इ आपके अउर आपके परिवार कै सेहत खर्तिन बहुत मायने रखत अहै। दरअसल, आप जब बाहेर से आवत हैं, तौ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="484" height="304" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-15.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-15.png 484w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-15-300x188.png 300w" sizes="auto, (max-width: 484px) 100vw, 484px"></p>
<p>जब आप कहीं बाहर से घर वापस लौटत हैं, तौ अपने जूता बाहेर उतारत हैं या घर मां भी जूता पहिनिकै आवत हैं? आप सोचत होब कि इ सवाल कतना बेतुका अहै, पै असल मां इ आपके अउर आपके परिवार कै सेहत खर्तिन बहुत मायने रखत अहै। दरअसल, आप जब बाहेर से आवत हैं, तौ अपने जूता कै साथ बहुत जने अनचाहे मेहमान भी आवत हैं। जूततन मां लागि माटी से सिर्फ गंदीकी नाईं फैलत, बल्कि इमा बैक्टीरिया भी छिपे होत हैं, जे बीमारी कै कारन बन सकत हैं। एहिसे घर मां घुसते समइया जूततन कै बाहेर ही उतारेक बहुत जरूरी अहै। आवा जानीं इ बारे मां अउर भी बातन।</p>
<p><strong>जूतन कै तल्ला मां लागि बैक्टीरिया</strong></p>
<p>साल 2008 मां भवा एक रिसर्च मां पावा गवा कि लगभग 80% जूततन कै निछला हिस्सा मां फीकल बैक्टीरिया यानी मल मां पाए जाने वाले बैक्टीरिया पावा गए। इ बैक्टीरिया आम तौर पर पब्लिक टॉयलेट कै फर्श से जूततन पै चिपक जात हैं अउर हमरे साथ घर तक आ जात हैं। इ कै अलावा, बाहेर कुकुरन अउर पच्छियन कै ड्रॉपिंग्स आदि मां मौजूद बैक्टीरिया भी हमरे जूता कै तल्ला मां चिपक जात हैं। अस्पताल नियर जगहिन पै अउर भी ज्यादा जर्म्स होत हैं। एक दूसर रिसर्च मां पावा गवा कि 65% डॉक्टरन कै जूता पै एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी एमआरएसए या एंटरोकोकस फेकेलिस नियर आंतन मां पाए जाने वाले बैक्टीरिया पावा गए।</p>
<p><strong>किस तरह कै फर्श पै ज्यादा टिकत हैं बैक्टीरिया?</strong></p>
<p>न्यू यॉर्क सिटी कै नॉर्थइस्टर्न यूनिवर्सिटी मां 2023 मां भवा एक स्टडी मां फुटपाथ कै बरखा कै पानी, जूता कै तल्लन अउर यूनिवर्सिटी कै फर्श कै सैंपल लीवा गए। इ स्टडी मां पावा गवा कि छात्रन अउर शिक्षकन कै जूता कै तल्ला मां उहे बैक्टीरिया मौजूद रहे, जो बाहेर फुटपाथ पै रहे। इ वजह से यूनिवर्सिटी कै अंदर कै हिस्सा भी दूषित पावा गवा, खासकर उ जगहिन, जंहा कारपेट बिछा रहा। कारपेट बिछा भवा जगहिन पै बैक्टीरिया कै संक्रमण सबसे ज्यादा रहा।</p>
<p><strong>केमिकल्स भी आवत हैं घर</strong></p>
<p>जूता बैक्टीरिया कै साथ अउर भी बहुत जने हानिकारक चीजन कै घर कै अंदर लावत हैं। PFAS अइसन केमिकल्स हैं, जो पर्यावरण अउर हमरे सरीर मां बरसोबरिस तक बनै रहत हैं। एहिसे इन्है फॉरएवर केमिकल भी कहा जात हैं। इ भी जूता कै साथ घर मां आवत हैं। इ कै अलावा, रिकंस्ट्रक्शन या मरम्मत कै काम कै दौरान उड़े वाले लीड डस्ट भी जूता मां चिपक जात हैं। खेतन अउर घर कै बगिया मां इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक भी जूता कै साथ घर मां आ जात हैं।</p>
<p><strong>घर कै बाहेर जूता उतारेक जरूरी</strong></p>
<p>साल 2023 कै एक पोल कै मुताविक, लगभग 63% अमेरिकी घर पहुँचते ही नियमित रूप से अपने जूता बाहेर उतार देत हैं। वहीं, 24% लोग अपने घर आने वाले मेहमानन से भी जूता बाहेर उतारने कै अनुरोध करत हैं। सेहत कै लिहाज से घर कै बाहेर जूता उतारेक समझदारी भरा कदम साबित होइ सकत अहै।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पेट सफा करै से आगे है फाइबर क खेल, दिल अउर अतन की सेहत से भी है एकर गहरा नाता</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%88-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a4%b0/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Sep 2026 14:47:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[आजकल इंटरनेट मीडिया अउर हेल्थ ट्रेंड मा फाइबर क खूब चरचा है, पर ई खाली एक्क फैशन नाहीं आय। सोध (research) से पता चलत है कि जेतना जरूरी है ओतना फाइबर खाय से दिल क बीमारी, कोलोरेक्टल कैंसर अउर कइयौ अउर सेहत क समस्या क खतरा कम होय सकत है। हालांकि, अमेरिका मा जादातर लोग &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="1024" height="607" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-52.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-52.jpg 1024w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-52-300x178.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-52-768x455.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px"></p>
<p>आजकल इंटरनेट मीडिया अउर हेल्थ ट्रेंड मा फाइबर क खूब चरचा है, पर ई खाली एक्क फैशन नाहीं आय। सोध (research) से पता चलत है कि जेतना जरूरी है ओतना फाइबर खाय से दिल क बीमारी, कोलोरेक्टल कैंसर अउर कइयौ अउर सेहत क समस्या क खतरा कम होय सकत है। हालांकि, अमेरिका मा जादातर लोग जरूरत भर फाइबर नाहीं लेत हैं।</p>
<p><strong>रोजाना केतना ग्राम फाइबर क जरूरत है?</strong></p>
<p>औरतन बरे रोजे क 25 ग्राम अउर मरदन बरे 38 ग्राम फाइबर लेवे क सलाह दीन जात है। 2013 से 2018 के आकड़न क मानैं तौ, खाली चार फीसदी अमेरिकी सयाने ही आपन जरूरत भर फाइबर लेत रहिन। औसतन सेवन रोज क करीब 16 ग्राम रहा।</p>
<p><strong>फाइबर शरीर बरे काहे जरूरी है?</strong></p>
<p>डायटरी फाइबर अइसन कार्बोहाइड्रेट होत हैं जेका हमार शरीर पचा नाहीं पावत। ई कइयौ कुदरती चीजन मा पावा जात है। रसभरी, एवोकाडो, ओट्स, साबूत अनाज, दाल अउर बाकी फलियां एकर नीक स्रोत अहैं। बाजार मा फाइबर सप्लीमेंट भी मिलत हैं, जेमा साइलीयम हस्क पाउडर शामिल है। एकरे अलावा इन्यूलिन जैसन अलग कीन गवा फाइबर हाई-फाइबर स्नैक्स, कछू पीय वाली चीज अउर खाय क सामान मा भी मिलावा जात है। हालांकि सब फाइबर एक्के नियन नाहीं होत अउर शरीर पर ओकर असर भी अलग-अलग होय सकत है।</p>
<p><strong>अलग-अलग फाइबर क अलग-अलग फायदा</strong></p>
<p>साइलीयम अइसन फाइबर आय जउन पानी के संपर्क मा आवतई जेल जइसन बनि जात है। एसे पेट देर तक भरा-भरा लागत है। ई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर अउर ब्लड प्रेशर कम करै मा मदद कइ सकत है। एसे वजन मा थोरिक कमी अउर पेट सफा करै (मल त्याग) मा भी नियमितता आय सकत है। दुसरि कइती, इन्यूलिन जैसन कछू फाइबर अतन मा मौजूद बैक्टीरिया इस्तेमाल करत हैं। ई बैक्टीरिया से बनै वाले पदार्थ शरीर मा सूजन कम करै मा मदद कइ सकत हैं। जानकार लोग एही बरे खाली एकही ढब क फाइबर पर निर्भर रहै के बजाय अलग-अलग फाइबर वाली चीज खाय क सलाह देत हैं। ई चीजन से एंटीऑक्सीडेंट जैसन जरूरी पोषक तत्व भी मिलत हैं।</p>
<p><strong>फाइबर अउर प्रोबायोटिक्स मा का फरक है?</strong></p>
<p>अतन की सेहत बरे फाइबर के साथै प्रोबायोटिक्स भी बहुत काम क होत हैं। दही अउर साकरक्रॉट जइसन फर्मेंटेड (खमीर उठावा गवा) खाना मा जिअत सूक्ष्मजीव होय सकत हैं। आसान भासा मा समझें तौ, फाइबर अतन मा मौजूद नीक बैक्टीरिया बरे भोजन क काम करत है, जबकि प्रोबायोटिक्स नीक बैक्टीरिया क बढ़ावै मा मदद करत हैं। 2021 मा 36 स्वस्थ मनइन पर कीन गवा एक अध्ययन मा पावा गवा कि जे लोग जादा फाइबर लेत रहिन, उनकर अतन क बैक्टीरिया फाइबर तोड़ै वाले एंजाइम बनावै मा जादा सक्रिय रहे। वहीं, फर्मेंटेड खाना खाय वालन मा बैक्टीरिया क विविधता जादा रही अउर सूजन क स्तर कम रहा। एसे दुनू तरे क चीज साथै लेवे क फायदन क संकेत मिलत है।</p>
<p><strong>फाइबर बढ़ाव, पर धीरे-धीरे</strong></p>
<p>फाइबर बढ़ावै क कौनों एक तरीका सब मनइन बरे सही नाहीं आय। कछू लोगन का खाय-पीय क कुदरती चीजन से ही भरपूर फाइबर मिलि सकत है, जबकि कछू लोगन का सप्लीमेंट या फाइबर वाली अउर चीजन क जरूरत परि सकत है। अचानक जादा फाइबर लेवे से गैस, पेट फूलब अउर बेइत्मीनानी होय सकत है, खास तौर पर इन्यूलिन जैसन आसानी से फर्मेंट होय वाले फाइबर से। एही बरे फाइबर क मात्रा धीरे-धीरे बढ़ावै अउर भरपूर पानी पीय क सलाह दीन जात है। जानकारों क मानैं तौ फाइबर क प्रकार, मात्रा अउर ओकरे मेल पर अभी अउर बड़े सोध क जरूरत है। हालांकि एकरे कइयौ फायदा पहिले ही साम्प्रै आइ चुके हैं। असली चुनौती ई है कि मनइन का फाइबर वाली चीजन क फायदा बतावा जाय अउर ओका सस्ता अउर आसानी से मिलै लायक बनावा जाय।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>स्क्रीन टाइम अउर बइठै कै गलत तरीका लरिका के रीढ़ क हड्डी खातिर बनत है खतरा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Sep 2026 14:38:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[मोबाइल अउर कंप्यूटर पर जादा बखत बितावै अउर गलत तरीका से बइठै के नाते लरिका अउर किशोरन मां रीढ़ क हड्डी अउर गर्दन के दरद कै समस्या बढ़त जात अहै। आजकल लरिका आपन ढेर सारा बखत स्क्रीनटाइम मां बितावत हैं। अइसे मां फिजियोथेरेपी के जानकारों का कहब है कि मोबाइल-कंप्यूटर का बहुत जादा इस्तेमाल, देर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="825" height="571" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-51.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-51.jpg 825w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-51-300x208.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-51-768x532.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 825px) 100vw, 825px"></p>
<p><strong>मोबाइल अउर कंप्यूटर पर जादा बखत बितावै अउर गलत तरीका से बइठै के नाते लरिका अउर किशोरन मां रीढ़ क हड्डी अउर गर्दन के दरद कै समस्या बढ़त जात अहै।</strong></p>
<p>आजकल लरिका आपन ढेर सारा बखत स्क्रीनटाइम मां बितावत हैं। अइसे मां फिजियोथेरेपी के जानकारों का कहब है कि मोबाइल-कंप्यूटर का बहुत जादा इस्तेमाल, देर तक बइठे रहब अउर बइठै कै गलत तरीका लरिका अउर किशोरन मां पीठ, गर्दन अउर रीढ़ क हडि्डयन मां दिक्कत पैदा कइ सकत है। उइ नियमित रूप से ब्रेक लेब, बीच-बीच मां हिलब-डुलब, एर्गोनोमिक के बारे मां जानकारी अउर बचाव वाली फिजियोथेरेपी की जरूरत पर जोर दिहिन।</p>
<p><strong>डब्ल्यूपीएपी सम्मेलन मां नई चुनौतियन पर चर्चा</strong></p>
<p>भारतीय फिजियोथेरेपिस्ट्स संघ (आईएपी) के जानकारों ई चिंता विश्व फिजियोथेरेपी एशिया वेस्टर्न पैसिफिक (डब्ल्यूपीएपी) क्षेत्रीय सम्मेलन 2026 मां जताई अहै, जउन दिल्ली के यशोभूमि मां आयोजित कीन गवा है। ई सम्मेलन मां भारत अउर 32 देसन के 10,000 से जादा फिजियोथेरेपी पेशावर अउर प्रतिनिधि सामिल भये, जउन शारीरिक सेहत, पुनर्वास अउर बचाव वाली देखभाल मां आवै वाली नई चुनौतियन पर चर्चा किहिन।</p>
<p><strong>सम्मेलन मां जताई गई चिंता</strong></p>
<p>आईएपी के अध्यक्ष अउर डब्ल्यूपीएपी क्षेत्रीय सम्मेलन 2026 के आयोजन अध्यक्ष डॉ. संजीव के झा कहिन कि चिंता खाली ई बात कै नाहीं अहै कि लरिका स्क्रीन पर कइ घंटा बितावत हैं, बल्कि ई बात कै अहै कि उ दौरान शरीर के साथ का होत अहै। उइ बताए कि देर तक बइठब, एकै जइसन मुद्रा मां रहब, कम हिलब-डुलब अउर मोबाइल मां बार-बार झुकब गर्दन अउर पीठ पर जोर डारत है। लरिका का ई सिखाउब जरूरी अहै कि स्क्रीन इस्तेमाल करत समय हाथ-पांव हिलावत रहैं, सही तरीका से बइठैं अउर शारीरिक काम भी करैं।</p>
<p>हाल के वैज्ञानिक सोध भी बतावत हैं कि लरिका अउर किशोरन मां कम हिलब-डुलब अउर रीढ़ के दरद के बीच गहिरा नाता अहै। हालांकि जानकारों ई चेताउनी भी दीन्ह कि खाली स्क्रीन टाइम का ही पीठ दरद कै असली कारन नाहीं मानैं का चाही। गर्दन के दरद खातिर ई चिंता अउर बढ़ि सकत है। एक व्यवस्थित समीक्षा अउर मेटा विश्लेषण मां पावा गवा कि लरिका अउर किशोरन मां कम गतिविधि अउर गर्दन के दरद के बीच संबंध अहै।</p>
<p><strong>लरिका का सिखावैं का होइ स्क्रीन कै सही आदत</strong></p>
<p>उइ कहिन, “हमका लरिका का स्क्रीन इस्तेमाल करै कै सही आदत सिखावै कै जरूरत अहै। अइसे मां बइठै कै तरीका बदलत रहब, बीच-बीच मां ब्रेक लेब, सही तरीका से बइठै कै व्यवस्था करब अउर लरिका का खेल-कूद मां लगाय रखब बहुत जरूरी अहै। बचाव वाली फिजियोथेरेपी अउर सही जानकारी ई काम मां बहुत काम आइ सकत है।” जानकारों सलाह दीन्ह कि स्कूल अउर महतारी-बाप लरिका का पढ़ाई अउर स्क्रीन देखै के बीच मां ब्रेक लेब, उमिर के हिसाब से खेल-कूद, एर्गोनोमिक सीटिंग अउर बइठै के तरीका के बारे मां जागरूक करैं। साथै गर्दन झुकाय के देर तक स्मार्टफोन चलावै से बचैं। उइ ई भी कहिन कि अगर बार-बार दरद होय, तौ तुरन्त डॉक्टर का दिखावैं।</p>
<p><strong>डिवाइस के जादा इस्तेमाल कै लरिका पर असर</strong></p>
<p>जानकारों कहिन कि डिवाइस इस्तेमाल करत समय शरीर कै मुद्रा (पोस्चर) बहुत मायने रखत है। पांच से 12 साल के लरिका पर भये एक अध्ययन मां पावा गवा कि स्मार्टफोन चलावै से मूड़ अउर गर्दन के झुकाव अउर ‘क्रैनियोसर्विकल पोस्चर’ मां बदलाव आवत है, खास कइके बइठ के इस्तेमाल करै बखत। डब्ल्यूपीएपी 2026 की आयोजन सचिव डॉ. रुचि वार्ष्णेय कहिन, “हम लरिका क अइसन पीढ़ी देखित हन जउन स्क्रीन मां डूबी रहत है अउर घंटों तक बिना हिले-डुले बइठी रहि सकत है। एकर समाधान खाली लरिका से टेक्नोलॉजी छीनब नाहीं अहै।”</p>
<p><em>slug: screen-time-posture-spine-health-kids-awadhi</em></p>
</div>
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		<item>
		<title>हर्ट अटैक हरदम अचानकै नाहीं आवत, शरीर पहिलेन से देई लागत है ई इसारा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Sep 2026 14:32:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[टीवी सीरियल मा हर्ट अटैक बड़ा ड्रमैटिक तरीके से देखावा जात है, कउनो मनई के सीना मा अचानकै पीर उठत है, ऊ दिल पर हाथ धरत है अउर गिर परत है। हमरे दिमाग मा दिल के दौरा का लेके जउन ई छवि बनी है ऊ गलत है, काहे से अटैक हरदम चुपके से आवत है। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="1024" height="579" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-45.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-45.jpg 1024w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-45-300x170.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-45-768x434.jpg 768w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-45-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px"></p>
<p>टीवी सीरियल मा हर्ट अटैक बड़ा ड्रमैटिक तरीके से देखावा जात है, कउनो मनई के सीना मा अचानकै पीर उठत है, ऊ दिल पर हाथ धरत है अउर गिर परत है। हमरे दिमाग मा दिल के दौरा का लेके जउन ई छवि बनी है ऊ गलत है, काहे से अटैक हरदम चुपके से आवत है। ई थकान, बदहजमी अउर हल्का-फुल्का पीर बनके आवत है, जेका हम सब आम बात समझ के नजरअंदाज कइ देती हन।</p>
<p><strong>हर्ट अटैक के समइ असल मा का होत है?</strong><br />हर्ट अटैक तबै आवत है जब दिल तक ब्लड फ्लो अचानकै रुकि जात है, अइसा कोरोनरी अर्टरी मा फैट यानी थक्का जमै के कारन होत है। फिर ऑक्सीजन ना मिलै के कारन हर्ट टिशू कुछै मिनट मा डैमेज होय लागत हंय, यही कारन डॉक्टर हरदम एक कहावत पर जोर देवत हंय कि ‘टाइम ही मसल है’, मतलब इलाज मा देरी भई तौ समझो ओतने जादा नोकसान होई।</p>
<p><strong>किताबन अउर टीवी सीरियल से हटके सीना के पीर</strong><br />ज्यादातर लोग सीना मा जउन बेचैनी महसूस करत हंय, ऊ असल तौ होत है पर ई बहुतै कम तेज या चुभै वाली पीर लागत है। एकरे बजाय, मरीज दबाव, जकड़न अउर भारीपन के सिकायत करत हंय, जेका अक्सर एसिडिटी समझ लीन जात है। ई पीर सीना के बीच मा या बाएं तरफ उठत है, जउन कुछ मिनट बदे कम जरूर होइ सकत है पर फिर से होय लागत है। अइसे मा लोग एका सामान्य गैस-एसिडिटी के लक्षण समझ के नजरअंदाज कइ देती हंय।</p>
<p><strong>हर्ट मा सिर्फ बाएं हाथै मा नाहीं होत पीर</strong><br />हर्ट अटैक के अइसा कइयौ लक्षण हंय जउन लोगन का चकमा देइ सकत हंय, ध्यान देय वाली बात ई है कि इनकर संबंध सीना के पीर से बिल्कुलै नाहीं है। इन मा एक या दुनहु हाथन मा पीर, कंधा, कमर, गर्दन अउर जबड़ा मा पीर या फिर पेट के ऊपरी हिस्सा मा बेचैनी महसूस होब शामिल है। ई भ्रम दिमाग से निकालि देव कि दिल के दौरा मा खाली बाएं हाथै मा पीर उठत है।</p>
<p><strong>ई इसारन का भी ना करा नजरअंदाज</strong><br />कइयौ अउर इसारा हंय जेका अक्सर लोग अनदेखा कइ देती हंय, जैसे- सीना मा पीर या ओकरे बिना ही सांस लेय मा तकलीफ, अचानक पसीना आयब, उल्टी या जी मिचलायब, चक्कर आयब, धड़कन का बेतरतीब चलब अउर बिना कउनो कारन के थकान लागब। मर्दन के तुलना मा मेहरारुन मा ई लक्षण जादा देखाई देत हंय, यही वजह है कि मेहरारुन मा दिल के दौरा के पहचान देर से होत है।</p>
<p><strong>अपने मन से पता करै के कोसिस ना करा</strong><br />अब जब आप इन लक्षणन का जानि गये हंय, तौ आपक लागत होई कि हर्ट अटैक का आप शुरूआती लेवल पर पहिचानि सकत हंय। जबकि अइसा बिल्कुल नाहीं है कि सीना मा पीर के मतलब हर्ट अटैकै होय। कइयौ बार एंग्जाइटी, मांसपेसियन मा तनाव, एसिडिटी, फेफड़ा के समस्या भी एकर वजह होइ सकत है। एकरे बदे जरूरी है कि अपने आपे बैद ना बना अउर डॉक्टर से संपर्क करा। डॉक्टर ईसीजी अउर ब्लड टेस्ट के मदद से एकर पहचान आसानी से कइ सकत हंय। लक्षण देखै के बाद अपने आप से सवाल ना पूछा, एका एमर्जेंसी मान के तुरंत कदम उठावा।</p>
<p><strong>अइसी स्थिति मा का करा?</strong><br />अगर आप या आपके आसपास कउनो मनई का ई लक्षण देखाई देत हंय, तौ सबसे पहिले एमर्जेंसी सर्विस का फोन करा। अपने से गाड़ी चलाइ के अस्पताल जाय से बचा, काहे से अगर मरीज के हालत जादा बिगड़ी तौ एम्बुलेंस रस्ता मा स्थिति का सम्हारि सकत है पर आप नाहीं। अइसी हालत मा एस्पिरिन के नाम लीन जात है, पर एका खाली एक मदद के तौर पर लीन जाय के चाही; इलाज के रूप मा नाहीं। अगर कउनो का अचानकै सीना मा पीर उठत है अउर ओका एस्पिरिन से कउनो एलर्जी नाहीं है, तौ ऊ एमर्जेंसी मा एका खाय सकत है। बस ई ध्यान रहे कि सबसे पहिले एमर्जेंसी मा फोन करै का है, अउर ओकरे बादै एस्पिरिन के मदद लेय का है।</p>
<p><strong>हर्ट अटैक अउर कार्डियक अरेस्ट एकै नाहिंय</strong><br />आपक सायत ना पता होय पर हर्ट अटैक अउर कार्डियक अरेस्ट एकै बात नाहीं आय। हर्ट अटैक सर्कुलेशन से जुड़ी परेशानी है, जेमा अर्टरी ब्लॉक होइ जात है। वहीं, कार्डियक अरेस्ट एक इलेक्ट्रिक खराबी है, जेसे हर्ट पूरी तरह से धड़कब बंद कइ देत है अउर मनई बेहोस होइ जात है या ओका सांस लेय मा दिक्कत होत है। समझने वाली बात ई है कि एक स्थिति दूसरे के कारन बनि सकत है, पर दुनहु हालत मा उपाय अलग-अलग होत हंय। कार्डियक अरेस्ट मा सीपीआर के जरूरत होत है।</p>
<p><strong>हर्ट अटैक के खतरा कम करै बदे का करा?</strong><br />दिल के बीमारी से जुड़ा खतरा कम कीन जाइ सकत है। इन मा तंबाकू से परहेज करब, फिजिकली एक्टिव रहब, डाइट मा साग-भाजी, अनाज अउर दाल जादा से जादा लेब शामिल है। वहीं, अगर कउनो मनई का जादा नमक वाला पैकेट फूड खाय के आदत होय, तौ ओसे कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर अउर बीपी तीनों बढ़ै के जोखिम बना रहत है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>हार्ट अटैक हमेशा अचानक नइअ आवत, शरीर पहिले सेइ देय लागत अहै इ संकेत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 29 Sep 2026 14:32:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="1024" height="579" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-46.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-46.jpg 1024w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-46-300x170.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-46-768x434.jpg 768w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-46-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px"></p>
<p>टीवी सीरियल मां हार्ट अटैक बहुत ही ड्रमैटिक तरीका से देखाव जात अहै, कउनो आदमी कै सीना मां अचानक से दरद उठत अहै, वू दिल पर हाथ रखत अहै अउर गिर जात अहै। हमार दिमाग़ मां दिल कै दौरा कै लइके बनाई गइ अइसन छबि गलत अहै, काहेकि अटैक हमेशा चुपके से आवत अहै। इ थकान, बदहजमी अउर हल्का-फुल्का दरद कै रूप मां आवत अहै, जवनके हम आम समझिकै अनदेखा करइ देत हन।</p>
<p><strong>हार्ट अटैक के समय असल मां का होत अहै?</strong></p>
<p>हार्ट अटैक तब आवत अहै जब दिल तक ब्लड फ्लो अचानक से रुक जात अहै, अउर इ कोरोनरी अर्टरी मां फैट यानी थक्का जमने कै वजह से होत अहै। फेर ऑक्सीजन न मिलै कै कारन हार्ट टिशू कुछ ही मिनट मां डैमेज होय लागत हन, एही कारन डॉक्टर हमेशा एक कहावत पर जोर देत हन कि टाइम ही मसल है, यानी इलाज मां देरी होय से उतवे जादा नुकसान होई।</p>
<p><strong>किताबन अउर टीवी सीरियल से हटिकै सीना मां दरद</strong></p>
<p>ज्यादातर लोग सीना मां दरद कै जवन असहजता महसूस करत हन, वू असल तौ होत अहै पर इ मुसकिल ही कबहूँ तेज वा चुभने वाला दरद लागत अहै। एकर बजाय, मरीज दबाव, जकड़न अउर भारीपन कै शिकायत करत हन, जवनके अक्सर एसिडिटी समझ ली जात अहै। इ दरद सीना कै बीच मां वा दहिने-बायें तरफ उठत अहै, जवन कुछ मिनट खातिर कम तौ होइ सकत अहै पर फेर से होय लागत अहै। अइसने मां लोग इके एक सामान्य गैस-एसिडिटी कै लक्षण समझिकै नजरअंदाज करइ देत हन।</p>
<p><strong>हार्ट मां सिर्फ बायें हाथ मां ही नइअ होत दरद</strong></p>
<p>हार्ट अटैक कै अइसउ कई लक्षण अहैं जवन लोगन के चकमा दइ सकत हन, ध्यान देय वाली बात इ अहै कि इनका संबंध सीना कै दरद से बिल्कुल भी नइअ अहै। इमा एक वा दूनू हाथन मां दरद, कंधन, कमर, गरदन अउर जबड़ा मां दरद वा फेर पेट कै ऊपरी हिस्सा मां असहजता महसूस होब शामिल अहै। इ भ्रम के दूर कर दीं कि दिल कै दौरा कै लक्षणन मां सिर्फ बायें हाथ मां ही दरद उठत अहै।</p>
<p><strong>इ संकेतन् केहू न करैं अनदेखा</strong></p>
<p>कई संकेत अउर अहैं जवने के अक्सर लोग अनदेखा करइ देत हन, जैसे- सीना मां दरद वा ओकर बिनाही सास लेब मां परेशानी, अचानक पसीना आब, उल्टी वा मतली, चक्कर आब, धड़कन कै अनियमित चलब अउर बिना कउनो वजह कै थकान। पुरुषन कै तुलना मां महिलअन मां इ लक्षण जादा दिखाई देत हन, एही वजह से महिलअन मां दिल कै दौरा कै पहिचान देरी से होत अहै।</p>
<p><strong>खुद से पता करै कै कोसिस न करैं</strong></p>
<p>अब आप इ लक्षणन के जान लीन्ह अहै, तौ आपको लागत होई कि हार्ट अटैक के आप शुरुआती स्तर पर पहिचान सकत हन। जबकि अइसन बिल्कुल भी नइअ अहै कि सीना मां दरद कै मतलब हार्ट अटैक ही होय। कई बार एंग्जाइटी, मांसपेसियन मां तनाव, एसिडिटी, फेफड़न कै समस्या भी एकर वजह होइ सकत अहै। एकर खातिर जरूरी अहै कि खुद एकर पता न लगावत भये डॉक्टर से संपर्क कीन्ह जाव। डॉक्टर ईसीजी अउर ब्लड टेस्ट कै मदद से एकर पहिचान आसानी से कर सकत हन। इ बात कै ध्यान रखैं कि लक्षणन पर गोर करै के बाद खुद से सवाल नइअ पूछब अहै, इके एक एमर्जेंसी मानिकै तुरंत एक्शन लीं।</p>
<p><strong>अइसन स्थिति मां का करैं?</strong></p>
<p>अगर आप वा आपके आसपास कउनो आदमी के इ लक्षण दिखाई देत हन, तौ सबसे पहिले एमर्जेंसी सर्विस पर कॉल करीं। खुद से गाड़ी चलाइकै अस्पताल जाब से बचैं, काहेकि अगर मरीज कै हालत जादा बिगड़ी तौ एम्बुलेंस रस्ता मां स्थिति के संभाल सकत अहै पर आप नइअ। अइसन कंडीशन मां एस्पिरिन कै नाम ली जात अहै, लेकिन इके एक मदद कै तरह लीब चाही; इलाज कै रूप मां नइअ। अगर कउनो के अचानक से सीना मां दरद उठत अहै अउर ओकर एस्पिरिन से कउनो एलर्जी वा ओकर न लेब कै सलाह नइअ मिला अहै, तौ वू एमर्जेंसी मां ओकर सेवन कर सकत अहै। इ बात कै ध्यान रखैं कि लक्षण देखै पर सबसे पहिले एमर्जेंसी मां फोन करब अहै, अउर ओकर बाद ही एस्पिरिन कै मदद लीब अहै।</p>
<p><strong>हार्ट अटैक अउर कार्डियक अरेस्ट एक जैसे नइअ ह्वैं</strong></p>
<p>आपको शायद पता न होय पर हार्ट अटैक अउर कार्डियक अरेस्ट एक बात नइअ अहै। हार्ट अटैक एक सर्कुलेशन से जुड़ी परेशानी अहै, जवने मां अर्टरी ब्लॉक होइ जात अहै। ओहिजा, कार्डियक अरेस्ट एक इलेक्ट्रिक खराबी अहै, जवने से हार्ट पूरी तरह से धड़कना बन्द करइ देत अहै अउर आदमी भी बेहोश होइ जात अहै वा ओकर सास लेब मां परेशानी होत अहै। समझै वाली बात इ अहै कि एक स्थिति दूसर परेशानी कै कारन बन सकत अहै, पर दूनू स्थिति मां उपाय अलग-अलग होत अहैं। बतावत चलैं कि कार्डियक अरेस्ट मां सीपीआर कै जरूरत होत अहै।</p>
<p><strong>हार्ट अटैक कै खतरा कम करै खातिर का करैं?</strong></p>
<p>दिल कै बीमारी से जुड़ खतरा के कम कीन्ह जाइ सकत अहै। इमा तंबाकू से परहेज करब, फिजिकली एक्टिव रहब, डाइट मां सब्जी, अनाज अउर दाल जादा से जादा लेब शामिल अहै। ओहिजा, अगर कउनो आदमी के जादा नून वाला पैकेट फूड खाइब कै आदत होय, तौ ओसे कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर अउर बीपी तीनू बढ़ै कै जोखिम बना रहत अहै।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>फाइबर कै खेल सिर्फ पेट साफ करै तक सीमित नाइअहै, दिल अउर आंतन कै सेहत से भी जुड़ल बा कनेक्शन</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%87%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%88-%e0%a4%96%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab-%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ab/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Sep 2026 14:45:37 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[फाइबर कै लई कै इन्हिन दिनन इंटरनेट मीडिया अउर हेल्थ ट्रेंड मां बहुत चर्चा बा, मुला इ सिर्फ एक फैशन नाइअहै। शोधन से पता लागत बा कि पर्याप्त फाइबर लेबैल से हृदय रोग, कोलोरेक्टल कैंसर अउर अउरउ कतहु स्वास्थ्य समस्याफन् कै खतरा कम होइ सकत बा। अमेरिका मां हालांकि ज्यादातर लोग पर्याप्त फाइबर नाइ लेत। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="1024" height="607" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-39.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-39.jpg 1024w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-39-300x178.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-39-768x455.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px"></p>
<p>फाइबर कै लई कै इन्हिन दिनन इंटरनेट मीडिया अउर हेल्थ ट्रेंड मां बहुत चर्चा बा, मुला इ सिर्फ एक फैशन नाइअहै। शोधन से पता लागत बा कि पर्याप्त फाइबर लेबैल से हृदय रोग, कोलोरेक्टल कैंसर अउर अउरउ कतहु स्वास्थ्य समस्याफन् कै खतरा कम होइ सकत बा। अमेरिका मां हालांकि ज्यादातर लोग पर्याप्त फाइबर नाइ लेत।</p>
<p><strong>रोजाना कतने ग्राम फाइबर कै जरूरत?</strong><br />औरतन कै खातिर रोजाना 25 ग्राम अउर मरदन् कै खातिर 38 ग्राम फाइबर लेवै कै सिफारिश कीन्ह जात बा। 2013 से 2018 कै आंकड़न् के अनुसार, सिर्फ चार प्रतिशत अमेरिकी वयस्क ही अपने जरूरत कै मुताबिक फाइबर लेत रहें। औसत सेवन करीब 16 ग्राम प्रतिदिन रहा।</p>
<p><strong>फाइबर शरीर कै खातिर काहें जरूरी बा?</strong><br />डायटरी फाइबर अइसे कार्बोहाइड्रेट होवत हय जेहिकै हमार शरीर पचा नाइ पावत। इ बहुत प्राकृतिक खाद्य पदार्थन मां पावा जात बा। रसभरी, एवोकाडो, ओट्स, साबूत अनाज, दाल अउर अउर फलियां इकर बहुत अच्छा स्रोत अहैं। बाजार मां फाइबर सप्लीमेंट भी मिलत बा, जेहमां साइलीयम हस्क पाउडर शामिल बा। इकर अलावा इन्यूलिन नियन अलग कीन्ह गए फाइबर कै हाई-फाइबर स्नैक्स, कुछ पेय अउर अउर खाद्य पदार्थन मां भी मिलावा जात बा। हालांकि सब फाइबर एक नियन नाइ होत अउर शरीर पर उनका असर भी अलग-अलग होइ सकत बा।</p>
<p><strong>अलग-अलग फाइबर कै अलग फाइदा</strong><br />साइलीयम एक अइसन फाइबर अहै जो पानी के संपर्क मां आएसै जेल नियन बन जात बा। इहिसै पेट लंबे समय तक भरल महसूस होइ सकत बा। इ कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर अउर ब्लड प्रेशर कै कम करै मां मदद कर सकत बा। इहिसै वजन मां थोड़ा कमी अउर पेट साफ होवै कै नियमित करै मां भी मदद मिल सकत बा।</p>
<p>दूसरी ओर, इन्यूलिन नियन कुछ फाइबर कै आंतन मां मौजूद बैक्टीरिया इस्तेमाल करत हय। इ बैक्टीरिया से बननिहार पदार्थ शरीर मां सूजन कम करै मां मदद कर सकत हय। विशेषज्ञ इहिसै सिर्फ एक तरह कै फाइबर पर भरोसा करै कै बजाय अलग-अलग फाइबर वाले खाद्य पदार्थ खाइ कै सलाह देत अहैं। इन खाद्य पदार्थन से एंटीऑक्सीडेंट नियन अउर पोषक तत्व भी मिलत अहैं।</p>
<p><strong>फाइबर अउर प्रोबायोटिक्स मां का अंतर बा?</strong><br />आंतन कै सेहत कै खातिर फाइबर के साथ प्रोबायोटिक्स भी उपयोगी होइ सकत बा। दही अउर साकरक्रॉट नियन फर्मेंटेड खाद्य पदार्थन मां जीवित सूक्ष्मजीव मौजूद होइ सकत अहैं। आसान भाषा मां समझैं तौ फाइबर आंतन मां मौजूद नीक बैक्टीरिया कै खातिर भोजन कै काम करत बा, जबकि प्रोबायोटिक्स नीक बैक्टीरिया कै बढ़ावै मां मदद करत बा।</p>
<p>2021 मां 36 स्वस्थ लोगन पर कीन्ह गए एक अध्ययन मां इ पावा गवा कि ज्यादा फाइबर लेनिहारन कै आंतन कै बैक्टीरिया फाइबर कै तोड़निहार एंजाइम बनावै मां ज्यादा सक्रिय भवा। ओहिने, फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ खाइनिहारन मां बैक्टीरिया कै विविधता ज्यादा अउर सूजन कै स्तर कम रहा। इहिसै दुनू तरह कै खाद्य पदार्थन कै साथ लेवै कै संभावित फाइदा कै संकेत मिलत बा।</p>
<p><strong>फाइबर बढ़ावैं, मुला धीरे-धीरे</strong><br />फाइबर बढ़ावै कै कोई एक तरीका सब लोगन कै खातिर सही नाइअहै। कुछ लोगन कै साबूत खाद्य पदार्थन से ही पर्याप्त फाइबर मिल सकत बा, जबकि कुछ लोगन कै सप्लीमेंट या अतिरिक्त फाइबर वाले खाद्य पदार्थन कै जरूरत पड़ सकत बा।</p>
<p>ज्यादा फाइबर अचानक लेबैल से गैस, पेट फूलना अउर असहजता होइ सकत बा, खासकर इन्यूलिन नियन आसानी से फर्मेंट होइ जामिनहार फाइबर से। इहिसै फाइबर कै मात्रा धीरे-धीरे बढ़ावै अउर पर्याप्त पानी पियै कै सलाह दीन्ह जात बा।</p>
<p>विशेषज्ञन कै मुताविक फाइबर कै प्रकार, मात्रा अउर उनके संयोजन पर अभी अउर बड़े शोध कै जरूरत बा। हालांकि इकर कतहु फाइदा पहिले ही सामने आ चुका बा। बड़ी चुनौती इ बा कि लोगन कै फाइबर वाले खाद्य पदार्थन कै फाइदा बतावा जाव अउर उनका सस्ता अउर आसानी से उपलब्ध करावा जाव।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जिम जाइ वाले अउर फिट दिखै वाले लोगन का भी होइ सकत अहै हाई कोलेस्ट्रॉल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Sep 2026 15:31:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[हार्ट अटैक अउर दिल की बीमारियन कै मामला आजकल बहुत तेजी से बढ़इ लाग अहै। एककै पीछे बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल कै बढ़ब एक बहुत बड़की वजह अहै। सबसे खतरनाक बात इ बा कि बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़वै कै सुरुआती स्टेज मां कोउ लक्षण नाहीं दिखाई देत अहै। एहिकै नाते बिना कोउ संकेत इ खामोशी से हमार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="1024" height="544" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-34-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-34-1.jpg 1024w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-34-300x159.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-34-768x408.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px"></p>
<p>हार्ट अटैक अउर दिल की बीमारियन कै मामला आजकल बहुत तेजी से बढ़इ लाग अहै। एककै पीछे बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल कै बढ़ब एक बहुत बड़की वजह अहै। सबसे खतरनाक बात इ बा कि बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़वै कै सुरुआती स्टेज मां कोउ लक्षण नाहीं दिखाई देत अहै। एहिकै नाते बिना कोउ संकेत इ खामोशी से हमार शरीर मां बढ़ित रहत अहै अउर हार्ट अटैक अउर दिल की बीमारियन कै वजह बन जात अहै। एहिकै नाते नियमित लिपिड प्रोफाइल चेकअप बहुत जरूरी अहै अउर एकसेस जुड़ल तीन जरूरी सवाल तनकय अपने डॉक्टर से जरूर पूंछै चाही। आवैं जानावैं कि इ सवाल का-का अहैं।</p>
<p><strong>का सिर्फ उमिरदराज लोगन का होत अहै बैड कोलेस्ट्रॉल?</strong></p>
<p>आम तौर पर माना जात अहै कि बढ़ति उमिर या कम फिजिकल एक्टिविटी ही दिल की बीमारियन कै सबसे बड़का कारण अहै, पै सच इ अहै कि बैड कोलेस्ट्रॉल कै हाइ लेवल सिर्फ बुजुर्गन या अनहेल्दी लाइफस्टाइल जीनि वाले तकर सीमित नाहीं अहै। अगर तंय युवा अहा, नियमित एक्सरसाइज करित अहा अउर नीक डाइट लेइत अहा, तौ भी जेनेटिक्स या फैमिली हिस्ट्री कै नाते तोहार ब्लड कोलेस्ट्रॉल बढ़ल होइ सकत अहै। यानी तोहार फिट देखब इ बात कै गारंटी नाहीं अहै कि तोहार कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कंट्रोल मां अहै।</p>
<p>यहिकै नाते १८ साल की उमिर से ही नियमित रूप से लिपिड प्रोफाइल कै जांच सुरू कर दिअय चाही। सुरुअत मां एककै पता चलै से सही समय पर इलाज कीन जाइ सकत अहै अउर भविष्य मां हार्ट अटैक कै रिस्क भी कम कीन जाइ सकत अहै।</p>
<p><strong>डॉक्टर से का पूंछीं?</strong></p>
<p><strong>मेरा बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल कितवा अहै?</strong><br />बैड कोलेस्ट्रॉल हमार आर्टरीज मां प्लाग जमा करै खर्तिन जिम्मेदार होत अहै। काहेकि एककै कोउ लक्षण नाहीं दिखाई देत अहै, एहिकै नाते अपने लिपिड टेस्ट से अपने बैड कोलेस्ट्रॉल कै सही मात्रा जानब बहुत जरूरी अहै।</p>
<p><strong>मेरी सेहत के हिसाब से मेरा पर्सनल टारगेट का होइ चाही?</strong><br />कोलेस्ट्रॉल कै सुरक्षित स्तर हर इंसान खर्तिन एक नियर नाहीं होत अहै। कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया कै अनुसार, तोहार पर्सनल गोल तोहार पूरा हार्ट हेल्थ पर निर्भर करत अहै।<br />– लो रिस्क- ११६ mg/dL से कम<br />– मॉडिरेट रिस्क- १०० mg/dL से कम<br />– हाई रिस्क, जैसे- डायबिटीज, हाई बीपी या किडनी डिजीज- ७० mg/dL से कम<br />– बहुत हाई रिस्क वाले खर्तिन- ५५ mg/dL से कम कोलेस्ट्रॉल रखवै कै लक्ष्य होइ चाही।</p>
<p><strong>का मैं अपने टारगेट लेवल तक पहुँच गवा हौं?</strong><br />अगर नाहीं, तौ मोर पास का विकल्प अहैं?<br />कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल करै खर्तिन सिर्फ दवाइयां खाब या नीक खाना खाब काफी नाहीं अहै। अगर लाइफस्टाइल मां बदलाव अउर दवाइयन कै बाद भी कोलेस्ट्रॉल कम नाहीं होत अहै, तौ डॉक्टर इलाज कै तरीका बदल सकत अहैं। जौन लोग हाई रिस्क रेंज मां आवत अहैं, उनकै खर्तिन डॉक्टर एडवांस्ड थेरेपी कै मदद भी लेइ सकत अहैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जिम जाइ वाले अउर फिट दिखइ वालेन का भी होइ सकत है हाई कोलेस्ट्रॉल: डाक्टर से जरूर पूँछव ई 3 सवाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 26 Sep 2026 15:31:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[आजकल दिल के दौरा (हार्ट अटैक) अउर दिल की बीमारिन के मामला बहुतै तेजी से बढ़त हँय। एका सबसे बड़ा कारन ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ के लेवल मा बढ़ती अहै। सबसे डेरावनी बात तौ ई अहै कि जब बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ै लागत है, तौ सुरु मा कउनो लच्छन नाहीं देखात। यहै बरे बिना कउनो इसारा के ई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="1024" height="544" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-35.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-35.jpg 1024w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-35-300x159.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-35-768x408.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px"></p>
<p>आजकल दिल के दौरा (हार्ट अटैक) अउर दिल की बीमारिन के मामला बहुतै तेजी से बढ़त हँय। एका सबसे बड़ा कारन ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ के लेवल मा बढ़ती अहै। सबसे डेरावनी बात तौ ई अहै कि जब बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ै लागत है, तौ सुरु मा कउनो लच्छन नाहीं देखात। यहै बरे बिना कउनो इसारा के ई चुपके से हमरे सरीर मा बढ़त रहत है अउर हार्ट अटैक या दिल की बीमारिन के वजह बनत है। यहै तइँ समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल के जाँच कराउब बहुत जरूरी अहै अउर एका लेके तीन खास सवाल आपन डाक्टर से जरूर पूछय चाही। आउ जानि जाइ कि ई सवाल का हँय।</p>
<p><strong>का खाली बुढ़वन का होत है बैड कोलेस्ट्रॉल?</strong></p>
<p>आमतौर पर मनई सोचत हँय कि खाली उमर बढ़ै पर या फिर कम काम-काज करइ से दिल की बीमारी होत है, मुला सच तौ ई अहै कि बैड कोलेस्ट्रॉल के ऊँच लेवल खाली बुढ़वन या खराव रहन-सहन वालेन तक सीमित नाहीं अहै। अगर आप जवान हय, रोज कसरत करत हय अउर नीक खान-पान है, तबहूँ जेनेटिक्स या पुरखन की बीमारी के वजह से आपन ब्लड कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकत है। मतलब ई कि आपक तंदुरुस्त दिखब एका गारंटी नाहीं अहै कि कोलेस्ट्रॉल भी काबू मा अहै। यहै कारन है कि 18 साल की उमर से ही लिपिड प्रोफाइल के जाँच सुरु कइ देवे चाही। सुरु मा पता चलि जाइ तौ सही टेम पर इलाज होइ सकत है अउर आगे चलि के हार्ट अटैक के खतरा कम कीन जाइ सकत है।</p>
<p><strong>डाक्टर से का पूँछय?</strong></p>
<p><strong>1. हमार बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल केतना अहै?</strong><br />
बैड कोलेस्ट्रॉल हमरे नसन (आर्टरीज) मा गंदगी (प्लाग) जमा करइ बरे जिम्मेदार होत है। काहे से एका कउनो लच्छन नाहीं देखात, यहै बरे लिपिड टेस्ट से सही मात्रा जानब बहुत जरूरी अहै।</p>
<p><strong>2. हमरी सेहत के हिसाब से हमार पर्सनल टारगेट का होइ के चाही?</strong><br />
कोलेस्ट्रॉल के सुरक्षित लेवल हर मनई बरे एकै नाहि होत। कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया के हिसाब से, आपक टारगेट आपक दिल के सेहत पर निर्भर करत है।</p>
<ul>
<li><strong>कम खतरा (लो रिस्क):</strong> 116 mg/dL से कम</li>
<li><strong>बीच वाला खतरा (मॉडिरेट रिस्क):</strong> 100 mg/dL से कम</li>
<li><strong>ज्यादा खतरा (जैसे सुगर, हाई बीपी या किडनी की बीमारी):</strong> 70 mg/dL से कम</li>
<li><strong>बहुतै ज्यादा खतरा वालेन बरे:</strong> 55 mg/dL से कम कोलेस्ट्रॉल रखइ के लच्छ होइ के चाही।</li>
</ul>
<p><strong>3. का हम अपने टारगेट लेवल तक पहुँचि गय अही? अगर नाहीं, तौ हमार लगे का रस्ता अहै?</strong><br />
कोलेस्ट्रॉल काबू मा रखइ बरे खाली दवाई खइले या नीक खइले से काम नाहीं चली। अगर रहन-सहन बदलै अउर दवाई के बादौ कोलेस्ट्रॉल कम नाहीं होत है, तौ डाक्टर इलाज के तरीका बदलि सकत हँय। जे मनई ज्यादा रिस्क मा हँय, उनके बरे डाक्टर एडवांस्ड थेरेपी के मदद भी लइ सकत हँय।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>खाली सिगरेट पीयब ही नहीं, तोहार रहन-सहन भी फेफड़न खातिर है खतरनाक</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%af%e0%a4%ac-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%a4/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Sep 2026 15:23:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[जबहूँ फेफड़न से जुड़ी कौनों बीमारी क बात होत है, तौ अक्सर मनई के दिमाग मा सिगरेट-बीड़ी ही आवत है। ई सच आय कि सिगरेट पीये से फेफड़न का बहुत नुकसान होत है अउर ई कई बीमारियों क जड़ है, पर खाली यही एक कारण नाहीं है। जउं आप सिगरेट नाहीं पीयति हउ, तबहूँ अगर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="1024" height="589" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-29-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-29-1.jpg 1024w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-29-300x173.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-29-768x442.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px"></p>
<p>जबहूँ फेफड़न से जुड़ी कौनों बीमारी क बात होत है, तौ अक्सर मनई के दिमाग मा सिगरेट-बीड़ी ही आवत है। ई सच आय कि सिगरेट पीये से फेफड़न का बहुत नुकसान होत है अउर ई कई बीमारियों क जड़ है, पर खाली यही एक कारण नाहीं है। जउं आप सिगरेट नाहीं पीयति हउ, तबहूँ अगर कुछ खराब आदतें तोहार रहन-सहन (लाइफस्टाइल) क हिस्सा अहैं, तौ तोहरे फेफड़न का नुकसान होइ सकत है। आवा जानल जाय कि उ कउन-कउन सी आदतें अहैं, जेसे फेफड़न का नुकसान होत है।</p>
<p><strong>दूसरे क धुआं (पैसिव स्मोकिंग) क शिकार होब:</strong> जउं आप खुद सिगरेट नाहीं पीयति हउ, लेकिन सिगरेट या बीड़ी पीये वाले मनई के साथै खड़ा होत हउ, तौ आप ‘पैसिव स्मोकर’ हउ। सिगरेट क धुआं हवा के रस्ते तोहरे फेफड़न तक पहुँचत है अउर सीधे तौर पर लंग्स के काम करे क ताकत का कम करि देत है। ई अस्थमा अउर लंग कैंसर क खतरा भी बढ़ावत है।</p>
<p><strong>प्रदूषण मा रहब:</strong> हवा मा घुलत जहरीला धुआं, धूल-मिट्टी अउर पीएम 2.5 फेफड़न का बहुतै नुकसान पहुँचावत हैं। गाड़ी-मोटर क धुआं अउर फैक्टरी से निकरै वाला प्रदूषण फेफड़न की बीमारी क वजह बनि सकत है। अइसन ज्यादा प्रदूषण वाली जगहिन पर बिना मास्क के रहै से ई जहरीले कण हमार फेफड़न तक पहुँच जात हैं अउर ब्रोंकाइटिस जइसन समस्या पैदा करत हैं।</p>
<p><strong>घर के भीतर क प्रदूषण (इंडोर पॉल्यूशन):</strong> घर के भीतर क हवा भी गंदी होइ सकत है। तेज महक वाले रूम फ्रेशनर, मच्छर भगावै वाली कॉइल, अगरबत्ती, अउर खुशबूदार मोमबत्ती मा खतरनाक केमिकल होत हैं, जे हवा के साथै हमार फेफड़न मा पहुँचत हैं। एकरे अलावा, घर मा धूल-मिट्टी जमा होय से एलर्जी भी होइ सकत है। यहै मारे बंद कमरन मा घाम आवै देव अउर दिन मा ताजी हवा खातिर खिड़की खोल के रखव।</p>
<p><strong>मेहनत-मजूरी या कसरत न करब:</strong> एक्सरसाइज न करै या घंटन चुपचाप बैठे रहै से फेफड़न के काम करे क शक्ति कम होय लागत है। यहै मारे सीढ़ी चढ़ै मा या तनिकौ तेज चलै मा सांस फूलै लागत है। एक्सरसाइज करै से फेफड़े मजबूत बनत हैं अउर तोहार सेहत भी दुरुस्त रहत है।</p>
<p><strong>इनफेक्शन या एलर्जी का अनदेखा करब:</strong> बार-बार होय वाला जुखाम, खाँसी, कफ वगैरह का मामूली एलर्जी या सर्दी समझ के इग्नोर करब भारी पड़ि सकत है। ई फेफड़न से जुड़ी कौनों बड़ी बीमारी क संकेत होइ सकत है। समय पर इलाज न होय से ई समस्या अउर बढ़ि सकत है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सिर्फ स्मोकिंग ही नाहीं, आपकी लाइफस्टाइल भी पहुंचात अहै फेफड़न कय नुकसान</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%86/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Sep 2026 15:21:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[जबहियों फेफड़न सिय जुड़ल कवनो बीमारी कै बात होत अहै, अक्सर लोगन कै दिमागै मां स्मोकिंग इय आवत अहै। इ सच अहै कि स्मोकिंग कै कारन फेफड़न कय काफ़ी नुकसान पहुंचत अहै अउर इ कई सारी बीमारियन कै वजह भी अहै, पै इ एकलौता कारन नाहीं अहै। अगर आप स्मोक नाहीं करत, पै कुछ नुकसानदेह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="1024" height="589" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-26-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-26-1.jpg 1024w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-26-300x173.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-26-768x442.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px"></p>
<p>जबहियों फेफड़न सिय जुड़ल कवनो बीमारी कै बात होत अहै, अक्सर लोगन कै दिमागै मां स्मोकिंग इय आवत अहै। इ सच अहै कि स्मोकिंग कै कारन फेफड़न कय काफ़ी नुकसान पहुंचत अहै अउर इ कई सारी बीमारियन कै वजह भी अहै, पै इ एकलौता कारन नाहीं अहै। अगर आप स्मोक नाहीं करत, पै कुछ नुकसानदेह आदतैं आपकी लाइफस्टाइल कै हिस्सा अहैं, तौहौ आपके फेफड़न कय नुकसान होई सकत अहै। आवा जानैं कि ओन कौन-कौन सी आदतैं अहैं, जौन फेफड़न कय नुकसान पहुंचात हव।</p>
<p><strong>पैसिव स्मोकिंग कै शिकार होना</strong></p>
<p>अगर आप खुद स्मोक नाहीं करत, पै सिगरेट या बीड़ी पीवइ वाले लोगन कै साथे खड़ा होत अहैं, तौ आप पैसिव स्मोकर अहैं। सिगरेट कै धुआं हवा कै जरियै आपके फेफड़न तक पहुंचत अहै अउर सीधेतौर पर लंग्स कै काम करै कै क्षमता कय कम करत अहै अउर अस्थमा अउर लंग कैंसर कै जोखिम बढ़ावत अहै।</p>
<p><strong>प्रदूषण मां रहना</strong></p>
<p>हवा मां घुलत जहरीला धुआं, धूल-मिट्टी अउर पीएम 2.5 फेफड़न कय काफ़ी नुकसान पहुंचात हव। गाड़ियन कै धुआं अउर फैक्टरी सिय निकलत प्रदूषण फेफड़न कै बीमारी कै कारन बन सकत हव। अइसा ज्यादा प्रदूषण वाली जगहन पर बिना मास्क कै रहै सिय इ जहरीले कण हमार फेफड़न तक पहुंच जात हव अउर ब्रोंकाइटिस जैसी समस्या पैदा करत हव।</p>
<p><strong>इंडोर पॉल्यूशन कय नजरअंदाज करब</strong></p>
<p>घर कै अंदर कै हवा भी प्रदूषित होई सकत अहै। तेज गंध वाले रूम फ्रेशनर, मच्छर भगावइ वाली कॉइल, अगरबत्ती, खुशबूदार मोमबत्ती आदि मां हानिकारक केमिकल्स होत हव, जौन हवा कै जरियै हमार फेफड़न तक पहुंचत हव। इकै अलावा, घर मां धूल-मिट्टी जमा होय सिय एलर्जी भी होई सकत अहै। इहै मारे बंद कमरान मां धूप आवै दें अउर दिन मां ताजी हवा खर्तिन खिड़कियन खोलें।</p>
<p><strong>फिजिकली एक्टिव न रहब</strong></p>
<p>कसरत न करै या घंटा भर बैठै रहै सिय फेफड़न कै काम करै कै क्षमता कम होय लागत अहै। इहै मारे सीढ़ियां चढ़ै या थोड़ा सा तेज चलै सिय भी सांस फूलै लागत अहै। कसरत करै सिय फेफड़े मजबूत बनत हव अउर आपकी सेहत भी दुरुस्त रहत अहै।</p>
<p><strong>इन्फेक्शन या एलर्जी कय अनदेखा करब</strong></p>
<p>बार-बार होय वाले जुकाम, खांसी, कफ वगैरा कय मामूली एलर्जी या सर्दी समुझि कै इग्नोर करब भारी पड़ी सकत अहै। इ फेफड़न सिय जुड़ल कवनो गंभीर समस्या कै संकेत भी होई सकत अहै। इहै मारे समय पर इलाज न होय सिय इ समस्या अउर बढ़ि सकत अहै।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बार-बार आंख फड़के का न करं नजरअंदाज: होइ सकत अहै तनाव, थकान अउर नसों कय कमजोरी कय बड़ इशारा</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%96-%e0%a4%ab%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%82-%e0%a4%a8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 15:12:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[आंख फड़के के समस्या बहुत चिंता के बात तौ नइखे होत, पर जवन मनई कय ई बार-बार होत अहै, तौ उ ‘बिनाइन एसेंशियल ब्लेफेरोस्पाज्म’ (BEB) के वजह से होइ सकत अहै। कभौं-कभौं अइसन दुर्लभ मामला भी देखल गय अहै जहवां ई कवनो गंभीर बीमारी के इशारा होय। अइसन काहे होत अहै, एकर का लक्षण अहै, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="729" height="501" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-26.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-26.jpg 729w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/07/news-image-26-300x206.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/07/news-image-26-220x150.jpg 220w" sizes="auto, (max-width: 729px) 100vw, 729px"></p>
<p>आंख फड़के के समस्या बहुत चिंता के बात तौ नइखे होत, पर जवन मनई कय ई बार-बार होत अहै, तौ उ ‘बिनाइन एसेंशियल ब्लेफेरोस्पाज्म’ (BEB) के वजह से होइ सकत अहै। कभौं-कभौं अइसन दुर्लभ मामला भी देखल गय अहै जहवां ई कवनो गंभीर बीमारी के इशारा होय। अइसन काहे होत अहै, एकर का लक्षण अहै, अउर कब ई परेशानी कय रूप लइ लेत अहै, हम ई लेख में जानब।</p>
<p><strong>का अहै ई परेशानी?</strong><br />अचानक एक या दुनों पलक फड़के लगैत अहै। ई तौ सामान्य प्रक्रिया अहै, लेकिन जदि ई गंभीर भइ गय तौ आंख कय रोशनी कय ऊपर भी असर पड़ि सकत अहै। ई तौ कवनो के साथ भी होइ सकत अहै, लेकिन बीच उमर कय या बुजुर्ग मेहरारू लोगन कय ई समस्या जादा होत अहै।</p>
<p><strong>का अहै कारण?</strong><br />थकान, जादा कैफीन या तनाव एकर मुख्य वजह होइ सकत अहै। लगातार आंख फड़के कय परेशानी ‘बिनाइन एसेंशियल ब्लेफेरोस्पाज्म’ कहल जात अहै, जवने में दुनों आंख एकै समय फड़केत अहै। शोध में अबहीं तक एकर सही कारण तौ नइखे पता चल पाय, लेकिन आंख के अगल-बगल कय मांसपेशियन में गड़बड़ी भइै पर अइसन होइ सकत अहै। कछू लोगन में आनुवंशिक कारण (जेनेटिक्स) से भी आंख जादा फड़केत अहै।</p>
<p>कई बार दिमाग या नर्वस सिस्टम से जुड़ल ई परेशानी भी आंख फड़के के कारण बनत अहै:</p>
<p>• पार्किंसन्स रोग<br />• दिमाग में चोट या स्ट्रोक<br />• मानसिक स्वास्थ्य कय कवनो खास दवा<br />• मल्टीपल स्केलरोसिस<br />• बेल पाल्सी<br />• हेमिफेशियल स्पाज्म</p>
<p><strong>मैग्नीशियम कय कमी भी बन सकत अहै कारण</strong><br />आंख कय मांसपेशी में फड़फड़ाहट मैग्नीशियम कय कमी से भी होइ सकत अहै। खान-पान सही न होय या शरीर में पोषक तत्व ठीक से न सोखाय, तब भी ई समस्या होइ सकत अहै।</p>
<p><strong>इन्हन का अहै जादा खतरा:</strong><br />• सिर मा कवनो चोट लाग होय।<br />• जदि परिवार में कवनो का ई समस्या होय।<br />• जदि मानसिक स्वास्थ्य कय कवनो दवा चलत होय।</p>
<p><strong>अइसन दिखत अहै लक्षण:</strong><br />• आंख में जलन होय।<br />• बार-बार आंख झपके।<br />• रोशनी से तकलीफ (सेंसिटिविटी) होय।<br />• आंख सूखा लागय (ड्राई आइज)।<br />• लगातार आंख फड़के से देखे में दिक्कत होय।</p>
<p><strong>जदि आंख फड़के कय समस्या क्रोनिक होय:</strong><br />जदि आंख फड़के कय समस्या गंभीर भइै, तौ पलक अउर आंख कय आसपास कय हिस्सा कय हमेशा बर नुकसान होइ सकत अहै। अइसन परेशानी होइ सकत अहै:</p>
<p>• पलकें सामान्य से जादा नीचे लटक सकत अहै।<br />• भंव (आइब्रोज) सामान्य से जादा नीचे होइ सकत अहै।<br />• आंख के ऊपर या नीचे एक्स्ट्रा चमड़ी जमा होइ सकत अहै।<br />• पलकें अजीब ढंग से मुड़ सकत अहै।</p>
<p><strong>अइसन कर सकत अहैं बचाव:</strong><br />• कैफीन कम से कम लियं।<br />• नींद पूरी करं।<br />• तनाव से बचं।<br />• डॉक्टर कय सलाह पर आईड्रॉप कय इस्तेमाल करं।<br />• धूप में सनग्लास (धूप का चश्मा) लगाय के निकरं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>का घी खाय से कोलेस्ट्रॉल अउर वजन बढ़त अहै? जाना…</title>
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		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 15:12:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[आयुर्वेद कय ग्रंथन मां इलाज कय खातिर चार तरह कय चिकनाई वाला पदार्थ बतावा गवा अहै- घी, तेल, अउर जनावरन कय मांस अउर हड्डी कय मज्जा से निकरा वसा। जड़ी-बूटी अउर खाना कय गुण कय अपने मां समाए लिहैक अउर आपन मूल स्वभाव बनाय रखैक कय कारन घी कय सब चिकनाई वाले पदार्थन मां सबसे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="698" height="397" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-34.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-34.jpg 698w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/07/news-image-34-300x171.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 698px) 100vw, 698px"></p>
<p>आयुर्वेद कय ग्रंथन मां इलाज कय खातिर चार तरह कय चिकनाई वाला पदार्थ बतावा गवा अहै- घी, तेल, अउर जनावरन कय मांस अउर हड्डी कय मज्जा से निकरा वसा। जड़ी-बूटी अउर खाना कय गुण कय अपने मां समाए लिहैक अउर आपन मूल स्वभाव बनाय रखैक कय कारन घी कय सब चिकनाई वाले पदार्थन मां सबसे नीक मानि जात अहै।</p>
<p>डॉ. आर. वात्स्यायन (आयुर्वेदाचार्य, लुधियाना) बतावत अहैं कि संस्कृत मां एकय घृतम् अउर सर्पि कहा गवा अहै। सदियन से घी न खाली वैदिक पूजा-पाठ कय हिस्सा रहा अहै, बलकि भारतीय रसोई मां भी एकय बहुत बड़ स्थान मिला रहा अहै। गाय, भैंस कय दूध कय अलावा बकरी, ऊंट अउर घोड़ी कय दूध से बना घी कय इस्तेमाल आयुर्वेद इलाज मां कीन जाइ सकत अहै।</p>
<p><strong>गुणन से भरपूर होत अहै घी</strong></p>
<p>सुश्रुत घी कय खासियत बतावत लिखिन अहै कि इ स्वाद मां मीठा, सुभाव मां ठंडा अउर हल्का होत अहै। इ बिगड़ल वात अउर पित्त कय शांत करत अहै। आयुर्वेद कय जानकार एकय स्वादिष्ट, याददास्त बढ़ावे वाला, बुद्धिमानी, चमक अउर कोमलता बढ़ावे वाला बताइन अहै। आयुर्वेदिक ग्रंथन मां गाय कय घी कय शरीर कय सात ऊतकों- पाचन रस, रकत, मांस, वसा, हड्डी, मज्जा अउर प्रजनन ऊतक कय बढ़ावे वाला बतावा गवा अहै। एकय फुर्ती देवे वाला अउर कायाकल्प करे वाला तत्त्व मानि जात अहै।</p>
<p>घी पेट साफ करे वाला होत अहै अउर इ बहुतै बीमारी मां फायदेमंद साबित होत अहै, जइसे कि मिर्गी, पागलपन, केमिकल से भवा जहर, सिरदर्द (माइग्रेन) अउर शरीर कय बाहरी छिद्रन से जुड़ल बीमारी।</p>
<p><strong>असाध्य बीमारी कय खातिर काम कय औषधि</strong></p>
<p>घी कय इस्तेमाल बाहर अउर भीतर दूनों तरह कय औषधि कय रूप मां कीन जाइ सकत अहै। शास्त्रन मां घृत चिकित्सा कय जिक्र अहै, जवने मां अलग-अलग तरह कय घी से इलाज कीन जात अहै। एकय खातिर, चुनिंदा जड़ी-बूटियन कय काढ़ा शुद्ध घी मां पकावा जात अहै, जइसे कि ओकर असरदार तत्त्व घी मां मिलि जाँय।</p>
<p>घी कतई दिन पुराना अहै, ओकर आधार पर ओकर गुण मां अंतर होत अहै। एक साल पुराना घी बाहरी इस्तेमाल कय खातिर सबसे नीक मानि जात अहै। कुंभ घृत अउर महाघृत जवन कि 11 से 100 साल तक पुराना होत अहैं, कुछ गंभीर बीमारी मां रामबाण औषधि कय रूप मां इस्तेमाल कीन जात अहैं।</p>
<p>घी कय इस्तेमाल पंचकर्म कय पहिला चरण (तेल लगावे) मां कीन जात अहै। कमजोर मरीजान मां ओकर मालिश बहुतै असरदार होत अहै, काहे से कि इ शरीर कय पोषण देत अहै अउर खून कय बहाव सुधारे अहै। माइग्रेन, पुरानी साइनसाइटिस या एलर्जी वाली सांस कय दिक्कत मां 10-15 दिन तक नाक मां हल्का गुनगुना घी डारे से आराम मिलत अहै। अक्षितर्पण एक अउर पंचकर्म इलाज अहै, जवने मां आंख कय बीमारी खातिर आंख कय ताज़ा अउर पिघला घी मां कुछ मिनट तक डूबावा जात अहै।</p>
<p><strong>घी कय लेके भ्रम अउर राय</strong></p>
<p>मानव शरीर पर घी कय असर कय लेके आयुर्वेद अउर आधुनिक चिकित्सा मां काफी फरक अहै। पंचकर्म प्रक्रिया कय दौरान घी खाए कय बाद मरीज कय ट्राइग्लिसराइड स्तर गिरे कय रिपोर्ट मिलत अहै, फेर भी आम जनता कय मन मां घी कय सुरक्षित सेवन कय लेके बहुतै डर अहै। हालाँकि आयुर्वेद घी या कवनो भी चीज़ सीमित मात्रा मां लेवे कय जोर देत अहै, पर शरीर कय अलग-अलग सिस्टम पर घी कय सही अउर गलत असर कय पक्का जाने खातिर दूनों सिस्टम कय जानकारन कय एक साथ मिलिके रिसर्च करे कय जरुरत अहै।</p>
<p><strong>घी पर आधारित कुछ शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधियां:</strong></p>
<p>अर्जुन घृत- हृदय रोग<br />
पंचतिक्त घृत- सोरायसिस<br />
ब्रह्मी घृत एवं कल्याण घृत- मानसिक विकार<br />
त्रिफला घृत- नेत्र रोग<br />
शतावरी घृत- महिला रोग<br />
इंदुकांत घृत- पेट कय समस्या<br />
फल घृत- बांझपन अउर गर्भावस्था कय समस्या<br />
अश्वगंधा घृत- तंत्रिका तंत्र मजबूत करे खातिर</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सबइ खातिर फायदेमंद नाहीं अहैं चिया सीड्स: खाय से पहिले जरूर पढ़ि लेउ ई जरूरी बात</title>
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		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 15:11:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[चिया सीड्स सेहत बरे नीक तौ होत हैं, पर कुछ खास बेमारी मा एका खाय से सेहत बिगड़ि सकत है। जबै सुपरफूड्स क बात होत है, तौ चिया सीड्स क नांव सबसे पहिले आवा जात है। आजकल हर केहू एका अपनी डाइट मा सामिल करइ चाहत है। स्मूदी बाउल से लय के डिटॉक्स वाटर तक, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="672" height="491" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-22-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-22-1.jpg 672w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-22-300x219.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 672px) 100vw, 672px"></p>
<p><strong>चिया सीड्स सेहत बरे नीक तौ होत हैं, पर कुछ खास बेमारी मा एका खाय से सेहत बिगड़ि सकत है।</strong></p>
<p>जबै सुपरफूड्स क बात होत है, तौ चिया सीड्स क नांव सबसे पहिले आवा जात है। आजकल हर केहू एका अपनी डाइट मा सामिल करइ चाहत है। स्मूदी बाउल से लय के डिटॉक्स वाटर तक, मनई एका कईयौ तरीका से अपनी डाइट मा सामिल करत अहैं। ई सीड्स काफी पौष्टिक तौ होत ही हैं, पर ई जरूरी नाहीं कि ई सबके बरे फायदेमंद साबित होंइ। कुछ मनईन का चिया सीड्स नाहीं खाय के चाही या बहुतै सावधानी से अपनी डाइट मा सामिल करइ के चाही, नाहीं तौ नुकसान होय सकत है। आवा जानिन जाय एकरे बारे मा।</p>
<p><strong>पेट मा गैस या ब्लोटिंग क समस्या वाले मनई</strong><br />अगर आपकौ अक्सर गैस, ब्लोटिंग या पाचन से जुड़ी समस्या रहत है, तौ चिया सीड्स आपकौ नुकसान पहुँचाय सकत हैं। दरअसल, ई बीया पानी मा डारते ही फूल जात हैं, जेसे पेट क समस्या वाले मनईन मा ऐंठन या गैस क शिकायत होय सकत है। यहि बरे नीक ई है कि सुरु मा खाली आधा चम्मच से सुरु करिन जाय अउर देखिन जाय कि आपक पेट कइसन रिएक्ट करत है।</p>
<p><strong>ब्लड थिनर (खून पतला करै वाली दवा) लेइ वाले मनई</strong><br />जौन मनई खून पतला करै वाली दवाइयाँ लय रहे हैं, उनका चिया सीड्स या तौ बिल्कुल नाहीं खाय चाही या एकदम थोरै मात्रा मा खाय चाही। चिया सीड्स मा मौजूद ओमेगा-3 ई दवाइन क असर बेअसर कय सकत है, जेसे ब्लीडिंग क खतरा बढ़ि जात है।</p>
<p><strong>लो ब्लड प्रेशर क मरीज़</strong><br />चिया सीड्स मा अल्फा-लिनोलेनिक एसिड अउर पोटैशियम भरपूर मात्रा मा होत है, जौन ब्लड प्रेशर कम करै मा मदद करत है। अगर आपकौ पहिले से ही लो ब्लड प्रेशर क समस्या रहत है, तौ चिया सीड्स खायब आपके बरे नुकसानदेह होय सकत है। लो ब्लड प्रेशर वाले मरीजन मा एका खाय से चक्कर आवै जइसन परेशानी होय सकत है।</p>
<p><strong>किडनी क मरीज़</strong><br />चिया सीड्स मा पोटैशियम अउर फास्फोरस भरपूर मात्रा मा मौजूद होत है। किडनी क मरीजन बरे ई काफी नुकसानदेह होय सकत है। जब किडनी नीक से काम नाहीं करत, तब पोटैशियम अउर फास्फोरस किडनी मा जमा होय के पथरी (स्टोन्स) बनाय सकत हैं। यहि बरे किडनी क बेमारी से जूझ रहे मरीजन का चिया सीड्स खाय से बचै के चाही।</p>
<p><strong>एलर्जी से परेसान मनई</strong><br />अगर आपकौ सरसों, तिल या अलसी क बीया से एलर्जी है, तौ चिया सीड्स से भी आपकौ क्रॉस-रिएक्शन होय सकत है। जेकरे वजह से देही मा दाना (रैशेज), सांस लेइ मा तकलीफ अउर खुजली जइसन लच्छन देखाय दइ सकत हैं। यहि बरे अगर आपकौ इन बीया से एलर्जी है, तौ चिया सीड्स खाय से परहेज करिन।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>मंहगे डिटॉक्स ड्रिंक छोड़िए, सबेरे खाली पेट पिएं भीगी अंजीर कय पानी</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%b9%e0%a4%97%e0%a5%87-%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%89%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%95-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%a1/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Sep 2026 16:43:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[आजकाल लोगन हेल्दी लाइफस्टाइल अपनावैक बरे डाइट प्लान, योग, डिटॉक्स ड्रिंक अउर सुपरफूड्स कय अपनी दिनचर्या मां शामिल करत बाटेन। फेर कई बार हमन मंहगा अउर मुसकिल उपाय खोजत रहत ही, जबकि सेहत कय खजाना हमार रसोई मां ही मिल जात बा। भीगी हुई अंजीर कय पानी अइसई एक आसान, सस्ता अउर असरदार उपाय अहै, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="1002" height="573" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-16.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-16.jpg 1002w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-16-300x172.jpg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-16-768x439.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1002px) 100vw, 1002px"></p>
<p>आजकाल लोगन हेल्दी लाइफस्टाइल अपनावैक बरे डाइट प्लान, योग, डिटॉक्स ड्रिंक अउर सुपरफूड्स कय अपनी दिनचर्या मां शामिल करत बाटेन। फेर कई बार हमन मंहगा अउर मुसकिल उपाय खोजत रहत ही, जबकि सेहत कय खजाना हमार रसोई मां ही मिल जात बा। भीगी हुई अंजीर कय पानी अइसई एक आसान, सस्ता अउर असरदार उपाय अहै, जे शरीर का अंदर से पोषण देके हेल्दी लाइफस्टाइल का संतुलित बनाए रखत बा। आवा जानीं कइसे –</p>
<p><strong>सबेरे कय हेल्दी सुरुआत</strong><br />हेल्दी लाइफस्टाइल कय सुरुआत सबेरे से होत बा। जब आप सबेरे खाली पेट भीगी हुई अंजीर कय पानी पीत ही, तौ यह शरीर का धीरे-धीरे एनर्जी देत बा अउर पेट पय ज्यादा दबाव नाई डालत बा।</p>
<p><strong>पाचन तंत्र का सुधारत बा</strong><br />अंजीर मां घुलनशील फाइबर होत बाटेन, जउन आंतन का साफ करके कब्ज कय समस्या का दूर करत बाटेन। हेल्दी लाइफस्टाइल कय सबसे जरूरी हिस्सा अच्छा पाचन अहै, काहेकि पाचन सही रही तौ शरीर पोषक तत्वन का सही ढंग से सोधिहि।</p>
<p><strong>नेचुरल डिटॉक्स ड्रिंक</strong><br />हेल्दी लाइफस्टाइल मां डिटॉक्स बहुत महत्वपूर्ण मानि जात बा। भीगी अंजीर कय पानी शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालै मां मदद करत बा अउर लिवर का साफ रखै मां सहायक होत बा।</p>
<p><strong>वजन संतुलित रखै मां मदद</strong><br />यह ओवरईटिंग का रोकत बा अउर वजन का नियंत्रित रखै मां मदद करत बा। एहीसे यह वेट मैनेजमेंट डाइट कय भी हिस्सा बन सकत बा।</p>
<p><strong>हड्डियन अउर खून कय बरे फायदेमंद</strong><br />अंजीर मां कैल्शियम, आयरन, पोटैशियम अउर मैग्नीशियम नियर मिनरल्स होत बाटेन। एहीसे एकार पानी पियै से हड्डियां मजबूत होत बाटेन अउर शरीर मां खून कय कमी कय समस्या भी कम होत बा।</p>
<p><strong>त्वचा अउर बारन कय बरे जरूरी</strong><br />हेल्दी लाइफस्टाइल सिर्फ अंदर से नाई, बाहर से भी दिखै चाही। अंजीर कय पानी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होत बा, जउन त्वचा का ग्लोइंग बनावत बा अउर बारन का मजबूती देत बा।</p>
<p><strong>इम्युनिटी बढ़ावत बा</strong><br />बार-बार बीमार पड़ब इ बात कय संकेत अहै कि लाइफस्टाइल हेल्दी नाई बा। अंजीर कय पानी शरीर कय इम्युनिटी बढ़ावत बा, जेकर से शरीर बीमारियन से लड़ैक बरे मजबूत होत बा।</p>
<p><strong>अंजीर कय पानी का हेल्दी लाइफस्टाइल मां कइसे शामिल करें—</strong><br />राति मां 2–3 सूखी अंजीर एक गिलास पानी मां भिगोइ दीं। सबेरे खाली पेट सबसे पहिले इ पानी पिएं अउर बाद मां भीगी अंजीर खाइ लीं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>रोज पियौ विटामिन B12 कय कमी दूर करै वाले ई सबसे नीक घरेलू ड्रिंक्स</title>
		<link>https://upnewsonline.com/%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c-%e0%a4%aa%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8c-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a8-b12-%e0%a4%95%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%82/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 22 Sep 2026 16:32:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[शरीर का चंगा रखै बरे विटामिन B12 एक बहुतै जरूरी पोषक तत्व आय। ई देही मा खून बनावै, दिमाग अउर नसिन का दुरुस्त रखै अउर शरीर मा फुर्ती बनाय रखै मा मदद करत है। काहे से कि विटामिन B12 ज्यादातर एनिमल-बेस्ड (मांसाहारी) खाना मा मिलत है, यहि तरे शाकाहारी लोगन मा इकर कमी ढेर देखि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="777" height="429" src="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-8.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="https://upnewsonline.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-8.png 777w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-8-300x166.png 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/09/news-image-8-768x424.png 768w" sizes="auto, (max-width: 777px) 100vw, 777px"></p>
<p>शरीर का चंगा रखै बरे विटामिन B12 एक बहुतै जरूरी पोषक तत्व आय। ई देही मा खून बनावै, दिमाग अउर नसिन का दुरुस्त रखै अउर शरीर मा फुर्ती बनाय रखै मा मदद करत है।</p>
<p>काहे से कि विटामिन B12 ज्यादातर एनिमल-बेस्ड (मांसाहारी) खाना मा मिलत है, यहि तरे शाकाहारी लोगन मा इकर कमी ढेर देखि जात है। अइसन मा कुछ सेहतमंद ड्रिंक्स के सहारे इकर कमी का पूरा कीन जा सकत है।</p>
<p>तौ आवा जानित है शरीर मा विटामिन B12 कय कमी का पूरा करै वाले नीक ड्रिंक्स के बारे मा:</p>
<p><strong>दूध:</strong> दूध विटामिन B12 कय सबसे सहज अउर नीक जरिया आय। रोज सकारे या रात मा एक गिलास दूध पियै से B12 के साथै-साथै कैल्शियम अउर प्रोटीन भी मिलत है, जेहसे हड्डिन अउर नसिन मा जान आवत है।</p>
<p><strong>लस्सी:</strong> दही से बनी लस्सी सुवाद मा नीक होवै के साथै-साथै विटामिन B12 से भरी होत है, जेहसे हाजमा नीक रहत है अउर देही का ठंडक मिलत है।</p>
<p><strong>मट्ठा (छाछ):</strong> मट्ठा हलुक, पाचक अउर ताकती ड्रिंक आय। एमा मौजूद नीक बैक्टीरिया अउर विटामिन B12 पेट अउर शरीर दुइनौ का चंगा रखत हैं।</p>
<p><strong>फोर्टिफाइड सोया मिल्क:</strong> जे लोग दूध नाहीं पियत हैं, उनके बरे फोर्टिफाइड सोया मिल्क बहुतै नीक विकल्प आय। एमा विटामिन B12 अउर प्रोटीन दुइनौ मिलत है।</p>
<p><strong>फोर्टिफाइड ओट्स मिल्क:</strong> ओट्स मिल्क मा जब विटामिन B12 मिलावा जात है तौ ई बहुतै सेहतमंद ड्रिंक बन जात है। ई दिल बरे भी नीक होत है अउर शरीर का ताकत भी देत है।</p>
<p><strong>केला अउर पीनट बटर स्मूदी:</strong> दूध, केला अउर पीनट बटर से बनी स्मूदी बड़ी पौष्टिक होत है। दूध के नाते एमा विटामिन B12 मिलत है अउर ई वजन बढ़ावै या कमजोरी दूर करै मा भी काम आवत है।</p>
<p><strong>न्यूट्रिशनल यीस्ट ड्रिंक:</strong> न्यूट्रिशनल यीस्ट का पानी, सूप या स्मूदी मा मिलाय के पिय जा सकत है। ई विटामिन B12 कय नीक स्रोत आय, खास तौर पे शाकाहारी मनइन बरे।</p>
<p><strong>व्हे प्रोटीन ड्रिंक:</strong> व्हे प्रोटीन का दूध मा मिलाय के पियै से शरीर का प्रोटीन के साथै विटामिन B12 भी मिलत है। ई मांसपेसियन अउर ऊर्जा बरे बहुतै नीक रहत है।</p>
<p><strong>विटामिन B12 कय महत्व:</strong> विटामिन B12 देही मा लाल खून के कन (रेड ब्लड सेल्स) बनावै, नसिन कय सिस्टम दुरुस्त रखै, डीएनए बनावै, दिमाग तेज रखै अउर शरीर मा फुर्ती बनाय रखै बरे बहुतै जरूरी है। इकर कमी से एनीमिया, बहुतै थकावट, डिप्रेशन, भूलै कय बेमारी अउर नसिन से जुड़ी दिक्कतें होय सकत हैं, यहि नाते विटामिन B12 से भरी चीजन का रोज खाय-पियै का चाही।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>का घी खाय से कोलेस्ट्रॉल अउर वजन बढ़त अहै? जाना&#8230;</title>
		<link>https://upnewsonline.com/does-eating-ghee-increase-cholesterol-and-weight/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 17:07:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://rahasyalok.com/does-eating-ghee-increase-cholesterol-and-weight/</guid>

					<description><![CDATA[आयुर्वेद कय ग्रंथन मां इलाज कय खातिर चार तरह कय चिकनाई वाला पदार्थ बतावा गवा अहै- घी, तेल, अउर जनावरन कय मांस अउर हड्डी कय मज्जा से निकरा वसा। जड़ी-बूटी अउर खाना कय गुण कय अपने मां समाए लिहैक अउर आपन मूल स्वभाव बनाय रखैक कय कारन घी कय सब चिकनाई वाले पदार्थन मां सबसे &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आयुर्वेद कय ग्रंथन मां इलाज कय खातिर चार तरह कय चिकनाई वाला पदार्थ बतावा गवा अहै- घी, तेल, अउर जनावरन कय मांस अउर हड्डी कय मज्जा से निकरा वसा। जड़ी-बूटी अउर खाना कय गुण कय अपने मां समाए लिहैक अउर आपन मूल स्वभाव बनाय रखैक कय कारन घी कय सब चिकनाई वाले पदार्थन मां सबसे नीक मानि जात अहै।</p>
<p>डॉ. आर. वात्स्यायन (आयुर्वेदाचार्य, लुधियाना) बतावत अहैं कि संस्कृत मां एकय घृतम् अउर सर्पि कहा गवा अहै। सदियन से घी न खाली वैदिक पूजा-पाठ कय हिस्सा रहा अहै, बलकि भारतीय रसोई मां भी एकय बहुत बड़ स्थान मिला रहा अहै। गाय, भैंस कय दूध कय अलावा बकरी, ऊंट अउर घोड़ी कय दूध से बना घी कय इस्तेमाल आयुर्वेद इलाज मां कीन जाइ सकत अहै।</p>
<p><strong>गुणन से भरपूर होत अहै घी</strong></p>
<p>सुश्रुत घी कय खासियत बतावत लिखिन अहै कि इ स्वाद मां मीठा, सुभाव मां ठंडा अउर हल्का होत अहै। इ बिगड़ल वात अउर पित्त कय शांत करत अहै। आयुर्वेद कय जानकार एकय स्वादिष्ट, याददास्त बढ़ावे वाला, बुद्धिमानी, चमक अउर कोमलता बढ़ावे वाला बताइन अहै। आयुर्वेदिक ग्रंथन मां गाय कय घी कय शरीर कय सात ऊतकों- पाचन रस, रकत, मांस, वसा, हड्डी, मज्जा अउर प्रजनन ऊतक कय बढ़ावे वाला बतावा गवा अहै। एकय फुर्ती देवे वाला अउर कायाकल्प करे वाला तत्त्व मानि जात अहै।</p>
<p>घी पेट साफ करे वाला होत अहै अउर इ बहुतै बीमारी मां फायदेमंद साबित होत अहै, जइसे कि मिर्गी, पागलपन, केमिकल से भवा जहर, सिरदर्द (माइग्रेन) अउर शरीर कय बाहरी छिद्रन से जुड़ल बीमारी।</p>
<p><strong>असाध्य बीमारी कय खातिर काम कय औषधि</strong></p>
<p>घी कय इस्तेमाल बाहर अउर भीतर दूनों तरह कय औषधि कय रूप मां कीन जाइ सकत अहै। शास्त्रन मां घृत चिकित्सा कय जिक्र अहै, जवने मां अलग-अलग तरह कय घी से इलाज कीन जात अहै। एकय खातिर, चुनिंदा जड़ी-बूटियन कय काढ़ा शुद्ध घी मां पकावा जात अहै, जइसे कि ओकर असरदार तत्त्व घी मां मिलि जाँय।</p>
<p>घी कतई दिन पुराना अहै, ओकर आधार पर ओकर गुण मां अंतर होत अहै। एक साल पुराना घी बाहरी इस्तेमाल कय खातिर सबसे नीक मानि जात अहै। कुंभ घृत अउर महाघृत जवन कि 11 से 100 साल तक पुराना होत अहैं, कुछ गंभीर बीमारी मां रामबाण औषधि कय रूप मां इस्तेमाल कीन जात अहैं।</p>
<p>घी कय इस्तेमाल पंचकर्म कय पहिला चरण (तेल लगावे) मां कीन जात अहै। कमजोर मरीजान मां ओकर मालिश बहुतै असरदार होत अहै, काहे से कि इ शरीर कय पोषण देत अहै अउर खून कय बहाव सुधारे अहै। माइग्रेन, पुरानी साइनसाइटिस या एलर्जी वाली सांस कय दिक्कत मां 10-15 दिन तक नाक मां हल्का गुनगुना घी डारे से आराम मिलत अहै। अक्षितर्पण एक अउर पंचकर्म इलाज अहै, जवने मां आंख कय बीमारी खातिर आंख कय ताज़ा अउर पिघला घी मां कुछ मिनट तक डूबावा जात अहै।</p>
<p><strong>घी कय लेके भ्रम अउर राय</strong></p>
<p>मानव शरीर पर घी कय असर कय लेके आयुर्वेद अउर आधुनिक चिकित्सा मां काफी फरक अहै। पंचकर्म प्रक्रिया कय दौरान घी खाए कय बाद मरीज कय ट्राइग्लिसराइड स्तर गिरे कय रिपोर्ट मिलत अहै, फेर भी आम जनता कय मन मां घी कय सुरक्षित सेवन कय लेके बहुतै डर अहै। हालाँकि आयुर्वेद घी या कवनो भी चीज़ सीमित मात्रा मां लेवे कय जोर देत अहै, पर शरीर कय अलग-अलग सिस्टम पर घी कय सही अउर गलत असर कय पक्का जाने खातिर दूनों सिस्टम कय जानकारन कय एक साथ मिलिके रिसर्च करे कय जरुरत अहै।</p>
<p><strong>घी पर आधारित कुछ शास्त्रीय आयुर्वेदिक औषधियां:</strong></p>
<p>अर्जुन घृत- हृदय रोग<br />
पंचतिक्त घृत- सोरायसिस<br />
ब्रह्मी घृत एवं कल्याण घृत- मानसिक विकार<br />
त्रिफला घृत- नेत्र रोग<br />
शतावरी घृत- महिला रोग<br />
इंदुकांत घृत- पेट कय समस्या<br />
फल घृत- बांझपन अउर गर्भावस्था कय समस्या<br />
अश्वगंधा घृत- तंत्रिका तंत्र मजबूत करे खातिर</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बार-बार आंख फड़के का न करं नजरअंदाज: होइ सकत अहै तनाव, थकान अउर नसों कय कमजोरी कय बड़ इशारा</title>
		<link>https://upnewsonline.com/eye-twitching-causes-symptoms-remedies-awadhi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 17:06:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[आंख फड़के के समस्या बहुत चिंता के बात तौ नइखे होत, पर जवन मनई कय ई बार-बार होत अहै, तौ उ &#8216;बिनाइन एसेंशियल ब्लेफेरोस्पाज्म&#8217; (BEB) के वजह से होइ सकत अहै। कभौं-कभौं अइसन दुर्लभ मामला भी देखल गय अहै जहवां ई कवनो गंभीर बीमारी के इशारा होय। अइसन काहे होत अहै, एकर का लक्षण अहै, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आंख फड़के के समस्या बहुत चिंता के बात तौ नइखे होत, पर जवन मनई कय ई बार-बार होत अहै, तौ उ &#8216;बिनाइन एसेंशियल ब्लेफेरोस्पाज्म&#8217; (BEB) के वजह से होइ सकत अहै। कभौं-कभौं अइसन दुर्लभ मामला भी देखल गय अहै जहवां ई कवनो गंभीर बीमारी के इशारा होय। अइसन काहे होत अहै, एकर का लक्षण अहै, अउर कब ई परेशानी कय रूप लइ लेत अहै, हम ई लेख में जानब।</p>
<p><strong>का अहै ई परेशानी?</strong><br />अचानक एक या दुनों पलक फड़के लगैत अहै। ई तौ सामान्य प्रक्रिया अहै, लेकिन जदि ई गंभीर भइ गय तौ आंख कय रोशनी कय ऊपर भी असर पड़ि सकत अहै। ई तौ कवनो के साथ भी होइ सकत अहै, लेकिन बीच उमर कय या बुजुर्ग मेहरारू लोगन कय ई समस्या जादा होत अहै।</p>
<p><strong>का अहै कारण?</strong><br />थकान, जादा कैफीन या तनाव एकर मुख्य वजह होइ सकत अहै। लगातार आंख फड़के कय परेशानी &#8216;बिनाइन एसेंशियल ब्लेफेरोस्पाज्म&#8217; कहल जात अहै, जवने में दुनों आंख एकै समय फड़केत अहै। शोध में अबहीं तक एकर सही कारण तौ नइखे पता चल पाय, लेकिन आंख के अगल-बगल कय मांसपेशियन में गड़बड़ी भइै पर अइसन होइ सकत अहै। कछू लोगन में आनुवंशिक कारण (जेनेटिक्स) से भी आंख जादा फड़केत अहै।</p>
<p>कई बार दिमाग या नर्वस सिस्टम से जुड़ल ई परेशानी भी आंख फड़के के कारण बनत अहै:</p>
<p>• पार्किंसन्स रोग<br />• दिमाग में चोट या स्ट्रोक<br />• मानसिक स्वास्थ्य कय कवनो खास दवा<br />• मल्टीपल स्केलरोसिस<br />• बेल पाल्सी<br />• हेमिफेशियल स्पाज्म</p>
<p><strong>मैग्नीशियम कय कमी भी बन सकत अहै कारण</strong><br />आंख कय मांसपेशी में फड़फड़ाहट मैग्नीशियम कय कमी से भी होइ सकत अहै। खान-पान सही न होय या शरीर में पोषक तत्व ठीक से न सोखाय, तब भी ई समस्या होइ सकत अहै।</p>
<p><strong>इन्हन का अहै जादा खतरा:</strong><br />• सिर मा कवनो चोट लाग होय।<br />• जदि परिवार में कवनो का ई समस्या होय।<br />• जदि मानसिक स्वास्थ्य कय कवनो दवा चलत होय।</p>
<p><strong>अइसन दिखत अहै लक्षण:</strong><br />• आंख में जलन होय।<br />• बार-बार आंख झपके।<br />• रोशनी से तकलीफ (सेंसिटिविटी) होय।<br />• आंख सूखा लागय (ड्राई आइज)।<br />• लगातार आंख फड़के से देखे में दिक्कत होय।</p>
<p><strong>जदि आंख फड़के कय समस्या क्रोनिक होय:</strong><br />जदि आंख फड़के कय समस्या गंभीर भइै, तौ पलक अउर आंख कय आसपास कय हिस्सा कय हमेशा बर नुकसान होइ सकत अहै। अइसन परेशानी होइ सकत अहै:</p>
<p>• पलकें सामान्य से जादा नीचे लटक सकत अहै।<br />• भंव (आइब्रोज) सामान्य से जादा नीचे होइ सकत अहै।<br />• आंख के ऊपर या नीचे एक्स्ट्रा चमड़ी जमा होइ सकत अहै।<br />• पलकें अजीब ढंग से मुड़ सकत अहै।</p>
<p><strong>अइसन कर सकत अहैं बचाव:</strong><br />• कैफीन कम से कम लियं।<br />• नींद पूरी करं।<br />• तनाव से बचं।<br />• डॉक्टर कय सलाह पर आईड्रॉप कय इस्तेमाल करं।<br />• धूप में सनग्लास (धूप का चश्मा) लगाय के निकरं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>डिजिटल बर्नआउट छीनत अहै काम करय वाला मनई कय सुकून</title>
		<link>https://upnewsonline.com/digital-burnout-chheen-raha-hai-working-professionals-ka-sukoon/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 17:04:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[आज कय डिजिटल दुनिया मां लोग एक-दूसर से बहुत ज्यादा जुड़ि गय अहैं। सोशल मीडिया पर पल-पल कय अपडेट दिहब, घंटा-घंटा लैपटॉप कय सामनें बैठब या छुुट्टी कय दिन आपन मनपसंद फिल्म या सीरीज देखब, अइसन कई कारण अहैं जवन हमका आदतन डिजिटल दुनिया मां जोड़े रखत अहै। अइसन हर बखत मौजूद रहब आगे चलिके &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज कय डिजिटल दुनिया मां लोग एक-दूसर से बहुत ज्यादा जुड़ि गय अहैं। सोशल मीडिया पर पल-पल कय अपडेट दिहब, घंटा-घंटा लैपटॉप कय सामनें बैठब या छुुट्टी कय दिन आपन मनपसंद फिल्म या सीरीज देखब, अइसन कई कारण अहैं जवन हमका आदतन डिजिटल दुनिया मां जोड़े रखत अहै। अइसन हर बखत मौजूद रहब आगे चलिके हमार मानसिक सेहत (मेंटल हेल्थ) पर भारी पड़त अहै। अइसन एहसे होत अहै काहे से जहंवा दिन भर कय भागदौड़ से लोग बर्नआउट होत अहैं, त वहीं स्क्रीन टाइम जादा होय से लोग डिजिटली भी बर्नआउट होत अहैं, जवने कय बारे मां बहुत कम लोग जानत अहैं।</p>
<p><strong>डिजिटल बर्नआउट का अहै?</strong> बर्नआउट कय मतलब होय अहै कवनो काम कय लगातार अउर बहुत लमहर समय तक करत रहब। अइसन मां कवनो व्यक्ति आपन काम से ऊब सकत अहै, लेकिन डिजिटल बर्नआउट कय सीधा नाता स्क्रीन टाइम से अहै। अब सवाल इ अहै कि कइसन पता चलै कि कवनो मनई डिजिटल बर्नआउट कय शिकार अहै? त एकका पहिचानय कय कई लक्षण अहैं, चलव ओकर बारे मां जानत अहीं।</p>
<p><strong>डिजिटल बर्नआउट कय संकेत:</strong> डिजिटल बर्नआउट का एक-दू नाहीं बल्कि कई संकेतों से पता लगावा जाइ सकत अहै:</p>
<p>काम मां रुचि खतम होय जाय, डिप्रेशन, नींद न आवै, शरीर अउर मन कय थकान, एंग्जायटी, छाती मां दरद कय शिकायत, इमोशनल अस्थिरता, आंख सूखै, सिर, गर्दन या कंधा मां दरद, फोकस कय कमी अउर चिड़चिड़ापन।</p>
<p><strong>डिजिटल बर्नआउट से कइसन निकरब?</strong> डिजिटल बर्नआउट से निकरय अउर फेर से शरीर अउर मन मां फुर्ती पावै खतिर एक कड़ा रूटीन (दिनचर्या) कय बहुत जरूरत अहै, जवने मां स्क्रीन टाइम बिल्कुल नाहीं होय चाही। स्क्रीन टाइम बहुत कम करैं, खास कय छुट्टी कय दिन स्क्रीन देखै से बचैं अउर बाकी दिन मां हर थोड़ा समय पर स्क्रीन कय सामनें से ब्रेक लेत रहैं।</p>
<p><strong>20-20-20 रूल</strong> अपनावैं, एकर मतलब इ अहै कि 20 मिनट मां 20 सेकंड कय ब्रेक लें अउर 20 फीट दूर राखि कवनो चीज कय तरफ देखैं। अगर आप पूरी तरेह से स्क्रीन टाइम खतम नाहीं करि सकत त पूरा हफ्ता मां एक दिन स्क्रीन से दूरी बनावै कय तय करैं। माइंडफुलनेस कय अभ्यास से डिजिटल बर्नआउट से बाहर आवै कय रास्ता मिल सकत अहै। एकरे खतिर डेली रूटीन मां &#8216;डीप ब्रीदिंग&#8217; (गहरी सांस लेय कय) एक्सरसाइज शामिल करैं। रोजाना एक्सरसाइज करैं से शारीरिक अउर मानसिक सेहत ठीक रहत अहै। एकरे खतिर रोज 15-20 मिनट कय टहलना (वॉक) भी जादू जइसन काम कर सकत अहै।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बरसात मां बंद कमरा अउर भीड़ बढ़ाय सकत हय इन्फेक्शन कै खतरा</title>
		<link>https://upnewsonline.com/barish-mein-band-kamre-aur-bheed-se-badh-sakte-hain-infection-ka-khatra/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 17:02:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[बरसात कै मौसम भयंकर गर्मी से तौ राहत जरूर दिवाय देत हय, पै इकरे साथ-साथ इ सांस से जुड़ै इन्फेक्शन खातिर भारी खतरा भी लइ आवत हय। वातावरण मां बढ़ी भई नमी, घटत-बढ़त तापमान, जहवा-तहवा पानी कै भराव अउर लोगन कै भीड़-भाड़ मां रहब बैक्टीरिया, वायरस अउर फंगस का पनपै अउर फैलै कै मौका देत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>बरसात कै मौसम भयंकर गर्मी से तौ राहत जरूर दिवाय देत हय, पै इकरे साथ-साथ इ सांस से जुड़ै इन्फेक्शन खातिर भारी खतरा भी लइ आवत हय। वातावरण मां बढ़ी भई नमी, घटत-बढ़त तापमान, जहवा-तहवा पानी कै भराव अउर लोगन कै भीड़-भाड़ मां रहब बैक्टीरिया, वायरस अउर फंगस का पनपै अउर फैलै कै मौका देत हय। इहे कारन अहै कि सामान्य सर्दी-जुकाम, इन्फ्लुएंजा, ब्रोंकाइटिस अउर निमोनिया लोगन मां आम होइ जात हय। कुछ लोगन कै शरीर तौ इन बीमारियन खातिर बहुतै संवेदनशील (सेंसिटिव) होत हय। इहां पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट, मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, साकेत से <strong>डॉ. विवेक नांगिया</strong> बतावत अहैं कि केहिका बरसात मां सांस से जुड़ै इन्फेक्शन कै जियादा खतरा रहत हय।</p>
<p><strong>बरसात मां केहिका रहत हय सांस से जुड़ै इन्फेक्शन कै जियादा खतरा?</strong></p>
<p>डॉ. विवेक नांगिया कहत अहैं कि लरिकन, बुजुर्गन, गर्भवती मेहरारू अउर फेफड़ा कै समस्या जइसन COPD, अस्थमा या ब्रोंकाइटिस पहिले से झेलत लोग बरसात कै मौसम मां इन्फेक्शन के प्रति जियादा संवेदनशील होत अहैं। इकरे अलावा, जउन लोगन का डायबिटीज, दिल या किडनी से जुड़ै बीमारी, कैंसर अउर जउन केउ इम्यूनोसप्रेसिव थेरेपी लइ रहल अहैं, ओनका भी इन्फेक्शन कै जियादा खतरा रहत हय। स्मोकिंग अउर हवा कै प्रदूषण (एयर पलूशन) के संपर्क मां आय से फेफड़ा कमजोर होइ जात हय अउर इकरे से भी लोग इन्फेक्शन कै चपेट मां जियादा जल्दी आ जात अहैं।</p>
<p><strong>बचाव खातिर का करैं?</strong></p>
<p>कुछ आसान तरीका अपनाय के सांस से जुड़ै इन्फेक्शन कै खतरा कम कीन जाइ सकत हय, जेकरे बारे मां डॉ. विवेक नांगिया इहां बतावत अहैं:</p>
<ul>
<li>बराबर हाथ धोवत रहैं।</li>
<li>बीमार व्यक्ति से नजदीक संपर्क मां न आवैं।</li>
<li>भीड़भाड़ मां जात बखत मास्क पहिनैं।</li>
<li>घर कै भीतर हवा-पानी कै निक रास्ता (वेंटिलेशन) रखैं।</li>
<li>पूरा नींद लियैं।</li>
<li>हेल्दी खाना खायें।</li>
<li>पानी पियत रहैं अउर शरीर का हाइड्रेटेड रखैं।</li>
<li>अस्थमा या COPD कै मरीज रेगुलर इनहेलर लियैं अउर रेस्क्यू मेडिसिन तैयार रखैं।</li>
<li>सीजनल अउर निमोनिया कै वैक्सीनेशन लगवायें (जउन लोगन का खतरा जियादा अहै)।</li>
</ul>
<p>मॉनसून मां होइ वाल जियादातर इन्फेक्शन वायरल होत अहैं अउर अइसन केस मां एंटीबायोटिक काम नाहीं करत हय। वइहीं, बिना बात या बिना सोचे-समझे एंटीबायोटिक लीन जाइ तौ इ एंटीमाइक्रोबियल बन जात हय, जेसे भविष्य मां होइ वाल इन्फेक्शन से लड़ै मां शरीर का दिक्कत होत हय। एक्सपर्ट सलाह देत अहैं कि दवा हमेशा डॉक्टर से बात कइके ही लियै का चाही। उनकर मानब अहै कि समय रहत बरती गई सावधानी कउनो गंभीर बीमारी का रोक सकत हय अउर अस्पताल जाय से बचाय सकत हय।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अउरतियन मां अल्जाइमर कय खतरा मरदियन से जादा काहे अहै? जानि लीं</title>
		<link>https://upnewsonline.com/why-do-women-have-higher-risk-of-alzheimers-than-men/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Jul 2026 17:00:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://rahasyalok.com/why-do-women-have-higher-risk-of-alzheimers-than-men/</guid>

					<description><![CDATA[का रउआ जानत अहा कि दुनिया भर मां अल्जाइमर से पीड़ित मरीजिन में से दुई-तिहाई अउरतियन अहैं? जी हां, ई आंकड़ा अचंभित करय वाला अहै, पै साथ ही जागरूक करय वाला भी। मरदियन कय तुलना मां अउरतियन मां भूले कय बीमारी होय कय खतरा जादा होत अहै। एहसे जरूरी अहै कि 40 साल कय उम्र &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>का रउआ जानत अहा कि दुनिया भर मां अल्जाइमर से पीड़ित मरीजिन में से दुई-तिहाई अउरतियन अहैं? जी हां, ई आंकड़ा अचंभित करय वाला अहै, पै साथ ही जागरूक करय वाला भी। मरदियन कय तुलना मां अउरतियन मां भूले कय बीमारी होय कय खतरा जादा होत अहै। एहसे जरूरी अहै कि 40 साल कय उम्र के बाद हर अउरत अपने दिमाग कय सेहत कय लेके जादा सचेत रहै। अब सवाल ई आवत अहै कि अउरतियन मां ई बीमारी कय खतरा जादा काहे होत अहै, तव एकर पीछे एक नाहीं, कई कारण अहैं। आवा जानित अहैं कि ई सब काहे होत अहै अउर रउआ अपने दिमाग कय ख्याल कइसे रखि सकत अहा।</p>
<p><strong>काहे अउरतियन अल्जाइमर कय शिकार जादा होत अहैं?</strong></p>
<p>अल्जाइमर आमतौर पर ढलती उम्र कय एक बीमारी अहै, जवन उम्र बढ़य के साथ अपना लक्षण देखावै कय सुरु करत अहै। एहसे ई सवाल कय एक जवाब ई होइ सकत अहै कि काहेकि अउरतियन मरदियन से जादा दिन जिअत अहैं, एहसे ऊ अल्जाइमर कय शिकार भी जादा होत अहैं। हालाँकि, ई सवाल कय सही जवाब इतना आसान नाहीं अहै। एकर खातिर रउआ अउरतियन कय बायोलॉजी कय समझे कय पड़ी।</p>
<p><strong>एस्ट्रोजन हार्मोन अहै दिमाग कय सुरक्षा कवच</strong></p>
<p>फीमेल रिप्रोडक्टिव हार्मोन एस्ट्रोजन, जवन मेनोपॉज (महावारी रुकय) के पहले तक अउरतियन कय शरीर मां जादा मात्रा मां पावा जात अहै, दिमाग खातिर एक सुरक्षा कवच कय तरह काम करत अहै। ई हार्मोन दिमाग कय सेल्स कय डैमेज होय से बचावत अहै, पै मेनोपॉज के बाद शरीर मां ई हार्मोन बहुत तेजी से कम होत अहै। एस्ट्रोजन कम होय कय वजह से अभी तक हम खाली नींद, मूड अउर दिल के बारे मां बात करत रहेन, पै एकर असर हमार दिमाग कय सेहत पर भी पड़त अहै। एस्ट्रोजन कम होय से दिमाग कय खुद कय रक्षा करय कय छमता कम होय लागत अहै। एहसे मेनोपॉज के बाद अउरतियन मां अल्जाइमर कय रिस्क बढ़े लागत अहै।</p>
<p><strong>जेनेटिक्स भी अहै बड़ खतरा</strong></p>
<p>एक खास जीन कय अल्जाइमर से जोड़ि के देखा जात अहै। कई रिसर्च मां ई साबित होइ चुका अहै कि जिन लोगन मां APOE जीन पावा जात अहै, उन मां अल्जाइमर कय रिस्क जादा होत अहै। हालाँकि, अचंभित करय वाली बात ई अहै कि जिन अउरतियन मां ई जीन वेरिएंट पावा जात अहै, उन मां ई बीमारी कय खतरा, ओही जीन वाले मरद कय तुलना मां काफी जादा होत अहै।</p>
<p><strong>कब होत अहै खतरा कय सुरुआत?</strong></p>
<p>अल्जाइमर दिमाग मां हानिकारक प्रोटीन जमा होय कय वजह से होत अहै। मेनोपॉज कय दौरान दिमाग कय ग्लूकोज इस्तेमाल करय कय छमता कम होय लागत अहै। एह वजह से एनर्जी सप्लाई घट जात अहै अउर दिमाग अल्जाइमर कय कारण बनय वाले हानिकारक प्रोटीन कय बाहर नाहीं निकाल पावत। सुरुआत मां एकर पता नाहीं चलत, पै धीरे-धीरे ई समस्या बढ़य लागत अहै अउर अल्जाइमर कय रूप लइ लेत अहै।</p>
<p><strong>बचाव खातिर का कइ सकत अहैं?</strong></p>
<p>जेनेटिक्स अउर शरीर कय नेचुरल मेनोपॉज कय प्रोसेस कय बदला नाहीं जाइ सकत, पै अपने दिमाग कय सेहत कय ख्याल जरूर रखा जाइ सकत अहै। एक स्टडी मां भी साबित होइ चुका अहै कि लाइफस्टाइल मां बदलाव कइके अल्जाइमर कय खतरा कय कम कीन जाइ सकत अहै। दिमाग कय एक्टिव रखय खातिर कउनो नई हॉबी अपनाईं या कउनो नया स्किल सीखिए। एकर साथ-साथ अपनी नींद, डाइट, एक्सरसाइज अउर फिजिकल एक्टिविटीज कय भी पूरा ध्यान रखीं। रोजाना 8 घंटा कय नींद जरूर लीं। नींद से कउनो भी तरह कय समझौता दिमाग कय सेहत कय सीधा नुकसान पहुँचावत अहै। अइसने एक्सरसाइज न करब या फिजिकली एक्टिव न रहय से भी दिमाग पर असर पड़त अहै। एहसे रोज आधा घंटा एक्सरसाइज करीं अउर एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाईं। इन बातन कय साथ-साथ स्ट्रेस मैनेजमेंट पर भी ध्यान देब काफी जरूरी अहै अउर स्मोकिंग अउर दारू पीयय जैसी आदतन से भी परहेज करीं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नींद कय कमी स कमजोर होय लाग अहै दिमाग कय ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’</title>
		<link>https://upnewsonline.com/neend-ki-kami-se-kamzor-ho-raha-dimag-ka-blood-brain-barrier-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 07:07:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://rahasyalok.com/neend-ki-kami-se-kamzor-ho-raha-dimag-ka-blood-brain-barrier-2/</guid>

					<description><![CDATA[हम सब जानत अही कि अच्छी सेहत खतिव एक सुकून भरी नींद लेब कतई जरूरी अहै, पै का रउआ जानत अही कि ठीक स न सोइ पाब रउआ दिमाग कय कतई गहराई तक नुकसान पहुंचा सकत अहै? हाल ही में भवा एक अध्ययन में ई चौंकै वाला खुलासा भवा अहै कि नींद में बार-बार खलल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हम सब जानत अही कि अच्छी सेहत खतिव एक सुकून भरी नींद लेब कतई जरूरी अहै, पै का रउआ जानत अही कि ठीक स न सोइ पाब रउआ दिमाग कय कतई गहराई तक नुकसान पहुंचा सकत अहै? हाल ही में भवा एक अध्ययन में ई चौंकै वाला खुलासा भवा अहै कि नींद में बार-बार खलल पड़ब स हमार दिमाग कय ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ कय भारी नुकसान पहुंचत अहै। आवैं आसान भाषा में समझत अही कि ई रिसर्च का कहत अहै।</p>
<p><strong>दिमाग कय ‘सिक्योरिटी गार्ड’ अहै ब्लड-ब्रेन बैरियर</strong></p>
<p>‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ कय रउआ अपने दिमाग कय एक बहुत चुस्त सिक्योरिटी गार्ड या एक खास फिल्टर मान सकत अही। ई दिमाग कय रक्त वाहिका कय चारों ओर कोशिका कय एक परत होत अहै। एकर काम का अहै? ई बहुत ही चुनिंदा चीज कय ही अंदर जाइ देत अहै। ई दिमाग तक जरूरी ऑक्सीजन अव पोषक तत्व तौ पहुंचात अहै, पै खतरनाक बैक्टीरिया, विषैले पदार्थ अव ज्यादातर दवाई कय बाहर ही रोक देत अहै। इहइ तरे ई हमार दिमाग कय गंभीर नुकसान स बचात अहै।</p>
<p><strong>नींद में खलल पड़ब स का असर होत अहै?</strong></p>
<p>‘लैबमेड डिस्कवरी’ पत्रिका में छपा एक स्टडी कय मुताबिक, जब हमार नींद पूरी नाहीं होत या ओहमें बाधा आवत अहै, तौ ई बैरियर कय नुकसान पहुंचत अहै। शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी कय शोधकर्ता बतइहिन अहै कि ई बैरियर कय डैमेज होब कय सीधा संबंध हमार सोचे-समझै कय क्षमता में कमी स अहै। एकर कारन अल्जाइमर जइसन बीमारी अव दिमाग कय नस कय प्रभावित करै वाली कई अउर समस्या पैदा होय सकत अहै।</p>
<p><strong>कइसै कमजोर पड़त अहै ई बैरियर?</strong></p>
<p>शोधकर्ता बतइहिन कि जब ब्लड-ब्रेन बैरियर कय नुकसान पहुंचत अहै, तौ दुइ मुख्य परेशानी होत अहै:</p>
<p><strong>बढ़ी हुई पारगम्यता:</strong> कोशिका कय बीच कय जगह स पानी, आयन अव छोट अणु कय आवाजाही जरूरत स ज्यादा बढ़ि जात अहै।</p>
<p><strong>सफाई में रुकावट:</strong> दिमाग स बेकार पदार्थ कय बाहर निकालै कय प्रक्रिया में बाधा आवत अहै।</p>
<p>ई नुकसान कय पीछे मुख्य रूप स ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, न्यूरोइन्फ्लेमेशन अव आंत कय माइक्रोबायोम कय असंतुलन जइसन कारन सामिल पावा गवा अहै।</p>
<p><strong>सोवै-जागै कय बिगड़ल चक्र भी अहै जिम्मेदार</strong></p>
<p>हमार शरीर कय एक अपनी घड़ी होत अहै, जेकय सर्केडियन रिदम कहत अही। जब सोवै अव जागै कय ई प्राकृतिक चक्र कय तालमेल बिगड़ि जात अहै, तौ ई भी ब्लड-ब्रेन बैरियर कय तोड़ै कय काम करत अहै। एकर अलावा, नींद स जुड़ल एक खास बीमारी- ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया कय कारन भी ई बैरियर कय नुकसान पहुंचै कय प्रमाण मिला अहै।</p>
<p><strong>याददाश्त पर सीधा असर</strong></p>
<p>दिमाग कय उ हिस्सा जवन हमार याददाश्त स जुड़ल होत अहै, ओकय ‘हिप्पोकैंपस’ कहत अही। अध्ययन में ई बात सामने आई अहै कि अगर हिप्पोकैंपस में ब्लड-ब्रेन बैरियर टूटत अहै, तौ ई साफ तौर पर हमार याद रखै अव सोचे-समझै कय क्षमता में कमी कय संकेत होय सकत अहै।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>9 से 5 कय डेस्क जॉब से अकड़ गै अहै कमर? अपनी कुर्सी पर बइठिके करीं ई योगासन</title>
		<link>https://upnewsonline.com/desk-job-back-pain-yoga-at-chair/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 07:06:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[आज के समय मां 9-5 वाली डेस्क जॉब हमरी जिंदगी कय हिस्सा बनि गै अहै। चाहे आप ऑफिस जात होइत हो या घर से काम करत होइत, लगातार 7-8 घंटा कुर्सी पर बइठे रहब सीधा हमरी सेहत पर असर करत अहै। गलत पोस्चर अउर शारीरिक मेहनत कय कमी कै वजह से पीठ, कमर अउर कंधन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज के समय मां 9-5 वाली डेस्क जॉब हमरी जिंदगी कय हिस्सा बनि गै अहै। चाहे आप ऑफिस जात होइत हो या घर से काम करत होइत, लगातार 7-8 घंटा कुर्सी पर बइठे रहब सीधा हमरी सेहत पर असर करत अहै। गलत पोस्चर अउर शारीरिक मेहनत कय कमी कै वजह से पीठ, कमर अउर कंधन मां दरद होब आम बात बनि गै अहै। इ हालत मां जिम या एक्सरसाइज करे कय साथ-साथ काम कय बीच मां छोट-छोट ब्रेक लइके कुछ आसान योगासन अपनी कुर्सी पर बइठिके कय करब बहुत फायदेमंद साबित होइ सकत अहै। आइए जानीं इन योगासनन कय बारे मां।</p>
<p><strong>चेयर कैट-काउ पोज</strong>: ई आसन रीढ़ कय हड्डी कय लचक बढ़ावे अउर पीठ कय निचला हिस्सा कय तनाब (स्ट्रेस) कम करे खत्तिर बहुत नीक अहै। इससे पीठ अउर गर्दन कय मांसपेशियन कय जकड़न तुरंत दूर होइ जात अहै। कैसे करीं- कुर्सी पर सीधा बइठि जाईं अउर दुनों पैर जमीन पर सपाट राखि। अपने हाथन कय घुटनन पर राखि। सांस लेत भवा अपनी छाती कय आगे कय ओर निकारि अउर रीढ़ कय अंदर कय ओर झुकावत ऊपर देखीं। अब सांस छोड़त भवा रीढ़ कय बाहर कय ओर घुमावदार बनाईं अउर अपनी ठुड्डी कय छाती से लगाइ लीं।</p>
<p><strong>सीटेड स्पाइनल ट्विस्ट</strong>: लगातार बइठे से रीढ़ कय हड्डी मां जउन दबाव बनत अहै, ई आसन ओका रिलीज करत अहै। इ आसन कय करे से कमर कय निचला हिस्सा कय दरद मां भी आराम मिलत अहै। कैसे करीं- कुर्सी पर सीधा बइठि। अपने बांए हाथ कय दाहिने घुटना पर राखि अउर दाहिने हाथ कय कुर्सी कय पिछला हिस्सा पर टिकाईं। सांस छोड़त भवा अपने शरीर कय ऊपरी हिस्सा कय दाहिनी ओर मोड़ीं अउर कंधा कय ऊपर से पीछे कय ओर देखीं। 5-10 सेकंड रुका, फिर यही प्रक्रिया दूसरी तरफ से दोहराईं।</p>
<p><strong>चेयर पिजन पोज</strong>: ज्यादा देर बइठे से हमार हिप फ्लेक्सर्स टाइट होइ जात अहैं, जउनकर सीधा असर लोअर बैक पर पड़त अहै। ई आसन इहे तनाब कय कम करत अहै। इ कूल्हन अउर पीठ कय निचला हिस्सा कय स्ट्रेच कइके साइटिका कय दरद से भी राहत देत अहै। कैसे करीं- कुर्सी पर सीधा बइठि। अपने दाहिने पैर कय टखना कय उठाके बांए पैर कय घुटना कय ऊपर राखि। अब गहरी सांस लई अउर रीढ़ कय सीधा राखत भवा थोड़ा आगे कय ओर झुकि। कुछ सेकंड रुका अउर फिर पैर बदलि लीं।</p>
<p><strong>सीटेड फॉरवर्ड बेंड</strong>: ई आसन पूरी पीठ अउर हैमस्ट्रिंग कय एक रिलैक्सिंग स्ट्रेच देत अहै। ई दिमाग शांत करे अउर तनाब दूर करे मां भी मदद करत अहै। कैसे करीं- कुर्सी पर थोड़ा आगे कय ओर खिसक कय बइठि अउर पैरन कय बीच थोड़ा दूरी बनाइ लीं। गहरी सांस लई अउर छोड़त भवा धीरे-धीरे आगे कय ओर झुकीं, ताकि आपका पेट जांघन कय छुए। अपने हाथन कय नीचे जमीन कय तरफ ढीला छोड़ि दई अउर सिर कय भी नीचे झुका लीं। 30 सेकंड इसी पोजीशन मां रहा।</p>
<p><strong>ईगल आर्म्स</strong>: कंप्यूटर पर लगातार टाइपिंग करे से कंधन अउर ऊपरी पीठ मां जउन भारीपन आवत अहै, ई आसन ओका दूर करत अहै। कैसे करीं- सीधा बइठि अउर दुनों हाथन कय सामने लइ आव अउर बांई कोहनी कय दाई कोहनी कय ऊपर राखत भवा आपस मां क्रॉस करीं। अब दुनों हथेलियन कय मिलावे कय कोशिश करीं। अपनी कोहनियन कय कंधा कय बराबर ऊपर उठाईं अउर कंधन कय कानन से दूर रखीं। कुछ सांस इहां लई अउर फिर हाथ बदलि लीं।</p>
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		<item>
		<title>नींद कै कमी से कमजोर होत अहै दिमाग कै ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’</title>
		<link>https://upnewsonline.com/neend-ki-kami-se-kamzor-ho-raha-dimag-ka-blood-brain-barrier/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 15:38:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[हम सब जानत अही कि अच्छी सेहत खतिव सुकून भरी नींद लेबय बहुत जरूरी अहै, पै का आप जानत अही कि ठीक से न सोय पाबय आपके दिमाग का केतनी गहराई तक नुकसान पहुँचाय सकत अहै? हाल ही में भवा एक अध्ययन में इ चौंकावे वाला खुलासा भवा अहै कि नींद में बार-बार खलल पड़य &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>हम सब जानत अही कि अच्छी सेहत खतिव सुकून भरी नींद लेबय बहुत जरूरी अहै, पै का आप जानत अही कि ठीक से न सोय पाबय आपके दिमाग का केतनी गहराई तक नुकसान पहुँचाय सकत अहै? हाल ही में भवा एक अध्ययन में इ चौंकावे वाला खुलासा भवा अहै कि नींद में बार-बार खलल पड़य से हमार दिमाग कै ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ का भारी नुकसान पहुँचत अहै। आवा आसान भाषा में समझत अही कि इ रिसर्च का कहत अहै।</p>
<p><strong>दिमाग कै ‘सिक्योरिटी गार्ड’ अहै ब्लड-ब्रेन बैरियर</strong></p>
<p>‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ का आप अपने दिमाग कै एक बहुतै चुस्त सिक्योरिटी गार्ड या एक खास फिल्टर मानि सकत अही। इ दिमाग कै रक्त वाहिका कय चारों ओर कोशिका कय एक परत होत अहै। एकर काम का अहै? इ बहुतै चुनिंदा चीज का ही अंदर जाय देत अहै। इ दिमाग तक जरूरी ऑक्सीजन अउर पोषक तत्व तौ पहुँचावत अहै, पै खतरनाक बैक्टीरिया, विषैले पदार्थ अउर ज्यादातर दवाई का बाहर ही रोक देत अहै। इ तरहे इ हमार दिमाग का गंभीर नुकसान से बचावत अहै।</p>
<p><strong>नींद में खलल पड़य से का असर होत अहै?</strong></p>
<p>‘लैबमेड डिस्कवरी’ पत्रिका में छपा एक स्टडी के मुताबिक, जब हमार नींद पूरी नाहीं होत या ओमें बाधा आवत अहै, तौ इ बैरियर का नुकसान पहुँचत अहै। शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता बताइन अहै कि इ बैरियर कै डैमेज होय कै सीधा संबंध हमार सोचय-समझय कै क्षमता में कमी से अहै। एकर कारण अल्जाइमर जइसन बीमारी अउर दिमाग कै नस का प्रभावित करय वाली ढेर सारी समस्या पैदा होय सकत अहै।</p>
<p><strong>कैसे कमजोर पड़त अहै इ बैरियर?</strong></p>
<p>शोधकर्ता बताइन कि जब ब्लड-ब्रेन बैरियर का नुकसान पहुँचत अहै, तौ दू मुख्य परेशानी होत अहै:</p>
<p><strong>बढ़ी हुई पारगम्यता:</strong> कोशिका के बीच कै जगह से पानी, आयन अउर छोट-छोट अणु कय आवाजाही जरूरत से ज्यादा बढ़ि जात अहै।</p>
<p><strong>सफाई में रुकावट:</strong> दिमाग से बेकार पदार्थ का बाहर निकालय कय प्रक्रिया में बाधा आवत अहै।</p>
<p>इ नुकसान के पीछे मुख्य रूप से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, न्यूरोइन्फ्लेमेशन अउर आंत कै माइक्रोबायोम कय असंतुलन जइसन कारण शामिल पावा गवा अहै।</p>
<p><strong>सोयय-जागय कै बिगड़ा भवा चक्र भी जिम्मेदार अहै</strong></p>
<p>हमार शरीर कय एक आपन घड़ी होत अहै, जइसे सर्केडियन रिदम कहत अही। जब सोयय अउर जागय कै इ प्राकृतिक चक्र कै तालमेल बिगड़ि जात अहै, तौ इ भी ब्लड-ब्रेन बैरियर का तोड़य कै काम करत अहै। एकरे अलावा, नींद से जुड़ा एक खास बीमारी- ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के कारण भी इ बैरियर का नुकसान पहुँचय कै सबूत मिला अहै।</p>
<p><strong>याददाश्त पर सीधा असर</strong></p>
<p>दिमाग कै वा हिस्सा जउन हमार याददाश्त से जुड़ा होत अहै, ओका ‘हिप्पोकैंपस’ कहत अही। अध्ययन में इ बात सामने आई अहै कि अगर हिप्पोकैंपस में ब्लड-ब्रेन बैरियर टूटत अहै, तौ इ साफ तौर पर हमार याद राखय अउर सोचय-समझय कै क्षमता में कमी कै संकेत होय सकत अहै।</p>
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		<title>पैदल चलै से गोड़ मां दरद होत अहै? जानि लीं कवन 6 गलती आप अनजाने मां करत अहा</title>
		<link>https://upnewsonline.com/paidal-chalne-se-hone-lagta-hai-pairo-mein-dard-galtiyan/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[upnews]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 16:05:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
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					<description><![CDATA[पैदल चलै क लोग अक्सर गम्भीरता से नाहीं लेत, जब भी एक्सरसाइज क बात आवत अहै तौ ओमा पैदल चलै क सबसे आखिर मां रखा जात अहै या ओकर चर्चा बहुत कम होत अहै। जबकि पैदल चलबौ एक असरदार एक्सरसाइज अहै जेसे सेहत क अनगिनत फायदा मिल सकत अहै। वाक करत समय क गलती: अगर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पैदल चलै क लोग अक्सर गम्भीरता से नाहीं लेत, जब भी एक्सरसाइज क बात आवत अहै तौ ओमा पैदल चलै क सबसे आखिर मां रखा जात अहै या ओकर चर्चा बहुत कम होत अहै। जबकि पैदल चलबौ एक असरदार एक्सरसाइज अहै जेसे सेहत क अनगिनत फायदा मिल सकत अहै।</p>
<p><strong>वाक करत समय क गलती</strong>: अगर आप रोज वाक करत अहा तौ इ काफी नाहीं अहै, काहे से कैसे वाक कीन गै अहै ऊ पर भी ध्यान दीन जवन जरूरी अहै। एक रिसर्च क मुताबिक, रोज करीब 8,700 कदम चलै से मरै क खतरा 60% तक कम होइ जात अहै। इ स्टडी 1,10,000 लोगन पर कीन गै रही, जेमा इ पता चला कि रोज 7,100 कदम चलै से दिल क बीमारी क खतरा 51% तक कम होइ जात अहै। पर सिर्फ पैदल चलब काफी नाहीं अहै, एकरे साथ इहो मायने रखत अहै कि वाक करत समय गति कैसी अहै, पोस्चर (देहि क बनावट) कइसन अहै अउर गोड़ कइसन रखा जात अहै। अइसन बहुत सी गलती अहै जौन लोग वाक करत समय करत अहैं पर ओ पर कबहूँ ध्यान नाहीं देत।</p>
<p><strong>वॉकिंग एक्सरसाइज नाहीं?</strong>: का आपको भी अइसन लागत अहै कि वाक करब अच्छा एक्सरसाइज मा नाहीं अहै? अगर हाँ तौ आप गलत अहा। वाक करब सबसे आसान अउर असरदार तरीका अहै, चाहे वजन कम करब होय या दिल क सेहत सही रखब होय। एकर खातिर घंटा भर चलब जरूरी नाहीं। एक रिपोर्ट क अनुसार, रोज 10 मिनट क एक्सरसाइज से भी सेहत क बहुत फायदा मिल सकत अहै।</p>
<p><strong>बहुत धीरे चलब</strong>: शरीर कइसन काम करत अहै, इ देखै खातिर दिल क धड़कन, शरीर क तापमान, सांस लेवै क गति, बीपी अउर ऑक्सीजन सैचुरेशन जइसन पाँच चीज देखी जात अहै। एक रिपोर्ट क मुताबिक, शरीर क फंक्शन क पता लगावै खातिर छठा संकेत पैदल चलब अहै। अइसन मां अगर कउनो बहुत धीरे चलत अहै तौ ऊ डिमेंशिया क संकेत होइ सकत अहै।</p>
<p><strong>चलत समय फोन हाथ मां धरब</strong>: वाक करत समय फोन हाथ मां राखब अउर बीच-बीच मां कउनो मैसेज क जवाब देत रहब, रील्स देखब या सोशल मीडिया क इस्तेमाल करब पोस्चर बिगाड़ सकत अहै। इसे गर्दन अउर कमर क निचला हिस्सा मां तकलीफ होइ सकत अहै। एकरे अलावा, दिमाग क जौन आराम मिलै चाही चलत समय, ऊ नाहीं मिल पावत।</p>
<p><strong>हाथ क न हिलाइब</strong>: अगर आपकी चलत समय हाथ न हिलै क आदत अहै या हाथ बहुत कम हिलत अहैं तौ इ वाक करै क गलत आदत मा शामिल अहै। हाथ प्राकृतिक रूप से चलत समय जब हिलत अहैं तौ ऊ गोड़ क साथ बैलेंस बनावत रहत अहैं ताकी शरीर क बैलेंस बनल रहे। इसे चलै मां परेशानी होत अहै अउर गिरै पर शरीर संभल नाहीं पावत।</p>
<p><strong>गलत जूता पहिरब</strong>: भारी-भरकम जूता या ओकर पैड क सख्त होब गोड़न क थकाव देइ क साथ दरद क कारण भी बनत अहै। वाक करै खातिर जूता अइसन होय चाही जौन हल्का होय, हवादार होय अउर पानी से बचावै।</p>
<p><strong>गोड़ क अंगुरिन क अनदेखा करब</strong>: शायद आपको पता न होय पर गोड़ क अंगुरिन क मजबूती चलै क क्षमता क बारे मां बतावत अहै। जब हम चलत अही तौ गोड़ क अंगुरिया ही अहैं जौन आगे बढ़ै मां मदद करत अहैं।</p>
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